संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी की मखमली और जादुई आवाज के दीवाने आज भी हर घर में मौजूद हैं. रफी साहब जितना अपनी गायकी से प्यार करते थे, उतना ही वे अनुशासित जीवन और खुद की देखभाल के लिए भी जाने जाते थे. हाल ही में, दिग्गज संगीतकार प्यारेलाल शर्मा ने रफी साहब से जुड़ा एक ऐसा सीक्रेट रिवील किया है, जिसे सुनकर उनके करोड़ों फैंस और संगीत प्रेमी हैरान रह जाएंगे. प्यारेलाल ने टीवी रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' के सेट पर अपनी पत्नी के सुशीला के साथ शामिल हुए थे, जहां उन्होंने मोहम्मद रफी साहब की सुबह की अनोखी दिनचर्या और उनकी आवाज के पीछे छिपे एक खास राज से पर्दा उठाया है.
रफी साहब की मॉर्निंग रूटीन
शो में अपनी पत्नी सुनीला शर्मा के साथ संगीतकार ने अपनी पुरानी यादों के पिटारे से एक बेहद दिलचस्प किस्सा शेयर किया था. उन्होंने बताया कि किस तरह रफी साहब अपनी आवाज और सेहत को लेकर बेहद संजीदा थे.
सेट पर प्यारेलाल जी ने खुलासा करते हुए बताया कि रफी जी सुबह बहुत जल्दी उठ जाते थे. उठने के बाद वे बादाम और पिस्ता जैसे महंगे ड्राई फ्रूट्स को पानी में अच्छी तरह उबालते थे. इसके बाद, वह इनके उबले हुए पानी के अर्क को अपनी एक खास ड्राई फ्रूट्स वाली चाय में मिलाकर पीते थे. जो उनकी सुबह की पहली मोर्निंग एनर्जी ड्रिंक होती थी.
स्टूडियो में साथ चलती थीं 2 बड़ी केतली
प्यारेलाल जी ने रफी साहब के इस किस्से को आगे बढ़ाते हुए बताया कि रफी साहब को अपनी इस खास चाय से इतना लगाव था कि वे रिकॉर्डिंग स्टूडियो जाते समय अपने साथ इसकी 2 बड़ी केतली भरकर ले जाते थे. यह चाय न सिर्फ उनकी आवाज को सुरीला रखती थी, बल्कि उनके मूड को भी हमेशा तरोताजा रखती थी.
चाय से मान जाता था रफी साहब का गुस्सा
यही नहीं यह चाय उनके उनके गुस्से को मुसकुराहट में बदल देती है. संगीतकार ने बताया कि उस समय कि सबसे मजेदार बात यह थी कि स्टूडियो में मौजूद सभी करीबियों को रफी साहब की इस कमजोरी के बारे में अच्छे से पता था. प्यारेलाल जी ने मुस्कुराते हुए याद किया. चाय रफी जी को हमेशा खुश रखती थी। इसलिए, जब भी वे स्टूडियो में किसी बात पर हमसे या किसी और से नाराज हो जाते थे, तो हमें पता होता था कि उन्हें कैसे मनाना है.
'रफी जी, प्लीज मुझे थोड़ी चाय पिला दीजिए'
मुझे याद है जब वे मुझसे एक बार नाराज थे, तो मैंने उनसे कहा था कि रफी जी, प्लीज़ मुझे थोड़ी चाय पिला दीजिए' बस फिर क्या था वे नाराजगी को भुलाकर खुशी-खुशी अपनी टीम से कहते थे, 'सर को चाय पिलाओ', और सब ठीक हो जाता थाहै ना?.
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