काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस' को लेकर सुर्खियों में हैं. खाने की चीजों में पेस्टिसाइड्स के इस्तेमाल जैसी सेंसिटिव मुद्दे पर आ रही ये फिल्म पहले से ही चर्चा में है इस बीच एक्ट्रेस ने फिल्म के बाद अपनी पर्सनल लाइफ में आए बदलावों के बारे में बताकर सबको हैरान कर दिया है. काजल ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे को दूध देना तक बंद कर दिया है. वह बाहर से डेयरी का कोई प्रोडक्ट नहीं खरीदतीं.
काजल ने जूम के साथ एक खास बातचीत में कहा, इस फिल्म के बाद उनकी लाइफ स्टाइल पूरी तरह बदल चुकी है. यहां तक कि ग्रोसरी के सामान को लेकर भी उनकी पसंद में काफी बदलाव आए हैं. काजल ने बताया कि उन्होंने बाहर से डेरी प्रोडक्ट खरीदना बंद कर दिया है. इतना ही नहीं एक्ट्रेस ने अपने बच्चे तक को दूध देना बंद कर दिया है. इसकी जगह वह घर में दही और पनीर बनाना पसंद करती हैं. इसके अलावा पेस्टिसाइड से बचने के लिए वीकली बाजार से सब्जियां खरीदती हैं और उन्होंने क्विक ग्रोसरी डिलिवरी ऐप्स का इस्तेमाल काफी सीमित कर दिया है.
क्या है 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस'?
'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस' के टीजर में खाने में मिलावट व भारतीय खेती में केमिकल के इस्तेमाल की दशा के बीच कई डेटा पॉइंट्स बड़े अक्षरों में दिखाए गए. चेतन डीके की डायरेक्ट की गई इस फिल्म के टीजर में इन्हें "भारत की सबसे चौंकाने वाली सच्चाई" बताते हुए दावा किया गया: "हमने खाना नहीं, जहर उगाया." टीजर में कुछ टेक्स्ट भी दिखाए गए जिनमें कहा गया कि भारतीयों को "50,000 मीट्रिक टन से ज्यादा कीटनाशक खिलाए गए" जिससे "20 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए". इसमें खेती के तरीकों को "कैंसर के बढ़ते मामलों" से भी जोड़ा गया, "दूध और पोल्ट्री" की सुरक्षा पर सवाल उठाए गए और भारतीय खाने को "धीमा जहर" बताया गया.
यह भी पढ़ें: पहली फिल्म से रातोंरात बना स्टार, अब कहां 90 के दशक के ईलू ईलू बॉय विवेक मुशरान?