केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल में बदल गया है. OSM में टेंडर की प्रक्रिया में बदलाव की वजह से CBSE की लगातार किरकिरी हो रही थी. ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए मोदी सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है. सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव (सेक्रेटरी) हिमांशु गुप्ता दोनों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है. लंबे समय से सुलग रहे इस विवाद के बाद हुई इस कार्रवाई ने शिक्षा जगत से लेकर आम जनता तक सबको चौंका दिया है.
जांच समिति का किया गया गठनसरकार ने न सिर्फ दोनों शीर्ष अधिकारियों का तबादला किया है, बल्कि इस पूरे खरीद (Procurement) मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति (Inquiry Committee) का भी गठन कर दिया है. यह कमेटी जांच करेगी कि ओएसएम सेवाओं के टेंडर और अलॉटमेंट में कहां और क्या खामियां थीं.
इस समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चौहान करेंगी. बता दें कि समिति की अध्यक्ष को आवश्यकतानुसार, अन्य कार्यालयों के अधिकारियों से सहायता प्राप्त करने का अधिकार होगा.
इसके अलावा समिति को सचिवालयी सहायता क्षमता निर्माण आयोग द्वारा प्रदान की जाएगी. और यह समिति अपनी रिपोर्ट एक माह के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (Department of Personnel & Training) के सामने प्रस्तुत करेगी.
बता दें कि 1996 बैच के आईएएस ऑफिसर राहुल सिंह को अगस्त 2025 में ही सरकार ने दो साल का विस्तार दिया था. यानी इनका कार्यकाल 11 नवंबर 2027 तक था .
क्यों हटाए गए दोनों अधिकारी को कहां थी OSM की प्रक्रिया में खामियां?दरअसल, CBSE ने डिजिटल मार्किंग यानि OSM करने के लिए पिछले साल टेंडर निकाला लेकिन उसे दो बार रद्द करना पड़ा. तीसरी बार में तीन कंपनियों ने टेंडर डाला. पहली Tata consultancy services दूसरी Rankguru Technology solutions और तीसरी कंपनी Coempt Edu Teck थी.
रांची के सार्थक सिद्धांत नाम के छात्र का पहला आरोप है कि दो बार टेंडर रद्द होने के बाद बड़ी सफाई से इसके नियमों में बदलाव किए गए. RFP यानि Request For Proposal में कहा गया कि तीन साल का औसत कंपनी का टर्न ओवर 50 करोड़ के आसपास होना चाहिए. ये नियम भी Coempt कंपनी का financial log sheet देखकर पता चलता है.
मसलन TCS हजारों करोड़ की मल्टीनेशनल कंपनी है दूसरा Rankguru Technology का सालाना टर्न ओवर 117.56 करोड़ का है जबकि Coempt कंपनी की शीट से पता चलता है कि मार्च 2023 में कंपनी का सालाना टर्न ओवर 32.1 करोड़ मार्ट 2024 में 52.7 करोड़ जबकि मार्च 2025 में 67.8 करोड़ थी. तीनों साल का मिलाने पर औसत टर्नओवर 50.86 हो रहा था यानि बहुत कम अंतर से ये कंपनी बोली लगाने के लिए क्वालिफाई कर पाई थी.
दूसरा गंभीर आरोप सार्थक सिद्धांत ने लगाया कि Coempt कंपनी को फायदा देने के लिए RFP की शर्तों में अगस्त 2025 में तीसरी बार टेंडर निकाला गया तब इसको बदलकर केवल poor performance or black listed earlier के सफाई से जोड़ दिया गया.
आरोप लगा कि black listed earlier इसलिए जोड़ा गया क्योंकि Coempt कंपनी का पहले नाम Globarena था जिसको तेलांगाना शिक्षा बोर्ड ने 2019 में ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था. अगर 'Earlier' न लिखा जाता तो ये कंपनी टेंडर भर ही नहीं पाती.
सार्थक ने ये भी आरोप लगाया कि कि CMMI यानि Capabilitiy Maturity Model Integration level को भी 5 से कम करके 3 कर दिया गया.
CBSE पर ये आरोप लगे कि पहले के RFP में कंपनी के पास data centre और Disaster Recovery Centre होने की भी शर्त रखी गई थी जिससे TCS कंपनी के क्वालिफाई होने की संभावना बढ़ती लेकिन इसे बदलकर लचीली शर्त रखी गई कि खुद का डाटा सेंटर बनाने या खरीदने के बजाए कंपनी किसी तीसरे पक्ष यानि AWS, Azure या google cloud के डाटा सेंटर का उपयोग कर सकती है.
जब यह विवाद लगातार बढ़ता गया और सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक इस पर सवाल उठने लगे, तो केंद्र सरकार ने बिना देर किए एक्शन मोड में आना सही समझा.
Exclusive : CBSE के OSM Tender का असली सच क्या है? आखिर किसके इशारे पर बदले गए Blacklisting Clause?