66 साल पहले गीता दत्त ने ठुकराया था ये गाना, एसडी बर्मन की धुन पर आशा भोसले की आवाज का चला जादू, आज भी जीत लेता है दिल

1960 की क्लासिक फिल्म 'काला बाजार' के सदाबहार गाने 'सच हुए सपने तेरे' में गीता दत्त के इनकार के बाद आशा भोसले से इस गाने को गंवाया गया था. जिसके बाद यह गाना शानदार बना था.

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वहीदा रहमान और देव आनंद का रोमांटिक गाना
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हिंदी फिल्मों के गाने अक्सर जहन में इस तरह बस जाते है कि उन्हें सालों बाद भी गाया जाए तो वो वैसे ही ताजा तरीन लगते है. उन गानों को गुनगनाकर ऐसा लगता है कि जैसे वह हमारी साथ हो रही जिंदगी पर ही बनाए हुए है. ऐसा ही एक गाना 1960 में आई काला बजार नामक एक फिल्म का है, जो भले ही आई ब्लैक व्हाइट में थी लेकिन उसका एक गाना आज भी हमेशा की तरह ओल्ड इज गोल्ड बना हुआ है. 1960 में  रिलीज हुई यह फिल्म लोगों के दिलों में इस तरह से घर गई की इसके गाने लोगों के दिलों जुबान पर चढ़कर बोलने लगे. इन्हीं में से एक बेहद सुरीला और सदाबहार नगमा है 'सच हुए सपने तेरे, झूम ले ओ मन मेरे'..

आशा भोसले की आवाज से सजा सच हुए सपने तेरे गाना

इस गाने का संगीत एस डी बर्मन ने तैयार किया, जबकि गीत शैलेन्द्र के जरिए लिखे गए थे. औऱ आशा भोसले की मखमली आवाज से इसे संवारा गया था. इस तिकड़ी ने समुद्र किनारे फिल्माए इस गाने को बेहतरीन बना दिया. इसके अलवा  यह भारतीय सिनेमा का वो पहला गाना था जिसमें पहली बार सेक्सोफोन का इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा इस गाने को बनने में काफी अड़चने भी आई थी.

वहीदा के कारण गीता दत्त ने गाने से किया था मना

एक इंटरव्यू में देव आनंद ने बताया था कि शुरुआत में एस.डी. बर्मन की गाने को लेकर उनकी पहली पसंद वहीदा रहमान के लिए गीता दत्त थी.  लेकिन किसी कारण दोनों के रिश्तों में आया मनमुटाव इस गाने को बनने में अड़चने पैदा कर रहा था.  गीता दत्त ने वहीदा रहमान पर सीधे फिल्माए जाने वाले गाने को गाने से ही मना कर दिया था, जिसके बाद वह काफी परेशान हुए लेकिन गाना बनान उनके लिए एक चैलेज था, इसलिए उन्होंने इसके लिए काफ सोच कर उन्होंने वहीदा रहमान की मुख्य आवाज के तौर पर आशा भोसले को साइन कर लिया. जिसके बाद बना सच हुए सपने तेरे, झूम ले ओ मन मेरे.

यहां सुने गाना

क्या है फिल्म की कहानी

यह फिल्म 1960 में रिलीज हुई थी. जिसकी कहानी रघु नाम के एक युवक की थी. जिसका किरदार देव आनंद ने निभाया था. वह नौकरी तलाश में कई बार भटकने के बाद वह सिनेमा टिकटों की काला बाजारी का काम करना शुरू करता है. वह इस काम से बहुत अमीर बन जाता है. उसके बाद उसकी लाइफ अलका यानी वहीदा रहमान की एंट्री होती है जिससे प्यार होने के बाद उसके जीवन में बदलाव आता है.

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