हिंदी सिनेमा में लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से एक अलग ही पहचान बनाई. उन्होंने संगीत जगत में एक बड़ा नाम कमाया, उनके गाए गानों ने लोगों के दिलों को छुआ. फिर वो चाहे उनका सोलो गाने हों या फिर उन्होंने किसी के साथ गाया हो. लता जी ने जिन सिंगर्स के साथ गाने गाए वो भी फेमस हो गए. आज हम बात करेंगे एक ऐसी ही सिंगर की जिन्होंने लता जी के साथ एक गाना गया और वो गाना इतना पसंद किया गया कि आज भी लोग अपनी माशूका के लिए वो गाना गुनगुनाते हैं.
कौन सा था गाना
साल 1963 में रिलीज हुई फिल्म पारसमणि ( Parasmani) का गाना हंसता हुआ नूरानी चेहरा ( Hansta hua noorani Chehra) इस गाने को लता मंगेशकर के साथ कमल बारोट ने गाया था. गाने के बोल असद भोपाली ने लिखे और इसका म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने तैयार किया था. फिल्म में ये गाना महीपाल और गीतांजति पर फिल्माया गया. इस गाने के बोल, संगीत और लता और कमल बारोट की आवाज ने इसे सदाबहार बना दिया. इस गाने पर आज भी लड़किया खूब डांस करती हैं. गाने के बोल इस प्रकार हैं-
हँसता हुआ नूरानी चेहरा
काली ज़ुल्फ़ें रंग सुनहरा
तेरी जवानी तौबा तौबा रे
दिलरुबा ओ दिलरुबा दिलरुबा ओ दिलरुबा
हँसता हुआ नूरानी चेहरा
काली ज़ुल्फ़ें रंग सुनहरा
तेरी जवानी तौबा तौबा रे
दिलरुबा ओ दिलरुबा दिलरुबा ओ दिलरुबा
कमल बारोट की बदली किस्मत
कमल बारोट ने अपने करियर में कई ऐसे गाने गाए जो लोगों ने पसंद किया जैसे सी.आई.डी 209 का 'तेरा निखरा निखरा चेहरा' और 'धड़क तो होगा दिल हुजूर' लेकिन इस गानों से उनको वो पहचान नहीं मिली. अपने सिंगिंग करियर में कमल बारोट ने कई सिंगर्स के साथ गाने गाए, लेकिन पारसमणि का गाना हंसता हुआ नूरानी चेहरा गाने के उनको एक अलग पहचान दिलाई. लता मंगेशकर के साथ कमल बारोट का ये गाना उनके करियर के बेस्ट गीतों में एक माना गया. ये गाना बिनाका गीतमाला के टॉप 10 में एंट्री के साथ एक चार्टबस्टर बन गया. इसके साथ ही उनका एक गाना और बहुत फेमस हुआ जो उन्होंने आशा भोंसले के साथ गाया वो था दादीअम्मा दादीअम्मा मान जाओ.
क्या थी फिल्म का कहानी
फिल्म की कहानी दो प्यार करने वालों महिपाल और गीतांजली की होती है. गीतांजली जो एक राजकुमारी होती है, उससे शादी करने के लिए पारस ( महिपाल) को एक शर्त पूरी करनी होती है. राजकुमारी के पिता के लिए पारसमणि ढूंढ कर लानी होती है. जिसके लिए वो कई कठिनाइयों का सामना करते हुए मणि की तलाश में निकल जाता है. इस तरह से राडजकुमारी के पिता को पारसमणि सौंपकर वो उससे शादी कर लेता है.