अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द हो जाएगी तो छात्रों का क्या होगा? जान लीजिए जवाब

Al-Falah University Students: अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कई डॉक्टरों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है, आतंकी हमले को अंजाम देने वाला उमर भी इसी यूनिवर्सिटी में काम करता था.

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक्शन

Al-Falah University Students: दिल्ली में बम धमाके के बाद से ही फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी काफी ज्यादा चर्चा में है. ये वही यूनिवर्सिटी है, जहां से दो आतंकी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया और तीसरे ने दिल्ली में आकर कार ब्लास्ट किया. इस आतंकी हमले के बाद से ही अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ कई तरह की जांच हो रही है और अब इसके मालिक जावेद अहमद सिद्दीकी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. ऐसी तमाम कार्रवाई के बीच इस यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले और यहां से पास होने वाले सैकड़ों छात्रों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, सवाल है कि अगर यूजीसी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द कर दी तो क्या होगा? आइए जानते हैं कि जब किसी यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द होती है तो वहां पढ़ने वाले छात्रों का क्या होता है. 

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर जांच की आंच

दिल्ली में बम धमाके और आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद से ही अल-फलाह यूनिवर्सिटी तमाम एजेंसियों के रडार पर है. यूनिवर्सिटी की फंडिंग से लेकर बाकी तमाम तरह की चीजों की जांच हो रही है. बताया गया है कि कुछ वित्तीय गड़बड़ियां भी मिली हैं. इससे पहले एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया था. हालांकि अब तक यूजीसी की तरफ से ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है. 

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एजेंसियों ने अब तक अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है या फिर हिरासत में लिया है, इनमें से कुछ को पूछताछ के बाद छोड़ा भी गया है. हिरासत में लिए गए डॉक्टरों में डॉ. उमर उन नबी, डॉ. शाहिद, डॉ. निसार-उल-हसन और डॉ. मुजम्मिल शामिल हैं.

मान्यता रद्द होने पर क्या होता है?

जब भी किसी यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द होती है तो सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्रों को होती है, जिन्होंने मोटी फीस देकर यहां एडमिशन लिया होता है. अल-फलाह यूनिवर्सिटी के तमाम छात्र भी अब इसी परेशानी से जूझ रहे हैं. इसे लेकर कई तरह के कदम उठाए जाते हैं. 

दूसरी यूनिवर्सिटी में शिफ्ट: जब किसी यूनिवर्सिटी के साथ ऐसा होता है तो यहां पढ़ने वाले छात्रों को दूसरी यूनिवर्सिटी में शिफ्ट किया जाता है. नियामक निकायों की तरफ से राज्य की दूसरी यूनिवर्सिटी में छात्रों को भेज दिया जाता है, ऐसे में उन्हें फिर से एडमिशन लेने या शुरुआत से पढ़ाई करने का खतरा नहीं होता है. 

परीक्षा देने का मौका: आमतौर पर जो छात्र फाइनल ईयर में होते हैं, उन्हें परीक्षा देने का मौका दिया जा सकता है. ये फैसला उस नियामक निकाय का होता है, जो यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करती है. 

डिग्री ले चुके छात्रों का क्या?

अब एक सवाल ये भी है कि जो छात्र पहले ही यूनिवर्सिटी से पास हो चुके हैं और उन्हें डिग्री मिल चुकी है, उनका क्या होता है? अगर उनके पास होने के बाद यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द हुई तो उनकी डिग्री पूरी तरह से वैध मानी जाएगी. यानी इसका इस्तेमाल वो सरकारी नौकरी या फिर हायर एजुकेशन के लिए कर सकते हैं. अगर यूनिवर्सिटी फर्जी है और उसे कभी भी यूजीसी की तरफ से मान्यता नहीं मिली तो ऐसे में यहां से ली गई डिग्री को भी फर्जी माना जाता है. 

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