CBSE बोर्ड की 12वीं क्लास का साइकोलॉजी एग्जाम 5 मार्च को हुआ. परीक्षा सुबह 10:30 बजे शुरू हुई और दोपहर 1:30 बजे तक चली. पेपर शुरू होने से पहले स्टूडेंट्स को सवाल पढ़ने के लिए 15 मिनट का समय भी दिया गया. एग्जाम खत्म होने के बाद स्टूडेंट्स और टीचर्स दोनों की तरफ से कई तरह के रिएक्शन सामने आए. ज्यादातर स्टूडेंट्स का कहना है कि पेपर बहुत मुश्किल नहीं था. अगर किसी ने पूरे साल NCERT और क्लास में पढ़ाए गए कॉन्सेप्ट्स को अच्छे से समझा था तो सवाल हल करना ज्यादा कठिन नहीं लगा. हालांकि कई स्टूडेंट्स ने ये भी कहा कि पेपर थोड़ा लंबा जरूर था, इसलिए टाइम मैनेजमेंट करना जरूरी हो गया था. कुल मिलाकर एग्जाम को आसान से ठीक-ठाक लेवल का माना जा रहा है.
टीचर्स ने बताया कैसा रहा पेपर
साइकोलॉजी टीचर डॉ. अनुराधा भाटिया, जो सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल गाजियाबाद में PGT साइकोलॉजी हैं, उन्होंने बताया कि 2026 का साइकोलॉजी पेपर ज्यादा कठिन नहीं था. उनके मुताबिक पेपर में सिलेबस के अलग-अलग टॉपिक्स से अच्छे तरीके से सवाल पूछे गए थे. उन्होंने कहा कि पेपर CBSE के मार्किंग स्कीम और गाइडलाइंस के अनुसार तैयार किया गया था. इसमें थ्योरी के साथ-साथ ऐसे सवाल भी शामिल थे जिनमें स्टूडेंट्स को कॉन्सेप्ट समझकर जवाब देना था. इससे स्टूडेंट्स की समझ और सोचने की केपेबिलिटी दोनों को परखा जा सका.
कॉन्सेप्ट समझने वाले स्टूडेंट्स के लिए रहा आसान
विटी इंटरनेशनल स्कूल उदयपुर के PGT साइकोलॉजी डॉ. रवनीत हांडा ने कहा कि पेपर अच्छी तरह तैयार किया गया था और सिलेबस के अनुसार ही सवाल पूछे गए थे. उनके मुताबिक पेपर में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों तरह के सवालों का अच्छा मिक्स देखने को मिला. केस-बेस्ड और एप्लिकेशन वाले सवालों ने स्टूडेंट्स को सिर्फ रटने के बजाय कॉन्सेप्ट समझने के लिए मोटिवेट किया. उन्होंने कहा कि जिन स्टूडेंट्स की बेसिक समझ अच्छी थी, उनके लिए पेपर संभालना ज्यादा मुश्किल नहीं रहा.
कई सवाल थे प्रैक्टिकल समझ से जुड़े
लांसर्स आर्मी स्कूल की सब्जेक्ट एक्सपर्ट हीना कुलकर्णी के अनुसार पेपर का फोकस सिर्फ याद करने पर नहीं बल्कि प्रैक्टिकल समझ पर था. उन्होंने बताया कि कई सवाल ऐसे थे जिनमें स्टूडेंट्स को साइकोलॉजी के कॉन्सेप्ट्स को रियल लाइफ सिचुएशन से जोड़कर समझाना था. पेपर ज्यादा ट्रिकी नहीं था, लेकिन सवालों को ध्यान से पढ़ना जरूरी था.
स्टूडेंट्स का क्या रहा रिएक्शन
विटी इंटरनेशनल स्कूल उदयपुर की क्लास 12 की स्टूडेंट ज्योत्सना राठौरे ने कहा कि पेपर अच्छा था और इसमें थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों तरह के सवाल शामिल थे. उनके मुताबिक केस-बेस्ड सवाल थोड़े चैलेंजिंग थे, लेकिन ध्यान से पढ़ने पर उन्हें हल किया जा सकता था. वहीं सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल गाजियाबाद की स्टूडेंट्स खुशी शर्मा, आयुषी जैन और गीतांजलि त्यागी ने बताया कि पेपर थोड़ा लंबा था और इसमें कॉन्सेप्ट की अच्छी समझ जरूरी थी. उन्होंने कहा कि ऑलपोर्ट ट्रेट थ्योरी और ग्रुप प्रोसेस से जुड़े कुछ सवाल थोड़े कठिन लगे. हालांकि सही टाइम मैनेजमेंट के साथ पेपर को अच्छे से अटेम्प्ट किया जा सकता था.
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