सरोगेसी पर आधारित फिल्म 'विश्वनाथ एंड संस' नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है., यह तमिल-भाषा की रोमांटिक फैमिली ड्रामा फिल्म है, जिसे वेंकी अटुलुरी ने लिखा और डायरेक्ट किया है. सितारा एंटरटेनमेंट्स और फॉर्च्यून फोर सिनेमाज द्वारा प्रोड्यूस की गई इस फिल्म में सूर्या के साथ ममिता बैजू, राधिका सरथकुमार और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में हैं. फिल्म की कहानी एक ऐसे उद्योगपति के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपने बेटे की गंभीर बीमारी का पता चलने के बाद उसके सरोगेट मदर से संपर्क करता है. फिल्म की शूटिंग ऊटी और बेलारूस सहित कई जगहों पर हुई और जून 2026 में पूरी हुई. फिल्म का संगीत जी. वी. प्रकाश कुमार ने दिया है, सिनेमैटोग्राफी निमिश रवि ने संभाली है और एडिटिंग नवीन नूली ने की है. 'विश्वनाथ एंड संस' 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इसे समीक्षकों से सकारात्मक समीक्षाएं मिलीं. यह 2026 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तमिल फिल्म बनी.
क्या है कहानी
2024 पेरिस ओलंपिक में एक अमीर भारतीय बिजनेस मैन और राइफल शूटर संजय विश्वनाथ को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है, जब फ़ाइनल से कुछ मिनट पहले नस्लभेदी लोगों की भीड़ जानबूझकर उनकी बंदूक खराब कर देती है. दो घंटे तक कोई नया हथियार न मिल पाने के कारण, वह अपने पिता विजय से मिली एक खूबी का इस्तेमाल करते हुए खुद ही खराब बंदूक को ठीक करते हैं और प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं, और अंततः स्वर्ण पदक जीतते हैं. भारत लौटने पर, संजय की मां निर्मला देवी उनका गर्मजोशी से स्वागत करती हैं, लेकिन उनके लंबे समय से शादी न करने पर चिंता भी जताती हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि विश्वनाथ परिवार का वंश उनके साथ ही खत्म हो जाएगी. सैन फ्रांसिस्को के कई दौरों के बाद संजय सबको हैरान करते हुए एक नवजात बच्चे के साथ लौटते हैं, जो वह सरोगेसी के जरिए करते हैं. इस फैसले से निर्मला निराश होती हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि उनके पोते-पोतियां शादी के जरिए होंगे.
संजय बच्चे का नाम अभय रखता है. शुरू में विरोध के बावजूद निर्मला को अपने पोते से लगाव हो जाता है. हालांकि, अभय को एक जानलेवा बीमारी का पता चलता है जिसके लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है. चूंकि संजय का बोन मैरो मैच नहीं करता, इसलिए उसे सरोगेट मां से संपर्क करना पड़ता है. वे सैन फ्रांसिस्को जाते हैं और पता चलता है कि मां मधनकामेश्वरी ज्योतिलिंगम उर्फ मैडी जे है, जो एक बेफिक्र अनाथ और मेडिकल स्टूडेंट है. उसकी कम उम्र देखकर हैरान संजय उस डॉक्टर से बात करता है जिसने सरोगेसी करवाई थी. लेकिन उसे पता चलता है कि 20-25 साल की उम्र की महिलाओं को ऐसे कामों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. मैडी पैसों के लिए बोन मैरो देने के लिए तैयार हो जाती है. इससे उसे मेडिकल स्कूल की फीस चुकाने में मदद की उम्मीद है. भारत आने पर निर्मला को मैडी का बेफिक्र रवैया पसंद नहीं आता, लेकिन धीरे-धीरे उसे मैडी की बैकग्राउंड के बारे में पता चलता है. उसके माता-पिता की कार दुर्घटना में मौत हो गई थी, जिससे उनके बीच एक रिश्ता बन जाता है.
क्या सरोगेट मदर को अपनाएगा संजय
बाद में मैडी संजय के दरियादिली के बारे में पता चलता है. मैडी उसे प्यार करने लगती है. हालांकि उसके शादी के प्रस्ताव को संजय ठुकरा देता है और उसके इलाज का खर्च उठाने के बाद उसे एयरपोर्ट पर छोड़ देता है. हालांकि मैडी वापस आ जाती है कोर्ट चली जाती है. जहां संजय को अपनी पेरेंटिंग क्षमता साबित करनी पड़ती है. जब वे मिलकर बच्चे की परवरिश करते हैं, तो मैडी परिवार को प्राथमिकता देने के लिए अपनी मेडिकल की पढ़ाई रोकने का फैसला करती है, जिससे निर्मला खुश होती है, क्योंकि उसे उन्हें एक कपल के रूप में देखना अच्छा लगता है. मैडी संजय से पूछती है कि क्या संजय उसे उम्र का अंतर नहीं होता तो अपना लेता. संजय मैडी को उसकी मेडिकल डिग्री पूरी करने के लिए जबरन भेज देता है. मैडी गुस्से में आकर संजय का कॉन्टैक्ट नंबर डिलीट कर देती है, लेकिन वह एक कार्ड भेजकर उससे संपर्क करता है. छह साल बीत जाते हैं, इस दौरान मैडी मेडिसिन में अपनी MD पूरी करती है और अपने बेटे अभय के साथ करीबी रिश्ता बनाए रखती है. संजय का कजिन मैडी और अभय की नियमित मुलाकातें कराता है. ग्रेजुएशन के बाद, मैडी फिर से संजय के संपर्क में आती है. वह सैन फ्रांसिस्को में उससे मिलने आता है और उसे उस अस्पताल में नौकरी की पेशकश करता है जिसे वह अपनी मां की याद में खोलने वाला है. वे साथ में खुशनुमा पल बिताते हैं. जब मैडी फिर से उनसे उम्र के अंतर के बारे में पूछती है, तो संजय मुस्कुराता है और उसे कोई साफ जवाब नहीं देता.
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