Exclusive: ओ रोमियो विवाद पर बोले हुसैन जैदी, कहा हुसैन उस्तरा कोई महात्मा नहीं

विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित और शाहिद कपूर द्वारा अभिनीत फिल्म ‘ओ रोमियो’ अपने मुख्य किरदार को लेकर विवादों में है. फिल्म की कहानी लेखक हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वीनज ऑफ मुंबई’ की एक कहानी से प्रेरित बताई जा रही है.

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Exclusive: ओ रोमियो विवाद पर बोले हुसैन जैदी

विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित और शाहिद कपूर द्वारा अभिनीत फिल्म ‘ओ रोमियो' अपने मुख्य किरदार को लेकर विवादों में है. फिल्म की कहानी लेखक हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वीनज ऑफ मुंबई' की एक कहानी से प्रेरित बताई जा रही है, जो हुसैन उस्तारा के इर्द-गिर्द घूमती है. लेकिन ट्रेलर आने के बाद से ही फिल्म विवादों में आ गई, क्योंकि हुसैन उस्तारा की बेटी सनोबर शेख ने फिल्म के निर्माता और निर्देशक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है. उनका आरोप है कि फिल्म में उनके पिता की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है और न तो विशाल भारद्वाज और न ही किताब के लेखक हुसैन जैदी ने कहानी लिखने से पहले उनसे अधिकार लिए. इस मुद्दे पर एनडीटीवी ने लेखक हुसैन जैदी से खास बातचीत की—

प्रश्न: हुसैन साहब, पूछना चाहूँगा कि जो फिल्म ‘ओ रोमियो' है, उसमें शाहिद कपूर के किरदार को हुसैन उस्तारा से प्रेरित बताया जा रहा है. तो यह कितना सही है?

हुसैन जैदी: यह ढीले तौर पर प्रेरित है, सौ प्रतिशत उन पर आधारित नहीं है. लेकिन ऐसा है कि विषाल ने अपने रचनात्मक कल्पना का इस्तेमाल किया है, किरदार में और परतें और रंग जोड़ने के लिए. उस्तारा का हिटमैन होना, हिंसक आदमी होना और एक गैंग का हिस्सा होना—यह एक तथ्य है और दर्ज इतिहास है. अगर आप मेरे इंटरव्यू भी देखेंगे, तो एक नहीं, कई पुलिस अधिकारी यह बात कहेंगे—प्रदीप शर्मा से लेकर प्रदीप सावंत और राकेश मारिया तक, सब कहेंगे कि यह आदमी उनका मुखबिर था और उस इलाके में अकेला दाऊद के खिलाफ खड़ा था. यह तथ्यात्मक इतिहास है. अब अगर आप कहें कि हुसैन उस्तारा एक महात्मा था, एक परोपकारी था या एक भला आदमी था, तो यह गलत प्रस्तुति होगी.

प्रश्न: विशाल भारद्वाज ने इस फिल्म की कहानी आपकी किताब की एक छोटी कहानी से बुनी है, जैसा उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी कहा था. उन्होंने यह भी कहा था कि “मुझे अधिकार लेने की जरूरत नहीं थी, अगर लिए होंगे तो हुसैन साहब ने लिए होंगे, नहीं तो लेने चाहिए.” तो क्या आपने किताब लिखते वक्त अधिकार लिए थे?

हुसैन जैदी: देखिए, जब मेरी हुसैन उस्तारा से बातचीत हो रही थी, तब उनके जीवन के अधिकार लेने की बात नहीं थी. हुसैन उस्तारा मेरा दोस्त था. 1995 से 1998 तक, जब तक उनकी हत्या नहीं हो गई, हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे. हम घंटों बैठकर बातें करते थे और हफ्ते में दो-तीन बार मिलते थे. उन्होंने मुझे कई फ्रंट-पेज स्टोरीज दी हैं. मैंने हुसैन उस्तारा को ज्योति डे से भी मिलवाया था. मेरा मतलब यह है कि जब आप बहुत अच्छे दोस्त हो जाते हैं, तो मैं यह नहीं कहूँगा कि “मैं आप पर कहानी बना रहा हूँ, मुझे कानूनी अधिकार लिखकर दे दीजिए.” हम एक-दूसरे को दोस्त की तरह जानते थे.

और जब दोस्ती के हिसाब से वह कुछ बातें बताता था… जैसे ‘सपना दीदी' वाली कहानी, वह अचानक बताई गई कहानी है. मैं और विक्रम चंद्रा उनके अड्डे पर मिलने गए थे, जो बापू खोटे स्ट्रीट पर है. बातचीत के दौरान हमने उनके फोन, बंदूकें और उनका व्यवहार देखा, तो हमने बस पूछ लिया कि “क्या इस हिंसक आदमी को कभी जिंदगी में मोहब्बत हुई होगी?” उसने बहुत सहजता से एक घटना बताना शुरू किया, जो बाद में मेरी रिपोर्टिंग में आई.

