राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत के सभी हाई स्कूल में अगले 2-3 वर्ष के भीतर ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध होगा. उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए प्रधान ने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी प्रकार की शिक्षा को कृत्रिम मेधा (एआई) के साथ जोड़ा जाना चाहिए.
60 % हाई स्कूल ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन से जुड़े हैं
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षकों को एआई ज्ञान प्रदान करने के लिए क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. प्रधान ने कहा कि देश में इस समय लगभग 60 प्रतिशत हाई स्कूल ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन से जुड़े हुए हैं.अगले 2-3 साल में देश के सभी हाई स्कूल ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन से जुड़ जाएंगे. एआई पर मंत्री ने कहा कि देश इस तकनीक में सबसे आगे है.
प्रधान ने कहा, 'एआई एक ऐसा विषय है जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रयुक्त है. आज, जब हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नए पाठ्यक्रम को लागू कर रहे हैं., एआई का प्राथमिक ज्ञान कक्षा तीन से होगा.' उन्होंने कहा कि लगभग सभी मातृभाषाएं एआई से जुड़ी हुई हैं. मंत्री ने अपने लिखित उत्तर में कहा कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में है और अधिकतर स्कूल राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों के दायरे में आते हैं. प्रधान ने कहा, 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के महत्व और स्कूली पाठ्यक्रम में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है.'
ये भी पढ़ें- ‘भारत में LPG की समस्या नहीं, LOP की समस्या', राहुल गांधी पर प्रह्लाद जोशी का वार
एजुकेशन को AI से जोड़े जाने पर जोर
आवश्यक विषयों, कौशल और क्षमता आदि के पाठ्यचर्या एकीकरण के तहत, नीति में उल्लेख किया गया है कि सभी स्तरों पर छात्रों में इन विभिन्न महत्वपूर्ण कौशल को विकसित करने के लिए प्रासंगिक चरणों में एआई, डिजाइन ‘थिंकिंग' आदि जैसे समसामयिक विषयों की शुरूआत सहित ठोस पाठ्यचर्या और शैक्षणिक पहल की जाएगी.
प्रधान ने कहा, 'इस पहल का उद्देश्य शिक्षण और सीखने की प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी को एकीकृत कर शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है.' मंत्री ने बताया कि ग्यारहवीं कक्षा के कंप्यूटर विज्ञान और ग्यारहवीं कक्षा की सूचना विज्ञान प्रथाओं की मौजूदा एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के बारे में बात करती हैं.
स्कूली शिक्षा में AI, ‘कम्प्यूटेशनल थिंकिंग' को बढ़ावा देने की पहल
स्कूली छात्रों (कक्षा 6-12) के बीच जागरूकता और मूलभूत दक्षताओं और शिक्षकों के बीच एआई साक्षरता के निर्माण के लिए एआई को शामिल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने पिछले कुछ वर्षों में स्कूली शिक्षा में कृत्रिम एआई और ‘कम्प्यूटेशनल थिंकिंग' (सीटी) को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं.इस पहल का उद्देश्य शिक्षण और सीखने की प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करके शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है.
स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्कूली छात्रों में एआई-तत्परता विकसित करने के लिए पाठ्यक्रम विकसित किया है. यह पाठ्यक्रम सत्र 2026-27 में कक्षा 3 से 8वीं तक लागू किया जाएगा.
इनपुट- भाषा