15 साल तक इस फिल्म की कमाई का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाई थी कोई फिल्म, 10 साल लगे बनने में, करोड़ों हुए खर्च

भारतीय सिनेमा की कुछ फिल्में समय के साथ और भी खास बनती जा रही हैं. ये फिल्में अपने समय में कई सीमाएं लांघकर बनाई गई थीं और आज भी भारतीय सिनेमा की क्रिएटिव थिंकिंग और मेहनत की मिसाल मानी जाती हैं.

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ये है भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म! बनने में लग गए थे 10 साल

भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जिनकी चमक समय के साथ और बढ़ती ही जा रही है. मौजूदा दौर में सिर्फ ये फिल्में ही नहीं, बल्कि इन्हें तैयार करने के पीछे की कहानियां भी लोगों को उतनी ही दिलचस्प लगती हैं. ये फिल्में अपने समय की सीमाओं को तोड़ते हुए बनी थीं और आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनी हुई हैं. चाहे भव्य सेट हों, बड़ा बजट हो या फिर शूटिंग के दौरान आई चुनौतियां, इन फिल्मों की हर कहानी अपने आप में एक इतिहास है, जो भारतीय सिनेमा की क्रिएटिव थिंकिंग और जुनून को दिखाती है. इन्हीं में से एक है डायरेक्टर के. आसिफ की ‘मुगल-ए-आजम', जिसे भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर माना जाता है. लगभग एक दशक की मेहनत, विवादों और मोटे खर्चों के बावजूद इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी.

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10 साल की मेहनत और 1.5 करोड़ का बजट

1960 में रिलीज हुई ‘मुगल-ए-आजम' को बनने में लगभग 10 साल का समय लग गया था. इस दौरान कई बार शूटिंग रोकनी भी पड़ी. रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म का बजट उस समय करीब 1.5 करोड़ रुपये था. फिल्म में उस दौर के कई बड़े सितारों ने अहम भूमिका निभाई थी. इनमें दिलीप कुमार, मधुबाला और पृथ्वीराज कपूर सहित कई शामिल थे. 

आलीशान सेट और भारी-भरकम खर्च

डायरेक्टर के.आसिफ अपनी डिटेलिंग और आलीशान सेट्स के लिए जाने जाते थे. बताया जाता है कि वे हर सीन को परफेक्शन के साथ शूट करते थे, चाहे इसके लिए कितना भी खर्चा क्यों न हो जाए. मुगल-ए-आजम के एक सीन के लिए उन्होंने असली सोने की मूर्ति की मांग की थी. वहीं, एक दूसरे सीन में मोतियों का इस्तेमाल किया गया, जिसकी कीमत उस समय करीब 1 लाख रुपये थी. इसके अलावा एक और खास सीन के लिए पूरे पूल में ‘इतर' (Perfume) भर दिया गया था. के.आसिफ का मानना था कि केवल पानी से वह सीन अपनी छाप नहीं छोड़ पाता. 

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शीश महल और टेक्निकल नजरिया 

फिल्म का मशहूर गाना “प्यार किया तो डरना क्या” उस समय बेहद एडवांस्ड माना गया था. इस दौरान ‘शीश महल' सीन को शूट करने के लिए बेल्जियन ग्लास का इस्तेमाल किया गया, जिसकी लागत लगभग 15 लाख रुपये थी. इस सीन को शूट करने में तकनीकी चुनौतियां भी आईं, जिनका डायरेक्टर और सिनेमैटोग्राफर आर.डी. माथुर ने मिलकर समाधान निकाला. 

म्यूजिक और कलाकारों की फीस

फिल्म का म्यूजिक भी बेहद खास था. महान शास्त्रीय गायक उस्ताद बड़े गुलाम अली खान को एक गाने के लिए 25,000 रुपये दिए गए थे, जो आज के समय में लगभग 24 लाख रुपये के बराबर है. वहीं लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी को उस समय 200–300 रुपये प्रति गाना मिला था.

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बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता

फिल्म का प्रीमियर भी बेहद भव्य था और इसे 150 से ज्यादा सिनेमाघरों में रिलीज किया गया. फिल्म ने लगभग 3.5 करोड़ रुपये की कमाई की. इस तरह मुगल-ए-आजम ने अपनी लागत से करीब 2.5 गुना ज्यादा कमाई कर रिकॉर्ड बनाया. यह रिकॉर्ड लगभग 15 सालों तक कायम रहा, जिसे बाद में फिल्म ‘शोले' ने तोड़ा.

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