AI In School Syllabus: भारत के स्कूलों में जल्द सभी क्लारूम एआई से लैस हो जाएंगे. सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने इसे लेकर तैयारी भी कर ली है और आने वाले साल से बच्चों को एआई की ABCD भी पढ़ाई जाएगी. बताया जा रहा है कि तीसरी क्लास से ही एआई बच्चों की पढ़ाई में शामिल हो जाएगा और इसके बाद जैसे-जैसे बच्चे बड़ी क्लास में जाएंगे, वैसे ही इसका लेवल भी बढ़ता जाएगा. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा है कि भारत को एआई पावर हाउस बनाने के लिए कॉलेज और स्कूलों के सिलेबस में बदलाव किया जाएगा. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि दुनिया के किन देशों ने एआई को पब्लिक एजुकेशन सिस्टम में पहले ही शामिल कर लिया है. वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं, जो भारत की तरह इसे लेकर बड़ी तैयारी कर चुके हैं.
एआई स्किल ही फ्यूचर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर भले ही कई लोगों के मन में डर पैदा हो रहा है, लेकिन ये आने वाले कुछ सालों में सब कुछ बदलकर रख देगा. जो लोग अपनी स्किल को एआई से अपग्रेड कर लेंगे, उनकी नौकरी सेफ रहेगी और तरक्की मिलना भी लगभग तय है. एनडीटीवी एआई समिट में माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के चीफ से लेकर Linkedin के हेड ने भी यही बात कही. यही वजह है कि अब तमाम देश स्कूल से ही बच्चों को एआई का पाठ पढ़ाना शुरू कर चुके हैं.
सिंगापुर ने बना लिया टारगेट
सिंगापुर ने एआई की दुनिया में तेजी से चलना शुरू कर दिया है और उसका टारगेट है कि 2030 तक किसी भी हाल में एआई के क्षेत्र में वर्ल्ड लीडर बनना है. यहां एआई का इस्तेमाल स्कूलों में शुरू हो चुका है. इसके जरिए टीचर्स के काम को आसान बनाया जा रहा है और बच्चों की मदद के लिए 'AI enabled companion का इस्तेमाल किया जा रहा है.
UAE ने सभी क्लासेस के लिए किया अनिवार्य
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को किंडरगार्टन (KG) से लेकर 12वीं कक्षा तक अनिवार्य करने वाला पहला देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) बना है. पिछले साल यानी 2025 में ही यूएई कैबिनेट ने एजुकेशन के हर लेवल पर एआई को सब्जेक्ट के तौर पर शामिल करने की मंजूरी दी थी. यहां के स्कूलों में अब एआई को एक सब्जेक्ट की तरह पढ़ाया जा रहा है, जिससे स्कूल से पास आउट होने वाले बच्चे पहले से ही एआई की बारीकियों से लैस होंगे.
साउथ कोरिया
टेक्नोलॉजी की बात हो रही हो और साउथ कोरिया का नाम ना आए, भला ऐसा कैसे हो सकता है. साउथ कोरिया ने पिछले साल से ही स्कूलों में एआई सिलेबस शामिल कर दिया है. यहां हर बच्चे के लिए 'पर्सनलाइज्ड AI ट्यूटर' और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म की व्यवस्था की गई है. लगभग सभी ग्रेड में एआई कोर्स को शामिल कर दिया गया है.
चीन भी तैयार कर रहा फ्यूचर टेक लीडर
एआई या फिर टेक्नोलॉजी के मामले में चीन भी किसी से कम नहीं है. चीन काफी पहले से ही स्कूलों में एआई का इस्तेमाल कर पढ़ाई को बेहतर करने की कोशिश कर रहा है. चीन के प्राइमरी स्कूलों में साल में कम से कम आठ घंटे की AI क्लास अनिवार्य की गई हैं. 'फॉर्च्यून' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, छह साल तक की उम्र के बच्चे चैटबॉट का इस्तेमाल, AI की बेसिक समझ और उसकी बारीकियों को सीखेंगे. शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के 184 स्कूलों को AI प्रोग्राम के पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना था, अब इसे पूरे चीन में लागू किया जा रहा है.
इन देशों ने भी कस ली है कमर
भारत के अलावा फिनलैंड, जापान और अमेरिका जैसे देशों ने भी एआई को स्कूलों के सिलेबस में शामिल करने की तैयारी कर ली है. कई स्कूलों में इसका इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है. फ्यूचर की डिमांड को देखते हुए दुनिया के तमाम देश एआई को स्कूलों में शामिल कर अपना भविष्य संवारने की तैयारी में जुट गए हैं.
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