रशीद फातिमा कैसे बनी बॉलीवुड की नरगिस ?, कभी डॉक्टर बन कर करना चाहती थीं देश सेवा, जान बचाने वाले से कर ली शादी

नरगिस का करियर चरम पर था, लेकिन 1950 के बाद कुछ फिल्में असफल रहीं. फिर 1957 में महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ आई. इस फिल्म में नरगिस ने राधा का किरदार निभाया और इतिहास रच दिया.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
रशीद फातिमा कैसे बनी बॉलीवुड की नरगिस ?
नई दिल्ली:

भारतीय सिनेमा जगत की चुलबुली, सुंदर और दमदार अभिनेत्री का जिक्र हो तो भला 'मदर इंडिया' को कैसे भूला जा सकता है. भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग में अपनी अभिनय प्रतिभा से लाखों दिल जीतने वाली अभिनेत्री के बारे में कम ही लोग जानते हैं कि नरगिस अभिनेत्री नहीं, बल्कि डॉक्टर बनना चाहती थीं. मां की जिद पर उन्हें अभिनय की दुनिया में कदम रखना पड़ा और बेमन से दिए गए स्क्रीन टेस्ट ने ही उनकी किस्मत बदल दी. नरगिस ने अभिनय के अलावा समाज सेवा में भी योगदान दिया. उन्होंने सुनील दत्त से शादी की और राजनीति में भी सक्रिय रहीं. नरगिस दत्त एक बेहतरीन अभिनेत्री होने के साथ-साथ सशक्त महिला भी थीं. डॉक्टर बनने का उनका सपना मां की जिद के आगे झुक गया, लेकिन उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में जो कमाल किया, वह आज भी याद किया जाता है. 3 मई को उनकी पुण्यतिथि है.

यह भी पढ़ें-  Jeetendra Wife Photos: जितेंद्र की पत्नी की 10 तस्वीरें, खूबसूरती में नहीं किसी हीरोइन से कम, टीवी पर चलता है इनका राज

नरगिस दत्त का असली नाम रशीद फातिमा था

नरगिस दत्त का असली नाम रशीद फातिमा था. उनका जन्म 1 जून 1929 को कोलकाता में हुआ था. उनकी मां जदनबाई उस समय की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका, नृत्यांगना, निर्देशक और अभिनेत्री थीं. जदनबाई भारतीय सिनेमा की पहली महिला संगीतकार भी थीं. वे चाहती थीं कि उनकी बेटी अभिनय की दुनिया में आए, लेकिन नरगिस का सपना कुछ और था. वे डॉक्टर बनना चाहती थीं. साल 1935 में जब नरगिस मात्र 6 वर्ष की थीं, तब जदनबाई ने उन्हें बाल कलाकार के रूप में फिल्म ‘तलाश-ए-हक' में उतार दिया. इस तरह उनके अभिनय की शुरुआत हो गई, लेकिन नरगिस का मन अभिनय में नहीं था.

महबूब खान ने दिया ब्रेक 

एक दिन जद्दनबाई ने उन्हें महबूब खान के पास स्क्रीन टेस्ट के लिए भेज दिया. नरगिस बिल्कुल बेमन से टेस्ट देने गई थीं. उनका इरादा था कि महबूब खान उन्हें रिजेक्ट कर देंगे और वे डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर सकेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. महबूब खान उनकी एक्टिंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी फिल्म ‘तकदीर' के लिए नरगिस को नायिका चुन लिया. इसके बाद साल 1945 में महबूब खान की फिल्म ‘हुमायूं' आई लेकिन असली सफलता साल 1949 में मिली. राज कपूर की फिल्म ‘बरसात' और दिलीप कुमार के साथ ‘अंदाज' ने नरगिस को स्टार बना दिया. ‘बरसात' में राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को बहुत पसंद आई.

Advertisement

यह भी पढ़ें-  'आपकी घोड़ी अच्छी, आपकी गोरी अच्छी', जब ऋषि कपूर के परदादा ने अंग्रेज अफसर को दिया था जवाब, प्रेमिका के घर तक खुदवा दी थी सुरंग

‘मदर इंडिया' से मिली पहचान 

नरगिस का करियर चरम पर था, लेकिन 1950 के बाद कुछ फिल्में असफल रहीं. फिर 1957 में महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया' आई. इस फिल्म में नरगिस ने राधा का किरदार निभाया और इतिहास रच दिया. ‘मदर इंडिया' को ऑस्कर के लिए नामांकन भी मिला. इस फिल्म ने नरगिस को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाई. राज कपूर के साथ नरगिस की जोड़ी बेहद मशहूर हुई. ‘आवारा', ‘श्री 420', ‘चोरी चोरी', ‘जागते रहो' जैसी फिल्मों में दोनों ने साथ काम किया. इन फिल्मों के गाने आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं.
 

Advertisement
Featured Video Of The Day
NDTV Yuva 2026: युवाओं के सपनों को मिला बड़ा मंच | Sanya Malhotra | Chitrangada | NDTV India