गणतंत्र दिवस के मौके पर रिलीज़ हुई देशभक्ति से भरपूर फिल्म ‘बॉर्डर 2' जिसने बॉर्डर की याद दिलाते हुए एक बार फिर दर्शकों को देशभक्ति से भावविभोर कर दिया . फिल्म ने पहले दिन करीब 32 करोड़ की ओपनिंग ली और तीन दिन में फिल्म ने 121 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिए है और उम्मीद है की 26 जनवरी के दिन देश में ये डेढ़ सौ का आंकड़ा भी पार कर जाएगी. इस मौके पर एनडीटीवी से खास बात की फिल्म के निर्माता और टी सीरीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भूषण कुमार ने. बातचीत के दौरान उनसे जब पूंछा गया की फिल्म ने तीन दिनों में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया और गणतंत्र दिवस पर इसकी कमाई में बड़े इज़ाफे की उम्मीद है तो फिल्म की कामयाबी पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है तो उन्होंने कहा -
जवाब: ईमानदारी से कहूं तो दिल की धड़कन बढ़ी रहती है. जब भी बड़ी फिल्म बनती है, डर रहता है क्योंकि हमने देखा है कि बड़े नामों वाली कई फिल्में नहीं चलतीं. लेकिन इस बार फिल्म पूरी देखने के बाद पहली बार मैं पूरी तरह कॉन्फिडेंट था. अनुराग सिंह की डायरेक्शन, इमोशंस, बैकग्राउंड म्यूजिक और जिस तरह पुराने गानों को उनकी आत्मा बरकरार रखते हुए रीक्रिएट किया गया—इन सबने कॉन्फिडेंस बढ़ाया.
फाइनल ट्रेलर के बाद यकीन हो गया था कि फिल्म खुलेगी, और वैसा ही हुआ.
सवाल: 32 करोड़ की ओपनिंग—क्या यही उम्मीद थी या इससे ज़्यादा?
जवाब: मैं हमेशा कम उम्मीद करता हूं. टीम को लगा था कि थोड़ी ज़्यादा होगी, लेकिन मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए 32 करोड़ बहुत स्ट्रॉन्ग ओपनिंग है. पुष्पा के बाद सिर्फ छावा ने 33 करोड़ की ओपनिंग ली थी.
सेकंड और थर्ड डे पर हमारी फिल्म ने अपने ही रिकॉर्ड क्रॉस किए. नॉर्थ में कुछ शोज़ लेट हुए, बारिश और ठंड का असर भी पड़ा, फिर भी वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म को पूरी तरह सेट कर दिया.
सवाल: 26 जनवरी के मौके पर हर जगह फिल्म के गाने सुनाई दे रहे हैं—सेलिब्रेशन, आर्मी कैंप्स, सोशल मीडिया. ये सब देखकर क्या महसूस हो रहा है?
जवाब: बहुत खुशी हो रही है. हमें भरोसा था कि अगर गानों को पूरी इज्जत के साथ रीक्रिएट किया गया, तो लोग अपनाएंगे. पुराने आइकॉनिक गाने हों या नए गाने—लोग सबको पसंद कर रहे हैं, रील्स बना रहे हैं.
जैसे कुछ एल्बम्स में हमें पहले से यकीन होता है कि गाने चलेंगे, वैसी ही फीलिंग इस फिल्म के साथ थी. और जब वो सच होता दिखता है, तो बहुत संतोष मिलता है.
सवाल: क्या पुराने गानों को रखने को लेकर टीम में कोई कन्फ्यूजन या डिबेट थी?
जवाब: बिल्कुल नहीं. “संदेसे आते हैं”, “हिंदुस्तान”, बॉर्डर टाइटल, जे.पी. दत्ता और सनी देओल—इनके बिना ये फिल्म बन ही नहीं सकती थी. हमने शुरुआत से तय किया था कि ओरिजिनैलिटी से दूर नहीं जाना है. टेंपो और जोन वही रखा, बस अरेंजमेंट को बेहतर बनाया. आज के दौर में रीक्रिएशन्स को लेकर नेगेटिविटी रहती है, लेकिन ऑडियंस ने इन्हें ‘बेस्ट रिक्रिएशन टिल डेट' कहा—ये हमारे लिए बड़ी अचीवमेंट है.
