रिखी राम परिवार के सितारिस्ट और म्यूजिक प्रोड्यूसर ऋषभ रिखीराम शर्मा का म्यूजिक लवर्स के बीच एक अलग फैन बेस है. व्हाइट हाउस में सोलो परफॉर्म करने वाले पहले सितारिस्ट से लेकर इमोशनल वेल-बीइंग के लिए म्यूजिक को एक थेराप्यूटिक टूल के तौर पर सपोर्ट करने तक व कल्चरल रूप से रिच क्लासिकल ट्रेडिशन को आगे बढ़ाते हैं. उन्होंने अक्सर खुद को पंडित रविशंकर का आखिरी और सबसे कम उम्र का शिष्य कहा. हालांकि इस दावे का हाल ही में लेजेंडरी म्यूजिशियन की बेटी अनुष्का शंकर ने खारिज किया है.
ऋषभ रिखीराम शर्मा इंटरव्यूज में अक्सर बताया कि कैसे पंडित रविशंकर के साथ बातचीत ने उनके म्यूजिकल सफर में एक टर्निंग पॉइंट साबित किया. हालांकि उनके इस दावे को खारिज करते हुए अनुष्का शंकर ने बताया कि वह कभी भी फॉर्मली उनके पिता के शिष्य नहीं थे. अनुष्का ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को बताया, “ऋषभ सच में टैलेंटेड हैं और वह साफ तौर पर लोगों से बहुत शानदार तरीके से बात कर रहे हैं. मुझे लगता है कि उनके गुरु होने को लेकर कुछ गलतफहमी है.” हालांकि अनुष्का ने ऋषभ के टैलेंट की तारीफ की, लेकिन उन्होंने साफ किया, “उसने मेरे बहुत करीबी, मेरे पिता के सीनियर शिष्यों में से एक परिमल सदाफल से बहुत कुछ सीखा. उसने मेरे पिता के साथ भी कुछ क्लासेज लीं.
“हम उसे बचपन से जानते थे क्योंकि वह हमारे इंस्ट्रूमेंट बनाने वाले संजय रिकिराम शर्मा का बेटा था. तो किसी तरह यह बात, उसके मेरे पिता के आखिरी शिष्य या सबसे छोटे शिष्य होने की कहानी बन गई, जो सच नहीं है. लेकिन वह सुपर टैलेंटेड है और उस कहानी के साथ या उसके बिना भी, वह सारी सफलता का हकदार है.”
जब ऋषभ रिखीराम शर्मा ने खुद को पंडित रविशंकर का आखिरी शिष्य कहा था
अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर अपलोड किए गए एक वीडियो में ऋषभ रिखीराम शर्मा को सितार बजाते हुए देखा जा सकता है. हालांकि धुनें जादुई हैं, लेकिन उनके कैप्शन ने तुरंत कई लोगों का ध्यान खींचा. साइड नोट में लिखा था, “24 साल के सितार प्लेयर ऋषभ रिखीराम शर्मा स्वर्गीय सितार वादक पंडित रविशंकर के आखिरी शिष्य हैं.”
ऋषभ रिखीराम शर्मा ने रविशंकर के परिवार के बारे में बात की थी
एक बातचीत में ऋषभ ने पंडित रविशंकर के साथ अपने गहरे कनेक्शन के बारे में बताया था. महान म्यूजिशियन को अपना गुरु बताते हुए उन्होंने बानी आनंद को बताया कि रविशंकर ने एक बार उनके पिता, संजय रिखीराम को फोन किया था और उनसे ऋषभ को उनके पास लाने के लिए कहा था. उन्होंने बताया, “एक बार जब हम वहां पहुंचे, तो गुरुजी ने कहा, ‘ठीक है, अपना सितार निकालो और मेरे लिए थोड़ा बजाओ.' मैंने बजाया और फिर उन्होंने अपना गिटार उठाया और वही कंपोजिशन बजाया.”
अपनी जिंदगी के टर्निंग पॉइंट के बारे में बात करते हुए ऋषभ ने बताया, “उसके बाद वह मेरे माता-पिता की तरफ मुड़े और कहा, ‘अगर आपकी इजाजत हो तो आपके बच्चे में बहुत टैलेंट है, मैं उसका गुरु बनकर उसे सिखाना चाहूंगा.' और मैंने देखा कि मेरे माता-पिता का मुंह खुला का खुला रह गया क्योंकि भगवान खुद नीचे आए थे और कहा था, ‘क्या मैं आपके बच्चे को सिखा सकता हूं?' इसलिए मेरे पापा में उनसे पूछने की हिम्मत नहीं हुई. उनका मेरा गुरु बनने का ऑफर देना कमाल का था.”
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