दिल्ली में अपनी मर्जी से किताबें और ड्रेस खरीद पाएंगे पेरेंट्स, सरकार की स्कूलों पर सख्ती

दिल्ली में नए आदेश के बाद स्कूल अब पेरेंट्स को तय दुकानों से सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे, जिससे खर्च का बोझ कम होगा.

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Delhi government Schools

Delhi Schools नई एकेडमिक सेशन की शुरुआत से पहले पैरेंट्स के लिए राहत भरी खबर सामने आई है, जिसने लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी परेशानी को कम कर दिया है. अब तक कई प्राइवेट स्कूल पेरेंट्स को तय दुकानों से ही किताबें, यूनिफॉर्म और दूसरे जरूरी सामान खरीदने के लिए मजबूर करते थे, जिससे खर्च काफी बढ़ जाता था. लेकिन अब डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन के नए आदेश के बाद ये स्थिति बदलने वाली है. इस फैसले से पैरेंट्स को न सिर्फ आर्थिक राहत मिलेगी बल्कि उन्हें अपनी पसंद के हिसाब से खरीदारी करने की आजादी भी मिलेगी.

स्कूलों पर सख्त नियम लागू

डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन ने साफ कर दिया है कि कोई भी स्कूल अब किसी एक दुकान से सामान खरीदने का दबाव नहीं बना सकता. इसके साथ ही स्कूल तय सिलेबस से बाहर एक्स्ट्रा चीजें भी नहीं थोप सकेंगे. यूनिफॉर्म को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि कम से कम तीन साल तक यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं किया जाएगा.

पैरेंट्स दर्ज करा सकेंगे शिकायत 

अगर कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो पैरेंट्स सीधे शिकायत दर्ज कर सकते हैं - 

  • नोडल अधिकारी: डॉ. राजपाल सिंह
  • हेल्पलाइन: 9818154069
  • ईमेल: ddeact1@gmail.com
  • समय: सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक

ट्रांसपेरेंसी पर खास जोर

पेरेंट्स को सही जानकारी मिले, इसके लिए स्कूलों को कई जरूरी निर्देश दिए गए हैं. हर क्लास के अनुसार किताबों और जरूरी सामान की पूरी लिस्ट स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी. यूनिफॉर्म की डिटेल भी साफ-साफ बतानी होगी. साथ ही कम से कम पांच नजदीकी दुकानों की जानकारी भी शेयर करनी होगी ताकि पेरेंट्स के पास विकल्प मौजूद रहें.

नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई

अगर कोई स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करता या पेरेंट्स को गुमराह करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. पेरेंट्स अब सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिससे सिस्टम में जवाबदेही बढ़ेगी. सरकार ने ये भी स्पष्ट किया है कि खरीदारी करते समय तय स्टैंडर्ड्स का पालन जरूरी होगा, लेकिन स्कूल इस पर कोई आपत्ति नहीं जता सकते.

राहत के साथ एक बड़ा सवाल

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इस फैसले से पैरेंट्स को जरूर राहत मिली है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या सभी प्राइवेट स्कूल इन नियमों को पूरी ईमानदारी से लागू करेंगे. अगर ऐसा होता है तो ये फैसला शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है.

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