'काशी हिले, पटना हिले', 'परदेसी परदेसी' देने वाले इस जोड़ी का 90 में चलता था सिक्का, गुलशन कुमार हत्याकांड के बाद हुए अलग, एक ने छोड़ा देश, एक की गई जान

इस जोड़ी की पहली भोजपुरी फिल्म 'दंगल' थी, जिसमें मन्ना डे द्वारा गाया गया लोकप्रिय भोजपुरी गीत "कशी हिले, पटना हिले" था.

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इस जोड़ी का 90 में चलता था सिक्का
नई दिल्ली:

श्रवण कुमार राठौर भारतीय संगीत जगत का एक महत्वपूर्ण नाम थे, जो मशहूर संगीतकार जोड़ी 'नदीम-श्रवण' के आधे हिस्से के रूप में जाने जाते थे. उन्होंने 1990 के दशक में हिंदी फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और कई सुपरहिट फिल्मों में मधुर और भावनात्मक संगीत दिया. उनकी धुनों की खासियत सादगी, दिल को छू लेने वाली मेलोडी और शास्त्रीय संगीत की झलक थी. आशिकी, साजन और दीवाना जैसी फिल्मों के संगीत आज भी श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. श्रवण कुमार राठौर ने अपने संगीत से न केवल एक दौर को परिभाषित किया बल्कि भारतीय फिल्म संगीत में अमिट छाप छोड़ी. श्रवण यानी श्रवण कुमार राठौर ने 22 अप्रैल 2021 को इस दुनिया का अलविदा कह दिया था. 

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संगीत प्रेमी परिवार में जन्म 

श्रवण कुमार राठौर का जन्म 13 नवंबर 1954 को मुंबई में एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ था. पिता पं. चतुर्भुज राठौर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे. वे संगीत के माहौल में पले-बढ़े और बचपन से ही उन्हें सुरों से गहरा लगाव था. यही कारण था कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही सुरों की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. उनके भाई रूप कुमार राठौर और विनोद राठौर भी भारतीय संगीत जगत के दिग्गज कलाकार हैं. श्रवण ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी, जिसका प्रभाव उनके फिल्मी गीतों में स्पष्ट दिखाई देता है.

जोड़ी की पहली भोजपुरी फिल्म 'दंगल' थी

नदीम अख्तर सैफी और श्रवण की दोस्ती 1973 में हुई, जब वे एक समारोह में मिले थे. इस जोड़ी की पहली भोजपुरी फिल्म 'दंगल' थी, जिसमें मन्ना डे द्वारा गाया गया लोकप्रिय भोजपुरी गीत "कशी हिले, पटना हिले" था. 1981 में रिलीज़ हुई पहली हिंदी फिल्म 'मैंने जीना सीख लिया' थी, जिसमें अमित कुमार द्वारा गाना गाया गया था. नदीम-श्रवण की जोड़ी की असली पहचान 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' से मिली. इस फिल्म के 'मैं दुनिया भुला दूंगा...धीरे-धीरे से...सांसों की जरूरत…' गीत आज भी लोगों का पसंदीदा है. इस फिल्म के संगीत ने बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और रातों-रात इस जोड़ी को सुपरस्टार बना दिया. इसके बाद इस जोड़ी ने एक के बाद एक सुपरहिट गानों के लिए संगीत बनाए जो आज भी लोगों के दिलों पर जिंदा हैं.

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श्रवण राठौर के संगीत की विशेषता उनकी मधुरता थी

श्रवण राठौर के संगीत की विशेषता उनकी सादगी और मधुरता थी. उन्होंने पश्चिमी वाद्ययंत्रों (जैसे सिंथेसाइज़र) के साथ भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्रों तबला, ढोलक और बांसुरी का जो मिश्रण तैयार किया, वह बेजोड़ था. उनके संगीत में रूहानियत और मेलडी का ऐसा संगम था कि लोग उसे बार-बार सुनना पसंद करते थे. नदीम-श्रवण के संगीत ने उस दौर में मेलोडी को वापस लाया, जब बॉलीवुड में शोर-शराबे वाले संगीत का चलन बढ़ रहा था.

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90 में कई हिट दिए 

साजन (1991) 'देखा है पहली बार' और 'जीए तो जीए कैसे' जैसे गीतों ने धूम मचा दी. दीवाना (1992) में शाहरुख खान की पहली फिल्म, जिसे संगीत ने एक अलग ऊंचाई दी. राजा हिंदुस्तानी (1996) में 'परदेसी परदेसी' आज भी शादियों और महफिलों की जान है. धड़कन (2000) फिल्म के संगीत में भावनात्मक गहराई का एक बेहतरीन उदाहरण है. नदीम-श्रवण की जोड़ी को आशिकी (1991), साजन (1992), दीवाना (1993), और राजा हिंदुस्तानी (1997) के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक अवार्ड मिला था.

कोरोना वायरस ने ली जान 

संगीत की दुनिया का चमकता सितारा श्रवण कुमार राठौर 22 अप्रैल 2021 को कोरोना वायरस से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हमेशा के लिए शांत हो गया. उनके निधन से बॉलीवुड ने अपना एक ऐसा स्तंभ खो दिया, जिसने भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्ण युग को फिर से जीवंत किया थाा. 

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