जब कैंसर के दौरान संजय दत्त ने हिम्मत दिखाई, खास दोस्त ने सुनाया अनसुना किस्सा

संजय दत्त की जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव रहे हैं. जब से उनका फिल्मी करियर शुरू हुआ, उसके बाद से उनकी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी कई मुश्किल दौरों से गुजरी है.

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जब कैंसर के दौरान संजय दत्त ने हिम्मत दिखाई
नई दिल्ली:

संजय दत्त की जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव रहे हैं. जब से उनका फिल्मी करियर शुरू हुआ, उसके बाद से उनकी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी कई मुश्किल दौरों से गुजरी है. 1981 में उन्होंने फिल्म रॉकी से अपना करियर शुरू किया और अब तक वह करीब 170 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं. उनकी जिंदगी में एक मोड़ ऐसा भी था जहां वह कैंसर से जूझ रहे थे, और एनडीटीवी से बात करते हुए संजय दत्त के दोस्त और निर्माता राहुल मित्रा ने उसी वक्त का एक किस्सा साझा किया, जो ये बताता है कि संजय दत्त कितने मजबूत इरादों वाले इंसान हैं. 

राहुल मित्रा ने कहा, “आज संजू का जन्मदिन है. पिछले कई सालों से हम इस दिन साथ होते थे, लेकिन इस बार वह ट्रैवल कर रहे हैं, तो मैं उनके साथ नहीं हूं. लेकिन यादें बहुत हैं… हमने दो फिल्मों में साथ काम किया. साइज ऑफ और तोरबाज. इसके अलावा कई कैंपेन भी साथ किए. सबसे यादगार कैंपेन था अरुणाचल प्रदेश के लिए, जिसमें हम करीब पचास हजार लोगों के बीच पहुंचे थे. लेकिन एक किस्सा जो हमेशा याद रहेगा, वह उस दौर का है जब संजू का कैंसर का इलाज चल रहा था.

राहुल मित्रा ने आगे कहा, “ये बात नवंबर 2021 के आसपास की है. उसी समय मैंने अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ एक कैंपेन साइन किया, जिसमें संजू फ्रंट फेस थे. हमें मेचुका जाना था जो चीन की सीमा के पास है, और वहां तक कोई डायरेक्ट फ्लाइट नहीं थी. पहले असम, फिर चॉपर से आगे का सफर बेहद ठंडा मौसम और कठिन हालात. मेरे लिए वह सफर बहुत मुश्किल था, लेकिन संजू के साथ ट्रैवल करते हुए कभी एहसास नहीं हुआ कि वह कैंसर ट्रीटमेंट से गुजर रहे हैं. जबकि तब मीडिया में तमाम रिपोर्ट्स चल रही थीं कि उन्हें स्टेज-थ्री या स्टेज-फोर कैंसर है. मैंने तब मीडिया से साफ कहा था “स्टॉप मेकिंग ऐसी अटकलें. जब जरूरत होगी, संजू और उनका परिवार खुद बताएंगे.”

राहुल मित्रा कहते हैं, “ट्रीटमेंट चल रहा था, लेकिन संजू ने कभी जाहिर नहीं होने दिया. हम वहां पहुंचे, तो सीएम और स्पीकर ने एक पार्टी रखी थी. पार्टी में जाने से पहले मैंने संजू की तरफ देखा. वह साफ तौर पर थके हुए और अनवेल लग रहे थे.लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा. बस  धीरे से बोले “पाजी…” उनकी उस एक बात से मैं सब समझ गया.मैंने तुरंत उनके डॉक्टर से फोन पर बात की, जो देश के लीडिंग कैंसर स्पेशलिस्ट्स में से एक हैं. डॉक्टर ने जरूरी सलाह दी. उस पल की टेंशन आज भी नहीं भूली जाती. सबको चिंता थी. लेकिन संजू ने सामने से ऐसा ब्रेव फेस रखा, जैसे कुछ हुआ ही नहीं.”

अपनी बात खत्म करते हुए राहुल मित्रा ने कहा, “वह पार्टी में भी शामिल हुए, अगले दिन मीडिया से भी मिले, और सभी कमिटमेंट पूरे किए. वो दो दिन जो हमने साथ बिताए, सफर किया मेरे लिए बेहद ख़ास थे. संजू मेरे लिए सिर्फ एक अभिनेता नहीं, एक बड़े भाई जैसे हैं. जितना उन्होंने सहा, जितनी मजबूती से सब झेला वैसा मैंने किसी इंसान में नहीं देखा. उनकी सहनशक्ति और साहस वाकई प्रेरणा देने वाले हैं. पता नहीं, इतनी ताकत वो लाते कहां से हैं.”

संजय दत्त के करियर का अब एक नया दौर चल रहा है, जहां वह न सिर्फ हिंदी फिल्मों के निर्देशकों के साथ काम कर रहे हैं, बल्कि दक्षिण की कई पैन इंडिया फिल्मों में कर चुके हैं और कर रहे हैं. आने वाले वक्त में उनके पास फिल्मों की भरमार है.

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