‘हॉन्टेड 3D’ कमाई में सबसे आगे, फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर और एक्टर सुनील शाक्य ने बताई विक्रम भट्ट के हॉरर फिल्में बनाने की वजह

लंबे समय से निर्देशक विक्रम भट्ट के साथ उनकी फिल्मों में कास्टिंग का काम कर रहे सुनील इस बार फिल्म में एक अहम किरदार यानी विलेन के रोल में भी नजर आए हैं.

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‘हॉन्टेड 3D’ कमाई में सबसे आगे
NDTV

पिछले हफ्ते रिलीज हुई फिल्मों में ‘हॉन्टेड 3D' कारोबार के मामले में सबसे आगे रही है. फिल्म अब तक करीब 15 करोड़ 90 लाख रुपये का कारोबार कर चुकी है और अपने बजट से अधिक कमाई कर मुनाफे में पहुंच चुकी है. दर्शकों से मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स के बीच एनडीटीवी ने फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर और अभिनेता सुनील शाक्य से खास बातचीत की. लंबे समय से निर्देशक विक्रम भट्ट के साथ उनकी फिल्मों में कास्टिंग का काम कर रहे सुनील इस बार फिल्म में एक अहम किरदार यानी विलेन के रोल में भी नजर आए हैं. पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश:

सवाल: कई फिल्में रिलीज हुईं, पर ‘हॉन्टेड 3D' का कलेक्शन सबसे ज्यादा (करीब 15.90 करोड़) रहा. इसमें ऐसा क्या खास है?

सुनील शाक्य: सर, फिल्म की कहानी सबसे महत्वपूर्ण होती है. दर्शकों को इसकी कहानी बहुत पसंद आ रही है. यह एक फ्रेंचाइजी फिल्म है. साल 2011 में आई पहली ‘हॉन्टेड' को भी दर्शकों ने बहुत प्यार दिया था, और इस बार भी लोग इसे वैसा ही प्यार दे रहे हैं.

सवाल: आप आमतौर पर कास्टिंग डायरेक्टर हैं. इस film में आपको यह विलेन का रोल कैसे मिला?

सुनील शाक्य: जब विक्रम सर इस फिल्म की प्लानिंग कर रहे थे, तब उनके ऑफिस से मुझे अर्जेंटली बुलाया गया. उन्होंने मुझे कहानी सुनाई और मुख्य किरदारों के बारे में बताया, जिनमें से एक विलेन ‘थानेदार' का किरदार था. सर ने पूछा कि उन्हें ऐसा कैरेक्टर चाहिए, तो मैंने कहा कि मैं आपके लिए अपने जैसा ही कोई मिलता-जुलता फेस ढूंढ दूंगा. इस पर सर हंसे और बोले, “यह कैरेक्टर तू ही प्ले कर रहा है.”

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सवाल: फिल्म में महाक्षय (मिमोह) को ही लीड रोल में लेने की क्या वजह थी?

सुनील शाक्य: मिमोह ‘हॉन्टेड' के पहले पार्ट में भी थे. दर्शकों का उनके साथ एक जुड़ाव था, इसलिए उन्हें फिल्म में वापस लेना सर का ही डिसीजन था.

सवाल: आजकल कई कास्टिंग डायरेक्टर्स खुद भी एक्टिंग कर रहे हैं. आरोप लगते हैं कि वे खुद को ही कास्ट कर लेते हैं और दूसरों को चांस नहीं मिलता. इस पर क्या कहेंगे?

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सुनील शाक्य: सर, यह समय का संयोग है. हर इंसान यहां काम करने आया है और सबका स्ट्रगल करने का अपना तरीका है. अगर कोई कास्टिंग डायरेक्टर एक्टिंग कर रहा है और दर्शकों को काम पसंद आ रहा है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है. इससे दूसरों का काम नहीं छिनता, बाकी एक्टर्स को भी काम मिल ही रहा है.

सवाल: हॉरर और कॉमेडी जॉनर को इंडस्ट्री में उतनी इज्जत या अवॉर्ड्स नहीं मिलते जितने मिलने चाहिए. इस पर आपकी क्या राय है?

सुनील शाक्य: ये दोनों जॉनर आपस में जुड़े हैं—एक हंसाने वाला है और दूसरा डराने वाला. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस कॉमेडी फिल्म पर ऑडियंस हंस दे और जिस हॉरर फिल्म से ऑडियंस वाकई डर जाए, वही उस फिल्म का सबसे बड़ा अवॉर्ड है.

सवाल: क्या आप खुद इस फिल्म को देखते वक्त डरे?

सुनील शाक्य: बिल्कुल सर! जब मैं अपने बच्चों के साथ यह फिल्म देख रहा था, तो मुझे वाकई बहुत डर लगा. फिल्म में मेरा एक काफी डरावना सीन भी है.

