जब सीटी बनी सुपरहिट गानों की पहचान, इस शख्स ने बजाई 1600 गानों में सीटी, बॉलीवुड के 'व्हिसल किंग' को जानते हैं आप?

‘धूम’ से लेकर ‘चांद सिफारिश’ तक कई सुपरहिट गानों में सुनाई देने वाली सीटी के पीछे एक ऐसा कलाकार है, जिसका नाम बहुत कम लोग जानते हैं. आज हम आपको उन्हीं के बारे में बताने जा रहे हैं.

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बॉलीवुड के व्हिसल किंग हैं नागेश सुर्वे

 जब भी बॉलीवुड के यादगार गानों की बात होती है तो सबसे पहले गायकों, संगीतकारों और गीतकारों का नाम सामने आता है. लेकिन कई ऐसे कलाकार भी हैं, जिनकी मेहनत पर्दे के पीछे रह जाती है और दर्शक उनके बारे में जान भी नहीं पाते. फिल्मों के गानों में सुनाई देने वाली सीटी की धुन भी ऐसा ही एक हिस्सा है, जिसने कई रोमांटिक और भावुक गानों को खास बना दिया. अगर आपने ‘धूम', ‘फना', ‘दिल तो पागल है' या ‘मोहब्बतें' जैसी फिल्मों के गाने ध्यान से सुने हैं, तो उनमें बजने वाली सीटी जरूर याद होगी. इन धुनों के पीछे हैं नागेश सुर्वे, जिन्होंने अपने करियर में 1600 से ज्यादा बॉलीवुड गानों में सीटी बजाकर एक अनोखी पहचान बनाई.

जब सीटी बनी सुपरहिट गानों की पहचान

नागेश सुर्वे ने कई ऐसी फिल्मों के लिए सीटी बजाई, जिनके गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं. ‘दिल तो पागल है', ‘कुछ कुछ होता है', ‘मोहब्बतें' का ‘चलते-चलते', ‘धूम 2' का टाइटल ट्रैक, ‘फना' का ‘चांद सिफारिश' और ‘सत्या' का ‘सपने में मिलती है' जैसे कई मशहूर गानों में उनकी सीटी ने अलग ही एहसास पैदा किया. इन गानों में उनकी धुन सिर्फ बैकग्राउंड म्यूजिक नहीं रही, बल्कि गाने की पहचान बन गई.

मजाक में शुरू हुआ सफर, बन गया करियर

नागेश सुर्वे की यह अनोखी यात्रा किसी प्लानिंग का हिस्सा नहीं थी. बचपन में वे अपने मोहल्ले के बच्चों की सीटी की आवाज की नकल किया करते थे. धीरे-धीरे उन्होंने अलग-अलग अंदाज में धुन के साथ सीटी बजाने की कला सीख ली. एक पिकनिक के दौरान कुछ संगीतकारों ने उन्हें सीटी बजाते सुना और मजाक-मजाक में पूछा कि क्या वे किसी गाने के लिए भी ऐसा कर सकते हैं. नागेश ने हां कहा और यही पल उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया. इसके बाद उन्हें 1975 में फिल्म ‘जूली' के मशहूर गीत ‘दिल क्या करे' से बॉलीवुड में पहला मौका मिला.

बेटी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं विरासत

करीब पांच दशक से इस अनोखी कला को जीवित रखने वाले नागेश सुर्वे आज भी संगीत की दुनिया से जुड़े हुए हैं. अब उनकी बेटी रूपाली सुर्वे भी उनके साथ इस कला को आगे बढ़ा रही हैं. डिजिटल तकनीक और आधुनिक संगीत के दौर में भी दोनों पारंपरिक तरीके से सीटी की रिकॉर्डिंग करते हैं. यही वजह है कि बॉलीवुड में व्हिसलिंग आर्ट की यह अनोखी विरासत आज भी जिंदा है और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच रही है.

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