तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजों ने जैसे ही तस्वीर साफ की, वैसे ही एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया. विजय की पार्टी की शानदार जीत के बाद सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी तस्वीरें और किस्से तेजी से वायरल होने लगे. इन्हीं में से एक पुरानी तस्वीर ने लोगों को हैरान कर दिया है. दावा किया जा रहा है कि इस फोटो में विजय अपने ही माता-पिता की शादी में नजर आ रहे हैं, वो भी एक छोटे बच्चे के रूप में. पहली नजर में यह बात सुनकर अजीब लगती है, लेकिन इसके पीछे की कहानी और भी ज्यादा दिलचस्प है.
दरअसल, यह किस्सा विजय के पिता एसए चंद्रशेखर और उनकी पत्नी शोभा से जुड़ा है. बताया जाता है कि दोनों की शादी एक बार नहीं, बल्कि दो अलग-अलग रीति-रिवाजों से हुई थी. पहली शादी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन बाद में दोनों ने ईसाई परंपरा के अनुसार दोबारा शादी करने का फैसला लिया. इसी दूसरी शादी के दौरान विजय भी वहां मौजूद थे, जिनकी उम्र उस समय करीब 6 साल बताई जाती है.
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जब बेटे ने निभाई गवाह की भूमिका
इस कहानी में सबसे खास बात यही है कि विजय अपने माता-पिता की शादी के गवाह बने. यानी उन्होंने अपने ही माता-पिता की शादी को अपनी आंखों के सामने होते देखा. यही वजह है कि यह फोटो अब सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है. विजय के पिता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका परिवार किसी एक धर्म तक सीमित नहीं रहा. घर में अलग-अलग परंपराओं को अपनाया गया. मंदिर जाना हो या चर्च, परिवार के सभी सदस्य साथ रहते थे. यहां तक कि उन्होंने तिरुपति में मुंडन जैसे धार्मिक रिवाज भी निभाए.
पत्नी की इच्छा पर लिया बड़ा फैसला
इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प पहलू सामने आता है. बताया जाता है कि दूसरी शादी का फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि आपसी समझ से लिया गया था. उनकी पत्नी ने इच्छा जताई कि शादी ईसाई रीति-रिवाज से भी होनी चाहिए. इसके बाद दोनों ने यह कदम उठाया. अब जब यह तस्वीर सामने आई है, तो लोग इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. किसी को यह कहानी अनोखी लग रही है, तो कोई इसे परिवार की खास सोच से जोड़कर देख रहा है. कुल मिलाकर, विजय की यह पुरानी याद एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है.
राजनीतिक पारी में विजय से उम्मीदें
विजय ने अपने फिल्मी करियर में बार-बार ऐसे किरदार निभाए हैं, जो सिस्टम की कमियों और समाज की बुराइयों के खिलाफ खड़े होते हैं और आखिर में जीत हासिल करते हैं. शायद यही इमेज लोगों के मन में भी बैठ गई है और तमिलनाडु की जनता ने उसी भरोसे के साथ उन्हें मौका दिया है. अब असली परीक्षा शुरू होती है, क्योंकि पर्दे की लड़ाई और असली राजनीति में फर्क होता है. ऐसे में लोगों की यही उम्मीद रहेगी कि जिस तरह उन्होंने फिल्मों में एक हीरो की तरह बदलाव दिखाया, वैसे ही अब एक नेता के तौर पर भी सिस्टम की कमियों को दूर करें और आम आदमी की जिंदगी में सच में फर्क ला सकें.