दूरदर्शन के दौर में राष्ट्रीय एकता को लेकर एक गाना आया था. जो रोज टीवी पर बजता था और विविधता मे एकता का संदेश देता था. इसमें दिग्गज सिंगर, एक्टर और खिलाड़ी नजर आए. ये गाना आज 38 साल बाद भी जहन में कौंधता है और पुरानों यादों को ताजा कर जाता है. लेकिन आप जानते हैं कि जिस राग पर ये गाना आधारित है, उसी राग पर आधारित एक गाना इस गाने के 36 साल बाद आया और छा गया. बेशक राष्ट्रीय एकता का ये गीत दूरदर्शन पर चलता था, लेकिन नए दौर के तमन्ना भाटिया के इस गानो ने यूट्यूब से लेकर सोशल मीडिया तक पर धूम मचा दी.
प्रसिद्ध गायिका प्रियानी वाणी पंडित द्वारा शुरू की गई एक लोकप्रिय संगीत और लाइव कॉन्सर्ट सीरीज रागगीत उन पॉपुलर क्लासिक गाने को पेश करने के साथ-साथ दर्शकों को उनके पीछे के राग के बारे में बताती है. साथ ही पर्दे के पीछे की कहानियां भी फैंस के साथ शेयर करती हैं जो आम भारतीय क्लासिकल म्यूजिक में गहरी दिलचस्पी रखने वाले लोगों को पसंद आ रही हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं ये गाने और किस राग पर हैं आधारित.
38 साल पुराना मिले सुर मेरा तुम्हारा
भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा' राग भैरवी पर आधारित है. 15 अगस्त 1988 को स्वतंत्रता दिवस पर दूरदर्शन पर पहली बार प्रसारित हुआ. इस गाने को पंडित भीमसेन जोशी ने कम्पोज किया था, लुई बैंक्स ने म्यूजिक अरेंज किया था जबकि इसके बोल पीयूष पांडे ने लिखे थे. इसका निर्देशन कैलाश सुरेंद्रनाथ ने किया था. लगभग 14 भाषाओं में गाया गया यह गीत विविधता में एकता का संदेश देता है. मुख्य गायकों में पंडित भीमसेन जोशी, एम. बालामुरलीकृष्ण, लता मंगेशकर और कविता कृष्णमूर्ति शामिल थे. वीडियो में अमिताभ बच्चन, कमल हासन, मिथुन चक्रवर्ती, हेमा मालिनी, शर्मिला टैगोर, वहीदा रहमान और शबाना आजमी जैसे कलाकारों के साथ खिलाड़ी और कलाकार दिखे.
36 साल बाद तमन्ना भाटिया ने मचाई धूम
अब 2024 में आई सुपरहिट हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'स्त्री 2' हिट हुई और इसका गाना 'आज की रात' फैंस को काफी पसंद आया. गाने को मधुबंती बागची और दिव्या कुमार ने आवाज दी. इस पर तमन्ना भाटिया ने डांस किया, उनके शानदार डांस को दर्शकों को काफी पसंद आए. लेकिन आप जानते हैं कि ये गाना भी राग भैरवी पर आधारित था.
जानते हैं क्या होता है राग भैरवी?
बनारस घराने के संगीतकार विवेक वर्मा ने NDTV से बात की और उन्होंने राग भैरवी के बारे में बताया, 'राग भैरवी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के सबसे मशहूर और मधुर रागों में से एक है. इसे आमतौर पर सुबह के समय गाया या बजाया जाता है. भैरवी का संबंध भैरवी ठाट से है. इसमें कोमल रे, ग, ध और नि का इस्तेमाल होता है, जबकि सा, म और प शुद्ध स्वर होते हैं. इन स्वरों की वजह से इस राग में मिठास और गहराई महसूस होती है. भैरवी को अक्सर लोग दुख या उदासी से जोड़ते हैं, लेकिन यह सिर्फ उदासी का राग नहीं है. इसमें भक्ति, प्रेम, विरह, शांति और समर्पण जैसे कई भावों को खूबसूरती से व्यक्त किया जा सकता है. यही वजह है कि भैरवी सुनने वाले के मन को आसानी से छू लेती है. ठुमरी, दादरा, भजन और अर्ध-शास्त्रीय संगीत में भी भैरवी का खूब इस्तेमाल होता है.'
राग भैरवी पर आधारित गाने
राग भैरवी का हिंदी फिल्मों के गानों मे भी खूब इस्तेमाल हुआ है. के.एल. सहगल का ‘बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए' (स्ट्रीट सिंगर, 1938) और ‘जब दिल ही टूट गया' (शाहजहां) इसकी शुरुआती धमक है. मुकेश का 'आवारा हूं' (आवारा, 1951), मन्ना डे का 'लागा चुनरी में दाग' (दिल ही तो है), मोहम्मद रफी का ‘नाचे मन मोरा मगन' (मेरी सूरत तेरी आँखें), किशोर कुमार का 'हमें तुमसे प्यार कितना' (कुदरत) और लता मंगेशकर का 'भोर भये पनघट पे' (सत्यम शिवम सुंदरम्) इस राग के उदाहरण है. वहीं 'पठान' (2023) का 'बेशर्म रंग' भी राग भैरवी पर आधारित है.