19वीं सदी की असल घटना को पर्दे पर ला रही राणाबाली, डायरेक्टर ने बताया क्यों है खास

राहुल सांकृत्यायन के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को माइथ्री मूवी मेकर्स के वाई. रविशंकर और नवीन यरनेनी ने टी-सीरीज के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है. राणाबाली में रश्मिका मंदाना फीमेल लीड के तौर पर नजर आएंगी.

विज्ञापन
Read Time: 6 mins
राणाबाली में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना लीड रोल में हैं
Social Media
नई दिल्ली:

'राणाबाली' साल की मचअवेटेड फिल्मों में से एक है. इसमें मशहूर जोड़ी विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना एक बार फिर साथ आ रहे हैं. माइथ्री मूवी मेकर्स के बैनर तले बनी और राहुल सांकृत्यायन के डायरेक्शन में बन रही इस फिल्म ने दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है. एक हिस्टॉरिकल ड्रामा के तौर पर पेश की गई यह फिल्म भारत के अतीत की उन सच्ची घटनाओं को गहराई और बड़े स्केल के साथ बड़े पर्दे पर लाने का लक्ष्य रखती है, जिनके बारे में लोग कम जानते हैं.

बढ़ते उत्साह के बीच, डायरेक्टर राहुल सांकृत्यायन ने फिल्म के सफर के बारे में बात की और इसकी मेकिंग व कहानी के पीछे की प्रेरणा के बारे में बताया. उन्होंने खुलासा किया कि राणाबाली की जड़ें पूरी तरह से वास्तविक घटनाओं से जुड़ी हैं और इसके लिए काफी रिसर्च की जरूरत पड़ी. डायरेक्टर राहुल सांकृत्यायन ने बताया कि उन्होंने रिसर्च के लिए इतिहासकारों, कवियों से बात की और पुराने रिकॉर्ड्स खंगाले. उन्होंने कहा, "इतिहास कई रूपों में मौजूद है - सिर्फ किताबों में ही नहीं, बल्कि उन कहानियों में भी जो गांवों और रीति-रिवाजों के जरिए हम तक पहुंची हैं."

उन्होंने आगे कहा, "मद्रास प्रेसीडेंसी - जिसमें आज का चेन्नई, तेलुगु क्षेत्र और बेंगलुरु शामिल हैं - के पास संघर्ष और जुझारूपन की अपनी अनकही कहानियां हैं. हम शायद ही कभी मुख्यधारा की कहानियों में इन्हें सुनते हैं." उन्होंने साझा किया कि फिल्म के कुछ सबसे दमदार पल उन्हें भूले-बिसरे गांवों और छिपे हुए अभिलेखागारों (archives) से मिले हैं. ऐसा ही एक किस्सा उनके पिता के गांव की यात्रा का था, जहां उन्होंने एक लंबे समय से भूले हुए रीति-रिवाज को फिर से जीवित होते देखा और इसी अनुभव ने फिल्म के क्लाइमेक्स को प्रेरित किया.

राहुल सांकृत्यायन ने राणाबाली के पीछे की प्रेरणा के बारे में खुलकर बात की और खुलासा किया कि यह फिल्म 19वीं सदी के रायलसीमा की वास्तविक घटनाओं पर गहराई से आधारित है. उन्होंने बताया कि ये असल कहानियां ही उनकी इस आने वाली पैन-इंडिया पीरियड ड्रामा की नींव हैं, जिसमें विजय देवरकोंडा, रश्मिका मंदाना और अर्नोल्ड वोस्लू लीड रोल में हैं. 19वीं सदी के दक्षिण भारत पर आधारित यह फिल्म प्रतिरोध, परंपरा और औपनिवेशिक काल (colonial era) की चुनौतियों के बीच जी रहे लोगों के व्यक्तिगत संघर्षों को दिखाने के लिए सच्ची घटनाओं का सहारा लेती है, खासकर रायलसीमा क्षेत्र में.

उन्होंने यह भी बताया कि आज के दर्शक इतिहास की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि यह बीते हुए कल की सच्ची घटनाओं और अनकही कहानियों के प्रति उनमें उत्सुकता जगाता है. इसी वजह से ऐसी कहानियां अब और भी ज्यादा दिलचस्प और जरूरी हो गई हैं.

