नक्सलियों के पुराने अड्डे से उभरा स्टेट टॉपर, रुपौली के अंशराज ने 97.4% अंक लाकर हासिल किया बिहार में चौथा स्थान

पूर्णिया के नक्सल प्रभावित क्षेत्र से अंशराज ने बिहार बोर्ड में 97.4 प्रतिशत अंक लाकर चौथा स्थान हासिल किया. गांव में रहकर पढ़ाई और कड़ी मेहनत से मिली इस सफलता ने पूरे इलाके को गर्व से भर दिया.

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पूर्णिया के नक्सल प्रभावित क्षेत्र से अंशराज ने बिहार बोर्ड में 97.4 प्रतिशत अंक लाकर चौथा स्थान हासिल किया.

Bihar News: बिहार में पूर्णियां जिले के रुपौली प्रखंड का इलाका कभी नक्सलियों के प्रभाव के लिए जाना जाता था. 90 के दशक में यहां दिन के समय भी डर का माहौल रहता था और कई संपन्न परिवार शहरों की ओर पलायन कर गए थे. लेकिन समय के साथ हालात बदले और विकास की नई तस्वीर सामने आई. खेती विशेषकर मक्का उत्पादन से आर्थिक स्थिति सुधरी और धीरे-धीरे शिक्षा का माहौल भी मजबूत हुआ. इसी बदले माहौल से एक नई सफलता की कहानी सामने आई है.

अंशराज ने 97.4 फीसदी अंक के साथ चौथा स्थान

उत्क्रमित हाई स्कूल बैरिया के छात्र अंशराज ने बिहार बोर्ड परीक्षा में 487 अंक यानी 97.4 प्रतिशत हासिल कर पूरे राज्य में चौथा स्थान प्राप्त किया है. सामान्य परिवार से आने वाले अंशराज ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया. उन्हें उम्मीद थी कि उनका रिजल्ट अच्छा आएगा लेकिन टॉपर सूची में शामिल होने का अंदाजा तब हुआ जब उन्हें बोर्ड द्वारा सत्यापन के लिए बुलाया गया.

गांव में रहकर की पढ़ाई

अंशराज ने अपनी पूरी पढ़ाई गांव में रहकर ही की. आर्थिक स्थिति साधारण होने के कारण शहर जाकर पढ़ाई करना संभव नहीं था. उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन कोचिंग के साथ रोजाना 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी की. उनके शिक्षक सुमित कुमार के अनुसार अंश बचपन से ही मेधावी था और उसमें आगे बढ़ने का जज्बा था जो उसे खास बनाता है.

परिवार से मिला प्रेरणा और सहयोग

अंशराज के पिता मुकेश कुमार स्वास्थ्य केंद्र में एम्बुलेंस तकनीशियन हैं जबकि मां ब्यूटी कुमारी उसी स्कूल में संगीत शिक्षिका हैं. परिवार में शिक्षा का माहौल रहा है क्योंकि उनके दादा भी शिक्षक थे. मां ने बेटे की पढ़ाई में विशेष ध्यान दिया और पिता ने हर कदम पर साथ दिया. बेटे की सफलता पर परिवार बेहद खुश है और इसे दादा के सपने के पूरा होने के रूप में देख रहा है.

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विज्ञान और गणित में शानदार प्रदर्शन

अंशराज को गणित और विज्ञान विषय बेहद पसंद हैं. उन्होंने गणित में 97 और विज्ञान में 99 अंक प्राप्त किए हैं. इसके अलावा संस्कृत में 99 और सामाजिक विज्ञान में 96 अंक हासिल किए. उनकी योजना इंटर में गणित लेकर आगे आईआईटी की तैयारी करने और सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने की है.

नक्सल क्षेत्र से शिक्षा की नई पहचान

रुपौली और आसपास का इलाका जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था आज शिक्षा और विकास की नई मिसाल बन रहा है. अंशराज की सफलता ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है. गांव में जश्न का माहौल है और हर कोई इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है.

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