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तब उसकी बेटियों या परिवार ने कोई आपत्ति नहीं की. फिर विक्रम चंद्रा ने ‘कल्ट ऑफ ऑथेंटिसिटी' के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में वह कहानी लिखी. मैंने 2012 में अपनी किताब ‘माफिया क्वीनज ऑफ मुंबई' में इसे लिखा, और तब भी मुझे कहीं से कोई नोटिस या आपत्ति नहीं मिली—न सपना दीदी की फैमिली से, न हुसैन उस्तारा की फैमिली से.

प्रश्न: पर  सनोबर जी (हुसैन उस्तारा की बेटी) का कहना है कि जो आपकी किताब ‘माफ़िया क्वींस ऑफ़ मुंबई ‘ का उन्हें पता ही नहीं चला कि यह किताब कब आई.

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हुसैन जैदी: वही मैं आपको बता रहा हूँ, हमने यह किताब छुपकर प्रकाशित नहीं की थी. इसका लॉन्च बहुत सितारों से भरा हुआ था. मेरे ख्याल से किसी और किताब का इतना बड़ा लॉन्च नहीं हुआ होगा. लॉन्च पर विशाल भारद्वाज, रानी मुखर्जी और एकता कपूर जैसी बड़ी हस्तियाँ आई थीं. वह लॉन्च आज भी यूट्यूब पर है.

विशाल जी ने उस वक्त भी कहा था कि उन्हें ‘सपना दीदी' की कहानी बहुत पसंद है और वह इस पर फिल्म बनाएंगे. उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने हुसैन से इसके अधिकार लिए हैं. अब अगर उन्होंने ध्यान नहीं दिया या पढ़ा नहीं, तो मेरी गलती नहीं है.

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प्रश्न: अब जब उन्होंने कोर्ट में मामला दर्ज किया है, तो आप इसे आगे कैसे देखते हैं आप क्या कदम उठा रहे हैं ?

हुसैन जैदी: सनोबर ने मेरी टीम की एक लड़की से बात की थी और कहा था कि उनके पिता को बुरा बताया गया है. मैंने कहा कि सनोबर से कहो कि उनके वालिद मेरे दोस्त थे. मेरा उनसे पेशेवर संपर्क था, वह मुझे अंडरवर्ल्ड की कहानियाँ सुनाते थे. मुझे उनकी फैमिली के बारे में ज्यादा नहीं पता था.

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मैंने अपनी सहयोगी से कहा कि अगर सनोबर को शिकायत है, तो वह मेरे पॉडकास्ट पर आएँ और अपनी बात रखें. लाखों लोग मेरा पॉडकास्ट देखते हैं, उन्हें पता चल जाएगा अगर मैंने कुछ गलत लिखा है. लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया.

अब मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. मेरी किताब में हुसैन उस्तारा एक हीरो, एक हितैषी की तरह दिखाया गया है, जो अपनी जिंदगी भूलकर सपना दीदी के बदले को अपना मकसद बना लेता है. मैंने उन्हें बुरा आदमी या खलनायक नहीं दिखाया. अब उन्हें इस बात से समस्या है कि मैंने उन्हें ‘हिंसक' क्यों बताया, तो भाई, वह गैंगस्टर था, कोई मदरसे का मौलवी तो नहीं था.


प्रश्न: हुसैन उस्तरा की बेटी सनोबर शेख का कहना है कि उनके बच्चे बड़े हो गए हैं और लोग उनसे पूछते हैं कि क्या उनके पिता इस तरह के व्यक्ति थे तो इस से उनपर बुरा असर पड़ता है ?

हुसैन जैदी: तो क्या उन्हें लगता है कि उनके पिता किसी स्कूल में प्रिंसिपल थे? क्या उन्होंने कभी अपने पिता के पास बंदूक नहीं देखी? क्या उन्होंने कभी नहीं पूछा कि पापा आप क्या करते हैं? मेरा बेटा जब 3-4 साल का था, तब वह मुझसे पूछता था कि मैंने एक अखबार छोड़कर दूसरा क्यों जॉइन किया. बच्चों को सब पता होता है.

हुसैन उस्तारा की औरतों के साथ संबंधों की बात उस गली के हर आदमी को पता है. प्रदीप सावंत (डीसीपी क्राइम) ने मेरे पॉडकास्ट पर कहा है कि हुसैन उस्तारा की हत्या इसलिए हुई क्योंकि छोटा शकील ने उनकी जिंदगी में एक लड़की को ‘हनी ट्रैप' की तरह प्लांट किया था. यह तो पुलिस रिकॉर्ड में भी है.


फिलहाल, ‘ओ रोमियो' से जुड़ा यह विवाद कानूनी दायरे में है और अदालत तय करेगी कि फिल्म और किताब में दिखाया गया किरदार कलात्मक स्वतंत्रता के तहत आता है या इससे किसी की छवि को नुकसान पहुँचा है. लेकिन इतना तय है कि फिल्म अपनी रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में घिर चुकी है.

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