Advertisement

उन्होंने शेयर किया, "सालों तक हम वही पुराने विषयों जैसे लव स्टोरी और फैमिली ड्रामा को ही दोहराते रहे. लेकिन आज दर्शकों की पसंद बदल रही है और वे कुछ और भी देखना चाहते हैं. लोग अब भव्य नजारों, बड़े लेवल की काल्पनिक महागाथाओं और इतिहास व पौराणिक कथाओं से जुड़ी 'लार्जर-देन-लाइफ' कहानियों की तरफ खिंचे चले आ रहे हैं. यह सीधा-सा मामला है कि जैसी डिमांड है वैसी सप्लाई दी जा रही है. एक देश के तौर पर हम अपने अतीत को फिर से खोज रहे हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि असल में क्या हुआ था. दूसरों से खुद को कम समझने और हर चीज के लिए पश्चिम (वेस्ट) की तरफ देखने की वो पुरानी आदत अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है."

राहुल सांकृत्यायन ने विजय देवरकोंडा के किरदार के बारे में भी बात की और बताया कि वह फिल्म में एक निडर विद्रोही के रूप में नजर आएंगे, जिसके व्यक्तित्व में एक स्वाभाविक दबदबा और अधिकार है. राहुल ने समझाया कि इतिहास को पर्दे पर फिर से उतारने के लिए कलाकारों को पूरी तरह से एक अलग दुनिया में ढलना पड़ता है. उन्हें न केवल किरदार के हाव-भाव अपनाने पड़ते हैं, बल्कि उस दौर की मानसिकता, भावनाओं और सच्चाइयों को भी जीना पड़ता है.

Advertisement

Photo Credit: Vijay devarkonda

राहुल ने बताया, "विजय एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं जिसके अंदर गहरा गुस्सा है, और उनका यह गुस्सा उस दौर और उस क्षेत्र की कड़वी सच्चाइयों से निकलता है, जहां जिंदा रहने के लिए अक्सर आक्रामकता जरूरी होती थी. वह एक शाही खानदान के निडर विद्रोही बने हैं, एक ऐसे मुखिया या जमींदार, जिनकी मौजूदगी ही अपना दबदबा रखती है."

इस रोल की तैयारी के लिए विजय देवरकोंडा ने पुरानी रायलसीमा बोली में महारत हासिल करने के लिए भारी एक्सेन्ट ट्रेनिंग ली. उन्होंने घुड़सवारी सीखने के लिए भी छह महीने समर्पित किए. राहुल सांकृत्यायन ने आगे बताया, "हमने खास तौर पर महाराष्ट्र से घोड़े मंगवाए और उन्हें भी उतने ही समय तक ट्रेनिंग दी," उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म में घोड़ा केवल एक प्रॉप नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण किरदार है.

यह भी पढ़ें: गंजी खोपड़ी वाले भेड़िए से 14 साल पहले पर्दे पर आया था ये क्रिएचर, पाकिस्तानी एक्टर था फिल्म का हीरो

हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड वोस्लू को कास्ट करने के अपने फैसले पर राहुल सांकृत्यायन ने साझा किया, "मेरे द्वारा लिए गए सबसे साहसी फैसलों में से एक जिस पर मुझे बहुत गर्व है, वह था अर्नोल्ड को सर थियोडोर हेक्टर (फिल्म के काल्पनिक ब्रिटिश अधिकारी) के रूप में कास्ट करना. पहली बातचीत से ही वह काफी एक्साइटेड थे. साउथ अफ्रीका से होने के नाते, जो खुद एक पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी रही है वह इतिहास के शौकीन हैं और स्क्रिप्ट की भावनाओं से गहराई से जुड़ गए. यह एक एक्शन से भरपूर रोल है और अर्नोल्ड के साथ काम करना काफी सहज रहा."

Advertisement

Photo Credit: vijay devarkonda

राहुल ने आगे बताया कि फिल्मांकन के दौरान, वोस्लू ने ब्रिटिश अधिकारी के लहजे (accent) को सही से पकड़ने के लिए भाषाई ट्रेनिंग भी ली. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें कास्ट करने से फिल्म के औपनिवेशिक बैकड्रॉप में एक अनोखा और दमदार पहलू जुड़ गया है.

यह भी पढ़ें: समय रैना को मुकेश खन्ना का करारा जवाब, बोले- कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी रहती है

राहुल सांकृत्यायन के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को माइथ्री मूवी मेकर्स के वाई. रविशंकर और नवीन यरनेनी ने टी-सीरीज के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है. राणाबाली में रश्मिका मंदाना फीमेल लीड के तौर पर नजर आएंगी, जो विजय देवरकोंडा के साथ उनकी वापसी को और भी दिलचस्प बनाती है. फिल्म में एक मजबूत स्टार कास्ट है, जिसमें इंटरनेशनल एक्टर अर्नोल्ड वोस्लू भी शामिल हैं, जो इसे ग्लोबल लेवल पर और भी खास बनाते हैं. राणाबाली 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.

Advertisement
Featured Video Of The Day
America-Iran Ceasefire BREAKING: Lebanon पर Israel के हमलों से भड़का ईरान | Strait of Hormuz