हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने हैं जो समय बीतने के बाद भी लोगों की जुबान पर बने रहते हैं. उन्हीं में से एक है ‘मेरा पिया घर आया', जिसे सुनते ही आज भी लोग थिरकने लगते हैं. साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म ‘याराना' का यह गाना माधुरी दीक्षित के करियर के सबसे यादगार डांस नंबर्स में गिना जाता है. शादी, पार्टी और हर तरह के जश्न में बजने वाला यह गाना आज भी उतना ही लोकप्रिय है, जितना अपनी रिलीज के समय था. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सुपरहिट बॉलीवुड गाने की जड़ें सूफी संगीत से जुड़ी हैं और इसकी प्रेरणा पाकिस्तान के महान कव्वाल उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की मशहूर कव्वाली से ली गई थी.
नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली से प्रेरित
दरअसल, ‘मेरा पिया घर आया' मूल रूप से उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की लोकप्रिय सूफियाना कव्वाली है. इस कव्वाली में ‘पिया' शब्द का अर्थ केवल प्रेमी नहीं, बल्कि ईश्वर से आत्मा के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है. सूफी परंपरा में यह भाव आध्यात्मिक प्रेम और परमात्मा से जुड़ने की अनुभूति को दर्शाता है. नुसरत फतेह अली खान की दमदार आवाज और उनकी गायकी ने इस कव्वाली को दुनिया भर में पहचान दिलाई. 80 और 90 के दशक में यह कव्वाली सूफी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय रही और आज भी इसे क्लासिक माना जाता है.
बॉलीवुड ने इसी कव्वाली की धुन और भाव को अपनाते हुए इसे एक नए अंदाज में पेश किया. फिल्म ‘याराना' के लिए संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद ने इसे डांस नंबर का रूप दिया, जबकि गीत को फिल्मी रंग में ढालकर दर्शकों के सामने पेश किया गया. हालांकि इसका संगीत और प्रस्तुति पूरी तरह बॉलीवुड स्टाइल में थी, लेकिन इसकी मूल प्रेरणा नुसरत साहब की कव्वाली ही थी.
माधुरी दीक्षित के डांस ने बनाया यादगार
इस गाने को यादगार बनाने में सबसे बड़ा योगदान माधुरी दीक्षित के शानदार डांस का रहा. लाल रंग की आकर्षक ड्रेस, बेहतरीन एक्सप्रेशन, जबरदस्त एनर्जी और शानदार डांस मूव्स ने इस गाने को एक अलग ही पहचान दिला दी. गाना रिलीज होते ही सुपरहिट साबित हुआ और माधुरी दीक्षित की डांसिंग स्किल्स की हर तरफ तारीफ होने लगी. इसके बाद उन्हें बॉलीवुड की ‘डांसिंग क्वीन' के रूप में भी नई पहचान मिली.
करीब तीन दशक बाद भी ‘मेरा पिया घर आया' का क्रेज कम नहीं हुआ है. सोशल मीडिया पर इसकी रील्स और डांस वीडियो लगातार वायरल होते रहते हैं. नई पीढ़ी भी इस गाने पर उतनी ही दीवानगी से डांस करती है, जितनी 90 के दशक के दर्शक किया करते थे. यही वजह है कि यह गीत सिर्फ एक सुपरहिट फिल्मी गाना नहीं, बल्कि सूफी संगीत और बॉलीवुड मनोरंजन का ऐसा संगम बन गया है, जिसने पीढ़ियों तक अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी है.