Nitin Nabin Profile: बीजेपी को नितिन नबीन के रूप में नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल चुका है. नितिन नबीन बीजपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं. पीएम मोदी की मौजूदगी में उन्होंने औपचारिक तौर पर ये पदभार संभाला. इस दौरान पीएम मोदी ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि अब वो हमारे बॉस बन गए हैं और हम उनके कार्यकर्ता हैं. पीएम मोदी ने कहा कि अब नितिन नबीन उनके काम का आकलन करेंगे. ऐसे में आज हम आपको बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का कामकाज और उनसे जुड़ी तमाम जरूरी जानकारी देने जा रहे हैं.
45 साल के युवा अध्यक्ष
खास बात यह भी है कि बीजेपी की स्थापना के 45 साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी को भी 45 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है. बीजेपी के इतिहास में यह संयोग संगठन के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है. युवा ऊर्जा और अनुभव के संतुलन के साथ नितिन नबीन से पार्टी को नई राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद की जा रही है. आईए नितिन नबीन के सियासी सफर पर एक नजर डालते हैं.
अपने दम पर बनाई पहचान
23 मई 1980 को रांची में जन्मे नितिन नबीन की शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई. बिहार की राजनीति में नितिन नबीन का नाम नया नहीं है. राजनीति भले ही उन्हें विरासत में मिली, लेकिन पहचान अपने दम पर बनाई. उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा की गिनती भाजपा के कद्दावर नेताओं में होती थी, जो पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे थे. पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संगठन के सधे हुए कार्यकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रुप में अपनी पहचान बनाई.
कई अहम विभागों की जिम्मेदारी
बिहार की एनडीए सरकार में नितिन नबीन ने सड़क निर्माण, शहरी विकास, आवास और विधि जैसे अहम विभाग संभाले. प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ का यह मेल ही उन्हें पार्टी के भीतर अलग पहचान देता है. हालांकि, 2025 में मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
दिखाई संगठन की ताकत
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नितिन नबीन के राजनीतिक करियर का निर्णायक मोड़ माना जाता है. जिस समय भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस को मजबूत माना जा रहा था और ज्यादातर सर्वे कांग्रेस की वापसी का दावा कर रहे थे, उस वक्त भाजपा ने नबीन पर भरोसा जताया. संगठनात्मक पुनर्गठन, बूथ स्तर तक समन्वय और रणनीतिक तैयारी का नतीजा रहा कि बीजेपी ने स्पष्ट बहुमत से सत्ता में वापसी की.
संगठन के भीतर उन्हें ऐसा व्यक्ति माना जाता है जो नेतृत्व की सीमाओं को समझता है और वरिष्ठ जनों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है. करीब दो दशकों का संगठनात्मक और चुनावी अनुभव, पांच बार विधायक रहने का रिकॉर्ड और मंत्री पद के अनुभव ने नितिन नबीन को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में एक मजबूत चेहरा बनाया.