मशहूर एक्टर के भाई ने लिखा हिंदी उपन्यास, दूरदर्शन पर बना 7 एपिसोड का शो, भारत-पाकिस्तान दंगे देख रहे जाएंगे शॉक्ड

हम जिस टीवी सीरीज के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वह बंटवारे के बाद सिख और हिंदू परिवारों की दुर्दशा दिखाता है. इसके अलावा कई ऐसी चीजें हाईलाइट करता है जो सोचने पर मजबूर करती हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
हिंदी उपन्यास पर बना टीवी शो जब आया टीवी पर तो पसर गया सन्नाटा
Social Media
नई दिल्ली:

हिंदी उपन्यासों पर कई फिल्में और टीवी शो बने हैं. आज भी पुरानी कहानियों और घटनाओं को उठाकर फिल्में और सीरीज बनाई जाती हैं. लेकिन हम आपको आज बताने जा रहे हैं दूरदर्शन के एक शो के बारे में जिसे विकिपीडिया पर फिल्म भी बताया जाता है. दरअसल इसकी ड्यूरेशन इतनी लंबी थी कि इसे सात एपिसोड्स में तोड़कर दिखाया गया था. इस तरह ना ये फिल्म रही ना डेली सोप इसे आप दूरदर्शन (Doordarshan) की एक मिनी टीवी सीरीज जरूर कह सकते हैं. ये ऐसी सीरीज है जो दूरदर्शन पर रात को आती थी तो घरों में सन्नाटा पसर जाता था. भारत-पाकिस्तान विभाजन, दर्दनाक चीखें, हिंदू-मुस्लिम और बंटवारे का दर्द. इसमें सब देखने को मिला. इस सीरीज का नाम है 'तमस' जो उस वक्त दूरदर्शन की हिट प्रॉपर्टी थी.

सिख और हिंदू परिवारों की दुर्दशा दिखाता है तमस

'तमस' का मतलब होता है अंधेरा. 1988 में आई इस सीरीज को गोविंद निहलानी ने लिखा और डायरेक्ट किया था. यह सीरीज भीष्म साहनी के 1974 में आए उपन्यास पर आधारित है. इस उपन्यास का नाम तमस ही है. इसके लिए उन्हें 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. सीरीज में 1947 में भारत के बंटवारे के समय दंगों से प्रभावित पाकिस्तान, बंटवारे के चलते भारत आए सिख और हिंदू परिवारों की दुर्दशा को दिखाती है. इसे सबसे पहले दूरदर्शन पर एक मिनी-सीरीज के तौर पर और बाद में चार घंटे की एक फीचर फिल्म के तौर पर दिखाया गया था. 

तीन अवॉर्ड जीती थी तमस

35वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में तमस ने तीन अवॉर्ड जीते. इनमें राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड भी शामिल था. अगस्त 2013 में इसे हिस्ट्री TV18 पर एक सीरीज के तौर पर दिखाया गया था. शो की एक्ट्रेस सुरेखा सीकरी ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का खिताब जीता और वनराज भाटिया ने बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन के लिए अवॉर्ड हासिल किया. 

तमस की कहानी

तमस की कहानी की शुरुआत 'नत्थू' नाम के एक शख्स से होती है. साजिश के तहत एक नेता नत्थू को 5 रुपये का लालच देकर सूअर मारने के लिए कहता है. नत्थू पहले तो इंकार करता है लेकिन फिर इस जाल में फंस ही जाता है और सूअर को मार देता है. उस सूअर की लाश पास ही मस्जिद की सीढ़ियों पर मिल जाती है. ये घटना पूरे शहर में दंगे भड़का देती है.

तमस की स्टार कास्ट

इस सीरीज में ओम पुरी ने नत्थू का रोल निभाया था. दीपा साही कर्मो के किरदार में नजर आईं. इनके अलावा अत्तरा बाओकर, अमरीश पुरी, एके हंगल, मनोहर सिंह, भीष्म साहनी, दीना पाठक, केके रैना, सुरेखा सीकरी, सुरेंद्र पाल, वीरेंद्र सक्सेना, पिंचू कपूर, आकाश खुराना और हरीश पटेल अहम किरदारों में नजर आए.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 47 साल पुरानी हॉरर मूवी, खौफ ऐसा मां-बाप ने बेटी को लाल जोड़ा पहनाना कर दिया था बंद, 1 करोड़ की फिल्म ने कमाए 9 करोड़

Featured Video Of The Day
भरत तिवारी मामले में महापंचायत, 'शहीद का दर्जा' और CBI जांच की उठी मांग
Topics mentioned in this article
Om Puri
Tamas
Partition 1947
Entertainment
Bollywood