भारतीय अभिनेता परेश रावल ने अपनी बेहतरीन एक्टिंग, कॉमिक टाइमिंग और गंभीर किरदारों से करोड़ों दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि जब वह छोटे थे, तो थिएटर में बिना टिकट घुसकर नाटक देखा करते थे, लेकिन आज उनकी फिल्मों के लिए करोड़ों लोग टिकट खरीदने के लिए आगे रहते हैं और उनकी काम की सराहना करते हैं. परेश रावल का जन्म 30 मई 1955 को मुंबई में एक गुजराती परिवार में हुआ था. उनका बचपन मुंबई के पार्ले ईस्ट इलाके में बीता, जहां पास ही एक ओपन थिएटर ग्राउंड हुआ करता था. वहीं से उनके अंदर अभिनय के प्रति रुचि पैदा हुई.
बैंक ऑफ बड़ौदा में छोड़ी नौकरी
बचपन में वह पढ़ाई के साथ-साथ बेहद शरारती भी थे, लेकिन उनका सबसे बड़ा जुनून थिएटर था. बताया जाता है कि सिर्फ 9 साल की उम्र में वह बिना टिकट नाटक देखने थिएटर में घुस जाया करते थे. कई बार उन्हें पकड़कर बाहर निकाल दिया जाता था, लेकिन उनकी दीवानगी कभी कम नहीं हुई. एक बार जब वह बार-बार थिएटर में घुसने की कोशिश करते पकड़े गए तो थिएटर के लोगों ने उनके जुनून को समझा और उन्हें प्ले देखने की अनुमति दी. धीरे-धीरे उन्हें वहां छोटे-छोटे रोल भी मिलने लगे. यही उनके करियर का पहला आधार बना. शुरुआती दौर में परेश रावल ने बैंक ऑफ बड़ौदा में नौकरी शुरू की, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगता था. उन्होंने कुछ ही दिनों में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से अभिनय की दुनिया में आ गए.
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खलनायक बन की 100 से ज्यादा फिल्में
फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने 1984 में फिल्म 'होली' से की, और फिर 1985 में 'अर्जुन' जैसी कई फिल्मों में छोटे-छोटे रोल निभाए। असली पहचान उन्हें 1986 की फिल्म 'नाम' से मिली, जहां उन्होंने अपने अभिनय से लोगों का ध्यान खींचा. इसके बाद उन्होंने 80 और 90 के दशक में लगातार काम किया और लगभग 100 से ज्यादा फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाईं. 'राम लखन', 'मोहरा', 'क्रांतिवीर' और 'दामिनी' जैसी फिल्मों में उनका अभिनय काफी सराहा गया.
हेरा फेरी के बाबूराव बन बदली पहचान
परेश रावल ने विलेन के अलावा कई गंभीर और कॉमिक किरदारों को भी निभाया. साल 2000 में आई फिल्म 'हेरा फेरी' ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी. इस फिल्म में उनका किरदार 'बाबूराव गणपत आप्टे' इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी वह भारतीय कॉमेडी सिनेमा का एक यादगार चेहरा माना जाता है. इसके बाद उन्होंने 'हंगामा', 'गरम मसाला', 'भूल भुलैया', 'वेलकम', 'गोलमाल' सीरीज और 'ओह माय गॉड' जैसी फिल्मों में शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने साबित किया कि वह हर तरह के किरदार में फिट हो सकते हैं, चाहे वह कॉमेडी हो या गंभीर किरदार. उनके काम को कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. उन्हें दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, एक बार फिल्मफेयर अवॉर्ड और साल 2014 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया.
परेश राव ने मिस इंडिया से की शादी
निजी जीवन में परेश रावल ने अभिनेत्री स्वरूप संपत से शादी की, जो मिस इंडिया रह चुकी हैं. दोनों की प्रेम कहानी भी काफी दिलचस्प रही, जो कॉलेज के दिनों से शुरू होकर शादी तक पहुंची. परेश रावल ने राजनीति में भी कदम रखा और 2014 में अहमदाबाद पूर्व से सांसद बने. इसके साथ ही, वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के प्रमुख भी बनाए गए.
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