आपको 'कुछ कुछ होता है' की छोटी अंजलि याद है? फिल्म में शाहरुख खान की बेटी अंजली यानी सना सईद ने हाल ही में अपनी सेहत से जुड़ी समस्याओं के बारे में बात की है. एक्ट्रेस ने बताया कि कैसे वह सालों तक चुपचाप बुलिमिया से लड़ती रहीं. उन्होंने माना कि वह शर्मिंदगी के साथ जी रही थीं, उन्हें लगता था कि वह बिल्कुल अकेली हैं, और उन्हें यह भी एहसास नहीं था कि उन्हें ईटिंग डिसऑर्डर है. सना कहती हैं कि पतले होने का समाज का जुनून और लुक्स पर लगातार किए जाने वाले कमेंट्स ने खाने और अपने शरीर के साथ उनके रिश्ते को बहुत मुश्किल बना दिया था.
बुलिमिया से अपनी लड़ाई पर सना सईद
हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए सना सईद ने कहा, "मैं 2016 में एक्टिंग और फिल्ममेकिंग की पढ़ाई करने के लिए लॉस एंजिल्स आई थी. जब मैं घर लौटी तो मुझे पता था कि मुझे वापस जाना है. मुझे वहां से बुलावा आ रहा था. मैंने अपनी पूरी जिंदगी भारत में बिताई थी और मुझे लगता है कि मेरी आत्मा एक नया एडवेंचर चाहती थी. दोस्तों और परिवार को छोड़ना मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल था. मुझे पता था कि इस कदम का मेरे काम पर असर पड़ेगा और मैंने पहले ही इसे स्वीकार कर लिया था. ऐसी जगह नई शुरुआत करना जहां कोई आपकी हिस्ट्री नहीं जानता, आपको विनम्र बनाता है. इसने मुझे यह तय करने की जगह भी दी कि मैं असल में क्या बनना चाहती हूं."
एक्ट्रेस ने आगे कहा, "जब मैंने वहां जाने का फैसला किया, तब तक मेरे पति पहले से ही वहां रह रहे थे. हमारी प्रोडक्शन कंपनी, 'बियॉन्ड मैजिक स्टूडियोज', नई है और हमने इसे मिलकर बनाया है. हम दोनों का मानना है कि जो आप चाहते हैं उसे पाना और रिस्क लेना ही जीने का एकमात्र तरीका है. मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त से शादी की है और अब मुझे उसके साथ उसी चीज पर काम करने का मौका मिल रहा है जिसे मैं पूरी जिंदगी पसंद करती रही हूं. चीजें सच में अपने आप ठीक हो जाती हैं."
सना ने आगे कहा, "मुझे यह एक बुरी आदत लग रही थी जो मुझमें आ गई थी. मुझे अकेले ही इसका समाधान खोजना था. मुझे इसे लेकर बहुत शर्म आती थी, क्योंकि मुझे लगता था कि सिर्फ मैं ही इससे जूझ रही हूं. छह साल तक मुझे समझ नहीं आया कि मैं किस चीज से गुजर रही हूं. मैं ठीक होने और खाने-पीने का हेल्दी तरीका खोजने के लिए बेताब थी और आखिरकार मुझे रिकवरी पर एक किताब मिली जिसने मुझे उस समस्या के बारे में बताया जिससे मैं असल में जूझ रही थी. तभी से असली ठीक होने की प्रक्रिया शुरू हुई और पूरी तरह ठीक होने में चार साल लग गए."
सना ने कहा, उन्हें अपनी समस्या के बारे में पता होता तो वह बुलिमिया से जल्दी ठीक हो सकती थीं. अब जब मैं ठीक हो गई हूं. सना ने आगे कहा, "मुझे याद है कि कॉलेज के दिनों में मेरे आस-पास के सभी दोस्त डाइटिंग करते थे, वजन कम करने की कोशिश करते थे और अपने बदलते शरीर के बारे में बातें करते थे. वह 'साइज जीरो' का दौर था जब दुबला-पतला होना फैशन था, जब गूगल पर दस तरह की डाइट मौजूद थीं और मेरे जानने वाले सभी लोग ट्रेडमिल पर दौड़ रहे थे. एक युवा महिला के तौर पर अपने बदलते शरीर के प्रति जागरूक होना पूरी तरह से स्वाभाविक है, लेकिन सेहत, पोषण और लंबे समय के लिए मजबूती देने वाली बातें मेरे आस-पास कभी चर्चा का विषय नहीं रहीं. सिर्फ वजन कम करने की तारीफ होती थी और किसी चीज की नहीं—न तो इस बात की कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं, और न ही इस बात की कि किसी खास तरह का दिखने के लिए आप पूरे दिन भूखे रहे हैं. मुझे लगता है कि यह इंडस्ट्री बस उस चीज को और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाती है जो हममें से बहुत से लोगों के मन में पहले से ही होती है.
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सना सईद कौन हैं?
सना सईद को आज भी 'कुछ कुछ होता है' (1998) की छोटी अंजलि और बाद में 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' (2012) के लिए याद किया जाता है. उन्होंने 'हर दिल जो प्यार करेगा' (2000) और 'बादल' (2000) जैसी फिल्में भी की हैं. सना 'बाबुल का आंगन छूटे ना' (2008) और 'लो हो गई पूजा इस घर की' (2008) जैसे टीवी शो में भी नजर आईं. सना सईद ने 'झलक दिखला जा 6' (2013), 'नच बलिए 7' (2015) और 'फ़ियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 7' (2016) जैसे रियलिटी शो में हिस्सा लिया. 2021 में, उन्होंने मुंबई छोड़कर हमेशा के लिए लॉस एंजिल्स बसने का फैसला किया. अब, वह अमेरिका में अपने पति साबा वैगनर के साथ अपनी प्रोडक्शन कंपनी चलाती हैं.
बुलिमिया क्या है?
बुलिमिया का मन और शरीर दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है. इसके कुछ आम लक्षणों में शामिल हैं, बहुत ज्यादा खाना और फिर उसे शरीर से बाहर निकालना (पर्जिंग), खाने के तुरंत बाद बाथरूम भागना, वजन या शरीर की बनावट को लेकर बहुत ज्यादा सोचना, खाना छोड़ना या ज्यादा खाने की भरपाई के लिए बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करना, गालों का सूजना, बार-बार उल्टी करने से दांतों का खराब होना, डिहाइड्रेशन, लगातार थकान और इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन. अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह ईटिंग डिसऑर्डर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, जिसमें दिल, किडनी और पाचन तंत्र से जुड़ी जटिलताएं शामिल हैं.