बॉलीवुड के कई हिट गाने गजल हैं. "तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो" (अर्थ), "तुम को देखा तो ये ख्याल आया" (साथ साथ), और "दिल चीज क्या है" (उमराव जान) जैसे फेमस ट्रैक गजलों पर आधारित हैं. ये गजल काफी हिट हुए. आज हम प्रसिद्ध उर्दू शायर बशीर बद्र की गजलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें जगजीत सिंह, चित्रा सिंह, और चंदन दास ने अपनी आवाज दी. आज भी उनके ये गजल खूब पसंद किए जाते हैं.
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को हुआ था. वह भारत के एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय उर्दू शायर थे. उनका मूल नाम सैयद मोहम्मद बशीर था. अपनी सरल, सहज और दिल को छू लेने वाली भाषा के लिए उन्हें जाना जाता था। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.
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1987 में मेरठ के दंगों के दौरान उनका घर जल गया था, जिसमें उनकी कई अनमोल और अप्रकाशित रचनाएं नष्ट हो गईं. इसके बाद वे भोपाल में रहने लगे थे. उन्हें साल 1999 में पद्मश्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 91 वर्ष की आयु में 28 मई 2026 को भोपाल में उनका निधन हो गया.
बशीर बद्र की गजलों की खासियत
बशीर बद्र की गजलों की मुख्य खासियत यह है कि आम लोगों के लिए हैं. बेहद सरल, आम बोलचाल और दिल को छू लेने वाली भाषा में जिंदगी के गहरे दर्शन को समझाती हैं. उनके गजल मोहब्बत, और इंसानी रिश्तों के दर्द को बयां करते हैं. उनकी शायरी में भाषाई जटिलता नहीं है, बल्कि सीधे दिल में उतर जाती हैं. उनकी शायरी में एक तरफ प्यार की कोमलता और खूबसूरती है, वहीं दूसरी तरफ तन्हाई, उदासी. पाकिस्तान, दुबई, कतर और अमेरिका में भी उनके फैंस थे. जगजीत सिंह से लेकर चंदन दास तक ने उनकी गजलों को आवाज दी.
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आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
अगर तलाश करू कोई मिल ही जाएगा
यूही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो
न जी भर के देखा न कुछ बात की
सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा
सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए
अभी इस तरफ न निगाह कर मैं गजल की पलकें संवार लूं
कहां आंसुओं की ये सौगात होगी
अगर यकीन नहीं आता तो आजमाए मुझे
खुदा हम को ऐसी खुदाई न दे
भीगी हुई आंखों का ये मंजर न मिलेगा
होंटों पे मोहब्बत के फसाने नहीं आते
मुझ से बिछड़ के ख़ुश रहते हो
है अजीब शहर की जिंदगी न सफर रहा न कयाम है