9 साल तक ट्रक चलाते रहे, फिर बने बॉलीवुड के खतरनाक विलेन, 'भूकंप' ने बदल दी जिंदगी

फिल्मी दुनिया में कई कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने सामन्य परिवार से आते हुए भी मेहनत और संघर्ष के दम पर अलग पहचान बनाई. इन्हीं में एक नाम मोहन जोशी का है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
9 साल तक ट्रक चलाते रहे, फिर बने बॉलीवुड के खतरनाक विलेन
NDTV

फिल्मी दुनिया में कई कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने सामन्य परिवार से आते हुए भी मेहनत और संघर्ष के दम पर अलग पहचान बनाई. इन्हीं में एक नाम मोहन जोशी का है. पर्दे पर ज्यादातर खलनायक के किरदारों में नजर आने वाले मोहन जोशी ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई. कभी ऐसा भी दौर था जब वह अपनी ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाते थे और आर्थिक परेशानियों के चलते खुद ट्रक चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां संभालते थे. करीब नौ साल तक ट्रक चलाने के बाद उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उन्हें फिल्मों की दुनिया तक पहुंचा दिया.

मोहन जोशी का जन्म 

मोहन जोशी का जन्म 4 सितंबर 1945 को बेंगलुरु में हुआ था. उनके पिता सेना में थे, जिसके चलते परिवार बाद में पुणे आकर बस गया. मोहन जोशी की पढ़ाई-लिखाई पुणे में ही हुई. कॉलेज के दिनों में ही उनका झुकाव थिएटर की तरफ बढ़ने लगा. उन्होंने कई नाटकों में काम किया और यहीं से अभिनय की बारीकियां सीखनी शुरू की. थिएटर में काम करने के दौरान उनके अंदर अभिनय का आत्मविश्वास बढ़ा. इसके बाद उन्होंने टेलीविजन और फिल्मों की तरफ कदम बढ़ाया. वह 'वास्तव: द रियलिटी' (1999), 'मृत्युदंड' (1997) और 'गुंडा' (1998) के लिए काफी मशहूर हैं. हालांकि, अभिनय की दुनिया में आने से पहले उनकी जिंदगी बिल्कुल अलग थी.

अपनी ट्रांसपोर्ट कंपनी शुरू की

फिल्मों में आने से पहले मोहन जोशी ने अपनी ट्रांसपोर्ट कंपनी शुरू की थी. उस समय आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए कंपनी का काम संभालने के साथ वह खुद ट्रक चलाया करते थे. उन्होंने करीब नौ साल तक ट्रक चलाया. एक दिन ट्रक के साथ हुआ एक गंभीर हादसा उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव लेकर आया. इस दुर्घटना के बाद उन्होंने ट्रक चलाने का काम छोड़ दिया और अपने एक दोस्त के कहने पर मुंबई का रुख किया.

'भूकंप' से बदला करियर

मुंबई आने के बाद मोहन जोशी ने फिल्मों में काम करना शुरू किया. फिल्म 'भूकंप' ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. इसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों के ऑफर मिलने लगे. ज्यादातर फिल्मों में उन्हें खलनायक की भूमिका ही मिली. लेकिन मोहन जोशी ने इन किरदारों को कमजोरी नहीं बनने दिया. उनकी आवाज, बोलने का अंदाज और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें ऐसा विलेन बना दिया, जिसे देखकर दर्शकों को किरदार याद रह जाता था. देखते ही देखते वह फिल्म निर्माताओं की पसंद बन गए.

Advertisement

खलनायक के अलावा कॉमेडी रोल भी किए

मोहन जोशी की पहचान सिर्फ खलनायक तक सीमित नहीं रही. उन्होंने समय-समय पर कॉमेडी और चरित्र भूमिकाओं में भी अपनी अभिनय क्षमता दिखाई. 'मृत्युदंड', 'यशवंत', 'गंगाजल', 'गर्व: प्राइड एंड ऑनर' और 'देऊल बंद' जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग रंग देखने को मिले.

उन्होंने हिंदी के साथ-साथ मराठी और भोजपुरी सिनेमा में भी काम किया. अपने लंबे करियर में उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और कई भाषाओं के सिनेमा में अपनी छाप छोड़ी. मोहन जोशी की अभिनय प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली. मराठी फिल्म 'घरबाहेर' में उनके अभिनय के लिए उन्हें 47वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में विशेष उल्लेख से सम्मानित किया गया.

Advertisement


ये भी पढ़ें; एक अधूरा घर और दिमाग में आया ये गाना, 53 साल पहले कमरे में बंद हुए ऋषि और डिंपल, लता-शैलेंद्र की आवाज में बना सदाबहार क्लासिक

Featured Video Of The Day
Nepal Tragedy: नेपाल में मंडरा रहा नया खतरा! क्या महामारी से मचेगी तबाही? ग्राउंड रिपोर्ट
Topics mentioned in this article
Mohan Joshi
Mohan Joshi Birthday
Mohan Joshi Family
Mohan Joshi Movies
Mohan Joshi News