80s में परिवार के रिश्तों पर कई फिल्में बनीं, जिसमें भाई बहन के प्यार से लेकर माता-पिता के सम्मान को दिखाया जाता था. इन्हीं में से एक 1985 में आई फिल्म थी, जिसमें तनुजा, सचिन पिलगांवकर, शोमा आनंद और किरण जैसे एक्टर्स नजर आए. फिल्म की कहानी एक संयुक्त यानी ज्वॉइंट फैमिली की है, जिसमें एक बड़ा भाई और भाभी अपने छोटे भाई-बहन की पढ़ाई से लेकर शादी का खर्च उठाते हैं. लेकिन जेठानी से जलन के कारण वह परिवार को तोड़ने की कोशिश करती है. हालांकि इस पारिवारिक कहानी में सात फेरों के सात वचनों को भी बताया जाता है.
80s के परिवार की कहानी
1985 में रिलीज हुई हिंदी फैमिली ड्रामा फिल्म घर द्वार को कलपतरू ने डायरेक्ट किया था. फिल्म की कहानी धनराज (श्रीराम लागू) की है, जो अपने दो छोटे भाइयों चंदर (राज किरण) और केतन (सचिन), बहन आशा और पत्नी सावित्री (तनुजा) के साथ ज्वॉइंट फैमिली में रहता है. वह अपने दोनों भाईयों को अच्छी शिक्षा देने के लिए दिन-रात मेहनत करता है. लेकिन पैसों की कमी के कारण वह केवल एक भाई चंदर को आगे पढ़ाता है क्योंकि केतन बीमारी का बहाना बनाकर अपना भविष्य त्याग देता है. वहीं चंदर इंजीनियर बन जाता है और अमीर परिवार की लड़की चंदा (शोमा आनंद) से शादी करता है. लेकिन चंदा को जेठानी सावित्री से जलन और ससुराल का सादा जीवन पसंद नहीं आता और परिवार को तोड़ने का प्लान बनाती है.