मोहम्मद रफी का नाम आते ही हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की याद ताजा हो जाती है. उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि हर उम्र की ऑडियंस उनकी दीवानी बन जाती थी. रफी साहब ने अपने करियर में हजारों यादगार गाने गाए. लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उनका एक सॉन्ग देशभर के रेडियो स्टेशनों पर लगभग हर समय सुनाई देता था. इस बात का खुलासा खुद मशहूर संगीतकार खय्याम ने अपने एक इंटरव्यू में किया था. उन्होंने बताया था कि उस गाने की पॉपुलैरिटी इतनी ज्यादा थी कि 24 घंटे कहीं न कहीं वो गाना प्ले होता रहता ही था.
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गाने ने बनाया अलग रिकॉर्ड
ये किस्सा 1950 के दशक में रिलीज हुई फिल्म 'बीवी' से जुड़ा है. इस फिल्म का डायरेक्शन किशोर शर्मा ने किया था. इसमें अल नासिर, मुमताज शांति और प्राण अहम रोल में नजर आए थे. फिल्म का संगीत खय्याम ने तैयार किया था. फिल्म का गीत 'अकेले में वो घबराते तो होंगे, मिटाके मुझको पछताते तो होंगे' मोहम्मद रफी की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था. ये गीत उस समय लोगों की जुबान पर चढ़ गया. रेडियो पर इसकी इतनी ज्यादा डिमांड थी कि देश के अलग अलग रेडियो स्टेशनों से ये लगातार बजता रहता था. खय्याम ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि ये गाना रफी साहब की आवाज में इतना मशहूर हुआ कि पूरे देश में पहुंच गया. अलग अलग रेडियो स्टेशन इसे लगातार बजाते थे. किसी न किसी स्टेशन से हर समय ये गाना सुनाई देता था. ऐसा लगता था जैसे 24 घंटे कहीं न कहीं यही गीत बज रहा हो.
चार दशकों तक छाया रहा मोहम्मद रफी का जादू
मोहम्मद रफी ने 1940 के दशक से लेकर 1970 के दशक तक हिंदी फिल्म संगीत पर अपनी मजबूत छाप छोड़ी. शुरुआती दिनों में उन्हें पहचान बनाने के लिए स्ट्रगल करना पड़ा. लेकिन उनकी मखमली आवाज ने जल्द ही म्यूजिक डायरेक्टर्स और फिल्म प्रोड्यूसर्स का भरोसा जीत लिया. इसके बाद बड़े से बड़ा गीत रफी साहब की आवाज में रिकॉर्ड होने लगा. उन्होंने 'ये दुनिया ये महफिल', 'बहारों फूल बरसाओ', 'चौदहवीं का चांद हो' और 'तेरी प्यारी प्यारी सूरत को' जैसे कई सदाबहार गीत गाए. फिल्म 'हम किसी से कम नहीं' के गीत 'क्या हुआ तेरा वादा' के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड और फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला.