बॉलीवुड में ‘डिस्को डांसर' के नाम से मशहूर मिथुन चक्रवर्ती आज भले ही करोड़ों दिलों पर राज करते हों, लेकिन सफलता तक पहुंचने का उनका सफर बेहद कठिन रहा है. उनके बेटे मिमोह चक्रवर्ती ने हाल ही में एक इंटरव्यू में पिता के संघर्ष भरे दिनों को याद करते हुए कई ऐसे किस्से साझा किए, जिन्हें सुनकर कोई भी भावुक हो सकता है. मिमोह ने बताया कि एक समय ऐसा था जब मिथुन चक्रवर्ती के पास रहने की जगह तक नहीं थी और उन्हें रातें पार्कों में बितानी पड़ती थीं. इतना ही नहीं, पहली ही फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतने के बाद भी उनके पास खाना खाने तक के पैसे नहीं थे. मिमोह के मुताबिक, पिता के संघर्ष की कहानियां आज भी उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में हिम्मत देती हैं.
पार्कों में सोते थे मिथुन, पुलिस भगा देती थी
सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में मिमोह ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती अक्सर अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों के बारे में बातें किया करते थे. उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा था जब अभिनेता को रात में पार्कों में सोना पड़ता था. लेकिन वहां भी उन्हें चैन नहीं मिलता था, क्योंकि पुलिसकर्मी आकर उन्हें वहां से भगा देते थे. मिमोह ने बताया कि उनके पिता कहते थे कि पुलिस उन्हें उठाकर कहती थी कि यहां सोना मना है और कोई दूसरी जगह तलाश करो. इन कठिन हालात के बावजूद मिथुन ने कभी हार नहीं मानी और लगातार अपने सपनों के लिए संघर्ष करते रहे.
उन्होंने एक और दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि मिथुन फिटनेस को लेकर भी बेहद समर्पित थे. उनके पास जिम की फीस देने के पैसे नहीं थे, लेकिन फिर भी वह रोज सुबह जिम पहुंच जाते थे. उन्होंने जिम के चौकीदार से एक समझौता किया था कि वह वहां सफाई करेंगे और बदले में उन्हें वॉशरूम इस्तेमाल करने दिया जाएगा, ताकि वे तैयार होकर वर्कआउट कर सकें.
नेशनल अवॉर्ड मिला, फिर भी खाने के लिए मांगना पड़ा खाना
मिमोह ने बताया कि संघर्ष केवल शुरुआती दिनों तक सीमित नहीं था. उनकी पहली फिल्म ‘मृगया' के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतने के बाद भी आर्थिक तंगी उनका पीछा नहीं छोड़ रही थी. उन्होंने बताया कि एक बार एक पत्रकार मिथुन का इंटरव्यू लेने पहुंचा. काफी तलाश के बाद जब पत्रकार को मिथुन मिले, तो अभिनेता ने इंटरव्यू देने के लिए एक शर्त रख दी. उन्होंने कहा कि पहले उन्हें खाना खिलाया जाए क्योंकि उन्होंने काफी समय से कुछ खाया नहीं था. यह घटना उस समय की है जब वह नेशनल अवॉर्ड जीत चुके थे, लेकिन जेब में खाने के लिए भी पैसे नहीं थे.
मिमोह का कहना है कि पिता की ये कहानियां उन्हें आज भी प्रेरित करती हैं. जब भी उन्हें आलोचना, ट्रोलिंग या किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो वह मिथुन चक्रवर्ती के संघर्ष को याद करते हैं. उनके मुताबिक, जिस व्यक्ति ने इतनी कठिनाइयों का सामना करके सफलता हासिल की, उसकी कहानी हर किसी को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
बता दें, मिथुन चक्रवर्ती ने 1976 में निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म ‘मृगया' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी. इस फिल्म में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था और इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई.