लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने बुधवार को विदेश मंत्रालय (MEA) के उस बयान की आलोचना की जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है. उन्होंने इस बयान को बेतुका बताया. उनकी यह प्रतिक्रिया तब आई जब MEA के अधिकारियों ने कहा कि पासपोर्ट यात्रा के लिए सिर्फ एक दस्तावेज है, न कि नागरिकता का सबूत. X पर एक पोस्ट में जावेद अख्तर ने सवाल उठाया कि अगर अधिकारी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं थे कि पासपोर्ट होल्डर भारतीय नागरिक है तो पासपोर्ट कैसे जारी किए जा सकते हैं.
उन्होंने लिखा, "विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा के लिए एक दस्तावेज है, न कि नागरिकता का सबूत. सच में??? तो क्या वे कुछ लोगों को यह यात्रा दस्तावेज जांच किए बिना दे रहे हैं कि वह भारतीय नागरिक है या नहीं?? यह बेतुका है."
The ministry of external affairs says that a passport is a document travel not the proof of citizen ship . Really ??? . So are they providing this travel document to some people with out being totally convinced that this person is an Indian citizen ?? . It is absurd .
— Javed Akhtar (@Javedakhtarjadu) June 24, 2026
जब किसी ने बताया कि आधार, वोटर आईडी और पैन कार्ड भी नागरिकता का सबूत नहीं हैं, तो उन्होंने उस X यूजर को जवाब देते हुए कमेंट किया, "सिस्टम में कौन इन अवैध प्रवासियों को ऐसी बिना शर्त मदद दे रहा है? ऐसे बुरे हालात में, वे नकली और असली नागरिकों के बीच कैसे फर्क करते हैं, सिवाय किसी छोटे-मोटे अधिकारी की मनमर्जी के?"
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MEA ने क्या कहा?
14वें पासपोर्ट सेवा दिवस पर, MEA ने कहा कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा के दस्तावेज हैं जिन्हें सरकार अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाने के लिए जारी करती है, और केवल पासपोर्ट होने से नागरिकता साबित नहीं होती. इस बयान ने X पर एक बड़ी बहस छेड़ दी कि नागरिकता का पक्का सबूत क्या है. यह मुद्दा इसलिए चर्चा में आया क्योंकि किसी देश में पासपोर्ट केवल उस देश के नागरिकों को जारी किए जाते हैं, जबकि MEA का कहना है कि यह दस्तावेज खुद नागरिकता तय नहीं करता.
इस साल की शुरुआत में, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन पर सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है और यह केवल पहचान का दस्तावेज है. वोटर आईडी कार्ड को भी नागरिकता का दस्तावेज नहीं माना जाता है और यह मुख्य रूप से पहचान और निवास का दस्तावेज है जिसका इस्तेमाल वोट देने के अधिकार का प्रयोग करने के लिए किया जाता है.
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नागरिकता कानूनों के तहत, कोई व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक होता है यदि उसका जन्म देश में 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद, लेकिन 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ हो. जुलाई 1987 के बाद पैदा हुए लोगों के लिए, जन्म से नागरिकता का नियम तब लागू होता है जब माता-पिता में से कोई एक नागरिक हो. 3 दिसंबर 2004 या उसके बाद पैदा हुए लोगों के लिए, जन्म से नागरिकता तभी मिलती है जब माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हों, या जन्म के समय माता-पिता में से एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो.
उसी दिन, विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार और चिप-इनेबल्ड ई-पासपोर्ट शुरू करने के बारे में भी जानकारी दी. एक अधिकारी ने बताया कि 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाएं दी गईं, जिनमें 1.39 करोड़ पासपोर्ट शामिल थे. अधिकारी ने यह भी कहा कि अब औसतन छह कामकाजी दिनों में पासपोर्ट मिल जाते हैं (इसमें पुलिस वेरिफिकेशन का समय शामिल नहीं है) और पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर नागरिकों को औसतन 45 मिनट से भी कम समय लगता है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट सेवा केंद्रों की संख्या एक दशक पहले के 77 से बढ़कर 545 हो गई है.
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