संजय दत्त की पहली वाइफ का ब्रेन ट्यूमर से हुआ था निधन, बेटी त्रिशला 8 साल की उम्र में पड़ीं अकेली, बोलीं- कोई नहीं था बात करने वाला

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त ने हाल ही में अपनी जिंदगी को लेकर ऐसा खुलासा किया, जिसने लोगों को हैरान कर दिया. उन्होंने बताया कि ग्लैमर के पीछे छिपी उनकी असली जिंदगी उतनी आसान नहीं थी, जितनी लोग समझते थे.

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मां को खोने से टूट गई थीं संजय दत्त की बेटी त्रिशाला

स्टार किड्स की जिंदगी को लोग अक्सर किसी फिल्मी सपने की तरह देखते हैं. बड़ा नाम, लग्जरी लाइफ और हर तरफ लाइमलाइट. लेकिन कई बार कैमरों के पीछे ऐसी सच्चाई छिपी होती है, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं पाता. संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त ने हाल ही में अपनी जिंदगी का ऐसा दर्द साझा किया, जिसने लोगों को भावुक कर दिया. उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब वो खुद को पूरी तरह अकेला महसूस करती थीं. बाहर से सबकुछ ठीक दिखता था, लेकिन अंदर ही अंदर वो कई मुश्किलों से लड़ रही थीं. आज न्यूयॉर्क में एक लाइसेंस्ड मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट (LMFT) और साइकोथेरेपिस्ट बन चुकीं त्रिशाला ने अब इन दर्दनाक अनुभवों पर खुलकर बात की है.

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8 साल की उम्र में बदल गई पूरी जिंदगी

एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान त्रिशाला ने बताया कि उनकी मां ऋचा शर्मा का निधन ब्रेन ट्यूमर की वजह से हुआ था. उस वक्त वो सिर्फ 8 साल की थीं. इतनी छोटी उम्र में मां को खोना उनके लिए सबसे बड़ा झटका था. उन्होंने बताया कि उस दौर में संजय दत्त फिल्मों की शूटिंग और परिवार के बीच लगातार बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहे थे. भारत और अमेरिका के बीच उनका लगातार आना-जाना लगा रहता था.

अकेलापन बना सबसे बड़ा दुश्मन

त्रिशाला ने कहा कि मां के जाने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी. वो अंदर से टूट चुकी थीं और इसी दर्द का असर उनके खानपान पर भी पड़ा. धीरे-धीरे उनका वजन बढ़ने लगा. स्कूल के दिनों में उन्हें एंग्जायटी और बॉडी इमेज जैसी परेशानियों से जूझना पड़ा.

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'तुम संजय दत्त की बेटी जैसी नहीं दिखती'

त्रिशाला ने बेहद भावुक होकर बताया कि स्कूल में कई लोग उनके लुक्स का मजाक उड़ाते थे. बढ़े वजन की वजह से उन्हें ताने सुनने पड़ते थे. लोग कहते थे कि वो 'संजय दत्त की बेटी जैसी नहीं दिखतीं.' उन्होंने कहा कि लोग हमेशा यही समझते रहे कि स्टार किड होने की वजह से उनकी जिंदगी आसान होगी, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग थी.

दर्द से निकली नई पहचान

त्रिशाला की परवरिश अमेरिका में उनके नाना-नानी ने की. जिंदगी के कठिन अनुभवों ने ही उन्हें मजबूत बनाया. आज वो एक लाइसेंस्ड मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट हैं और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों को जागरूक कर रही हैं. वो चाहती हैं कि लोग अपनी परेशानियों को छिपाने के बजाय खुलकर बात करें.

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