सवाल: आगे के कलेक्शन को लेकर क्या सोच है?
जवाब: मैं आगे का नहीं सोचता. हम अभी का पल एंजॉय कर रहे हैं. कौन-सी फिल्म किस फिल्म का कलेक्शन क्रॉस करेगी—इसमें मेरी कोई दिलचस्पी नहीं. हमारी सोच बस ये है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग फिल्म देखें और फिल्म अच्छा बिज़नेस करे.
सवाल: बतौर प्रोड्यूसर और टी-सीरीज़ एक कंपनी के तौर पर आपको क्या लगता है—क्या यह फिल्म जगत के लिए अच्छा वक्त है, क्योंकि एक तरफ धुरंधर ने अच्छा कलेक्शन किया और नए साल में बॉर्डर 2 भी अच्छा परफॉर्म कर रही है?
जवाब: बहुत बढ़िया चल रहा है. बैक-टू-बैक फिल्में आई हैं और दोनों ने अच्छा प्रदर्शन किया है. यह वाली फिल्म भी अच्छा बिज़नेस करती नज़र आ रही है. फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह बहुत पॉज़िटिव है. अब आगे धुरंधर 2 भी आ रही है 19 मार्च को. वो भी इंडस्ट्री को अच्छा पुश देगी. प्लानिंग बहुत सॉलिड रही है—पहले धुरंधर, फिर बॉर्डर, उसके बाद धुरंधर 2 और टॉक्सिक जैसी बड़ी फिल्में. ऐसी फिल्में आएंगी तो लोगों की थिएटर जाने की आदत बनी रहेगी.
सवाल: अगला सवाल सनी देओल को लेकर है. आज एक तरफ शाहरुख़ ख़ान की ज़बरदस्त फैन फॉलोइंग है और दूसरी तरफ सनी देओल—जिन्होंने करियर में उतार-चढ़ाव देखा लेकिन फिर दमदार वापसी की. आप इस फिनोमेना को कैसे डिफाइन करेंगे?
जवाब: सनी सर एक आइकॉनिक और लेजेंडरी एक्टर हैं—ये सब जानते हैं. सबसे अहम बात ये है कि एज कभी लिमिट नहीं होती. रजनीकांत सर आज भी कमर्शियल सिनेमा कर रहे हैं और सनी सर का फिनोमेना भी बहुत बड़ा है.
गदर जैसी फ्रेंचाइज़ और जाट जैसी फिल्म, जो पूरी तरह उन्हीं के कंधों पर थी, इतना बड़ा बिज़नेस करती है—ये अपने-आप में बहुत बड़ी बात है.
वो आज भी उतनी ही मेहनत करते हैं. सुबह 5–5:30 बजे उठकर काम करते हैं और पूरी फिल्म पर फोकस रखते हैं.
मैंने कई बार कहा है, “सनी सर के बिना ये फिल्म ना शुरू होती, ना पूरी होती, ना रिलीज़ होती.”
उन्होंने हर लेवल पर पूरा साथ दिया, प्रमोशन से लेकर लोकेशन्स तक.
सवाल: बॉर्डर अब एक क्रेज बन चुका है. बॉर्डर 2 भी कामयाबी की राह पर है तो क्या बॉर्डर 3 भी दिमाग़ में है?
जवाब: वॉर फिल्म्स ऐसा जॉनर नहीं हैं जिन्हें जल्दी-जल्दी बनाया जा सके. इसके लिए एक मज़बूत और रियल कहानी चाहिए होती है. बॉर्डर 1971 की जंग पर बनी थी और इतने सालों बाद भी हमने उसी वॉर को एक अलग नज़रिए से दिखाया है.
उस जंग से जुड़े और भी कई किस्से हैं. जब सही कहानी और मज़बूत स्क्रिप्ट मिलेगी, तभी आगे बढ़ेंगे.
आज के दौर में बिना दमदार स्क्रिप्ट के कोई फिल्म नहीं बनाई जा सकती—ये हमने कई बार देखा है.