संभावनाओं का साल 2026 : इन कोर्सेज को स्टूडेंट्स नहीं कर रहे पसंद, घट रही डिमांड

सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, सामान्य बीए और बीकॉम जैसे कोर्सेज भी अब उतने आकर्षक नहीं रहे. आज की 'जेनजी' पीढ़ी थ्योरी में फंसे रहने की बजाय उड़ान भरना चाहती है. बीकॉम या बीए करने के बजाय वे बीकॉम ऑनर्स, डिजिटल मार्केटिंग और फाइनेंशियल एनालिटिक्स जैसे स्पेशलाइज्ड कोर्स चुन रहे हैं. यानी अब जनरलिस्ट कम और स्पेशलिस्ट ज्यादा मांग में हैं.

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नई दिल्ली:

एक समय था जब हर कोई चाहता था कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर या इंजीनियर बनें, लेकिन नए साल 2026 में वर्षों से सुपरहिट रहे कोर्सेज की डिमांड आपको घटती हुई नजर आएगी. आज के स्टूडेंट्स भीड़ का हिस्सा बनना नहीं चाहते, वे अपनी राह खुद चुनना चाहते हैं और यही वजह है कि जो कोर्सेज कल तक सुपरहिट थे, वे आने वाले दिनों में आउट ऑफ ट्रेंड हो जाएंगे.

पहले सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को सदाबहार माना जाता था. कॉलेज की लाइब्रेरी में इनके लिए लंबी लाइनें लगती थीं. अब 2026 में इन क्षेत्रों की डिमांड धीरे-धीरे गिरती दिख रही है. कारण साफ है छात्रों का झुकाव अब कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मार्केटिंग जैसी फील्ड्स की तरफ बढ़ रहा है. पारंपरिक इंजीनियरिंग में नौकरी के मौके सीमित हैं और सैलरी ग्रोथ भी स्लो है. इसलिए युवा इसे छोड़कर नए और फ्यूचर-रेडी कोर्सेज की तरफ बढ़ रहे हैं.

सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, सामान्य बीए और बीकॉम जैसे कोर्सेज भी अब उतने आकर्षक नहीं रहे. आज की 'जेनजी' पीढ़ी थ्योरी में फंसे रहने की बजाय उड़ान भरना चाहती है. बीकॉम या बीए करने के बजाय वे बीकॉम ऑनर्स, डिजिटल मार्केटिंग और फाइनेंशियल एनालिटिक्स जैसे स्पेशलाइज्ड कोर्स चुन रहे हैं. यानी अब जनरलिस्ट कम और स्पेशलिस्ट ज्यादा मांग में हैं.

टीचर ट्रेनिंग और शिक्षा से जुड़े कोर्सेज में भी उत्साह घटा है. बीएड या अन्य शिक्षण कोर्सेज में छात्रों की रुचि घट रही है. भर्ती प्रक्रिया में देरी और निजी स्कूलों में कम सैलरी इसके बड़े कारण हैं. युवा अब टीचिंग की जगह एड-टेक, कंटेंट क्रिएशन और कॉर्पोरेट ट्रेनिंग की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और पैकेज मिलता है.

कई कोर्स डिजिटल युग और आधुनिक तकनीक के हिसाब से अपडेट नहीं हुए. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक जॉब्स पर खतरा बढ़ा रहा है. कंपनियां अब डिग्री के बजाय स्किल्स को ज्यादा महत्व दे रही हैं. युवा 9 से 5 की नौकरी से हटकर रिमोट और फ्रीलांसिंग पसंद कर रहे हैं.

2026 में यह बदलाव सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि शिक्षा जगत की बड़ी करवट है. छात्र अब वही कोर्सेज चुनेंगे जो उन्हें फ्यूचर-रेडी और जॉब-रेडी बनाएंगे. जो कोर्सेज सिर्फ किताबी ज्ञान देंगे, उनकी चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ जाएगी.

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