UGC बनाम IGNOU: इन छात्रों की डिग्री हो सकती है रद्द, पूरे करियर पर पड़ सकता है असर

IGNOU MA Psychology Issue: यह पूरा विवाद NCAHP एक्ट 2021 से जुड़ा है. इसमें कहा गया है कि हेल्थकेयर और एलाइड कोर्स केवल रेगुलर (ऑफलाइन) मोड में ही मान्य होंगे, क्योंकि इनमें प्रैक्टिकल और क्लिनिकल ट्रेनिंग जरूरी होती है.

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IGNOU MA Psychology Issue: कई छात्रों का भविष्य संकट में

IGNOU Course UGC Regulations: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) के हजारों छात्रों का भविष्य फिलहाल अधर में लटक गया है. दरअसल, यूनिवर्सिटी ने इस साल MA साइकोलॉजी प्रोग्राम के लिए करीब 17,000 नए एप्लीकेशन्स आमंत्रित किए हैं. जबकि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने ऐसे कोर्सेज में डिस्टेंस मोड के जरिए एडमिशन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं. 

क्या MA साइकोलॉजी डिग्री हो जाएगी अमान्य?

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन की एक टीचर ने MA साइकोलॉजी में एडमिशन लेकर लगभग 9,000 रुपये फीस जमा की और वह सितंबर से ऑनलाइन क्लास भी अटेंड कर रही हैं. लेकिन बाद में उसे पता चला कि इस कोर्स को डिस्टेंस मोड में करने पर रोक है. इसके बावजूद उन्हें जून में परीक्षा देने का शेड्यूल भी मिल चुका है. इस तरह की चीजों के चलते कई छात्र असमंजस में हैं.

क्या हैं UGC के निर्देश

यह पूरा विवाद NCAHP एक्ट 2021 से जुड़ा है. इसमें कहा गया है कि हेल्थकेयर और एलाइड कोर्स केवल रेगुलर (ऑफलाइन) मोड में ही मान्य होंगे, क्योंकि इनमें प्रैक्टिकल और क्लिनिकल ट्रेनिंग जरूरी होती है. इसके बाद UGC ने जुलाई-अगस्त 2025 सेशन से साइकोलॉजी, न्यूट्रिशन, माइक्रोबायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्सों में नए एडमिशन रोकने के निर्देश दिए थे. इसके साथ ही चेतावनी दी गई थी कि नियमों के खिलाफ प्राप्त डिग्री अमान्य मानी जाएगी.

IGNOU ने क्या कहा? 

IGNOU का कहना है कि इस फैसले को यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल से मंजूरी मिली है. अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादातर छात्र इन कोर्सों को प्रोफेशनल प्रैक्टिस के लिए नहीं, बल्कि अकादमिक रुचि के लिए करते हैं. यूनिवर्सिटी ने अपने प्रॉस्पेक्टस में एक डिस्क्लेमर भी दिया है, जिसमें छात्रों को ‘सोच-समझकर फैसला लेने' की सलाह दी गई है.

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करियर और आगे की पढ़ाई पर असर

इस विवाद का असर छात्रों के करियर पर पड़ सकता है. अगर डिग्री अमान्य मानी जाती है, तो छात्र NET (नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट), JRF (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) या दूसरी हायर एजुकेशन के लिए अप्लाई नहीं कर पाएंगे. इससे उनकी आगे की पढ़ाई और करियर के अवसर सीमित हो सकते हैं.

हालांकि IGNOU ने यह साफ किया है कि पिछले साल एडमिशन ले चुके छात्रों की डिग्री जारी रहेगी और उनके एडमिशन रद्द नहीं किए जाएंगे. लेकिन मौजूदा हालात ने छात्रों में चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में छात्रों को एडमिशन लेने से पहले सभी नियमों और शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी है.

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