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सवाल: बीच में विक्रम भट्ट का एक खराब फेज आया, क्या उसकी वजह से फिल्म में कोई देरी हुई?

सुनील शाक्य: सर, फिल्म में VFX का काम थोड़ा ज्यादा था, जिसमें स्वाभाविक रूप से समय लगता है. बाकी जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन फिल्म में देरी केवल VFX के काम की वजह से हुई थी.

सवाल: क्या आप आगे भी एक्टिंग जारी रखेंगे या कास्टिंग छोड़ देंगे?

सुनील शाक्य: अगर आगे अच्छे ऑफर्स मिलेंगे, तो मैं एक्टिंग जरूर करूंगा. लेकिन मैं कास्टिंग कभी नहीं छोड़ूंगा, क्योंकि इसी पेशे ने मुझे मुंबई में टिकाए रखा.

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सवाल: मुंबई में आपका शुरुआती स्ट्रगल कैसा था?

सुनील शाक्य: साल 2013 में जब मैं मुंबई आया, तब मैंने 1 महीने तक बहुत कड़ा स्ट्रगल किया. मैं 16 ऑटो ड्राइवरों के साथ एक चॉल में रहता था. सुबह 6 बजे उठकर, खुद खाना बनाकर, टिफिन पैक करके काम पर निकलता था. घर से ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे, इसलिए मैंने बहुत सीमित पैसों में संघर्ष किया.

मैंने 1 महीने तक रोज आराम नगर के चक्कर काटे और ऑडिशंस दिए. उस दौरान मुझे तीन शो मिले, जिनमें पहला स्टार प्लस का ‘मेड इन इंडिया' शो था. इसके बाद धीरे-धीरे मेरा सफर आगे बढ़ा, लेकिन फिर पापा के साथ एक ऐसी घटना घटित हुई कि मुझे मुंबई छोड़कर वापस जाना पड़ा. वापस आने के बाद पापा पर बहुत सारा कर्जा हो गया था, जो मुझे चुकाना था. मेरे पास एक-डेढ़ साल का समय था. तब मैंने एक्टिंग न करके सबसे जल्दी पैसे कमाने के लिए बतौर कास्टिंग डायरेक्टर जॉब शुरू की ताकि इंडस्ट्री से भी जुड़ा रहूं और कर्जा भी उतर जाए. किस्मत से उसी काम से मेरा नाम और पहचान बनी.

सवाल: आपको कास्टिंग करते हुए कितने साल हो गए हैं?

सुनील शाक्य: सर, मैं साल 2013-14 से ही लगातार कास्टिंग कर रहा हूं.

सवाल: विक्रम भट्ट और हॉरर फिल्मों का क्या रिश्ता है? वह इतनी हॉरर फिल्में क्यों बनाते हैं?

सुनील शाक्य: हर जॉनर तो हर इंसान या डायरेक्टर बनाता ही है. उन्हें लगा कि हॉरर एक बेस्ट चीज हो सकती है. मेरा मानना है कि हॉरर फिल्म का जो मेन हीरो होता है, वो उसका भूत या आत्मा होती है जो फिल्म में डाली जाती है. अगर हम उसमें किसी बड़े स्टार को ले लें, तो ऑडियंस का ध्यान बड़े स्टार के ऊपर ही जाएगा. विक्रम सर इस जॉनर को बखूबी समझते हैं.

सवाल: क्या विक्रम भट्ट असल जिंदगी में भी भूतों और इन चीजों पर विश्वास करते हैं?

सुनील शाक्य: हां, मैंने खुद एक-दो बार उनके मुंह से सुना है कि वह इन चीजों को बहुत मानते हैं. जब वह हॉरर फिल्में बनाते हैं, तो उनके साथ कई ऐसे इंसिडेंट्स होते हैं. जैसे फिल्म ‘1920' की शूटिंग के दौरान विदेश में खुद-ब-खुद लाइट ट्रिप करने लगी थीं, ऐसा एक वाकया उन्होंने मुझे बताया था.

सवाल: आप उत्तर प्रदेश से हैं, क्या आपने कभी असल जिंदगी में कोई ऐसी सुपरनेचुरल घटना महसूस की है?

सुनील शाक्य: जी, मैं मूल रूप से आगरा से हूं और मेरा जन्म चंबल में हुआ था. बचपन में एक बार मैं अपने दादाजी के साथ शाम के करीब 7-8 बजे एक नदी पार कर रहा था, जो चंबल नदी के बगल से निकलती है जिसे हम पार्वती नदी बोलते हैं. नदी पार करते वक्त उस गांव के किनारे मैंने एक बहुत बड़ा, काले रंग का ‘जिंद' जैसा साया देखा, जो बहुत लंबा-तगड़ा था. मैं डर गया, तो मेरे दादाजी ने वहां आवाज दी कि ‘भाई इनको हटाइए'. बाद में मुझे पता चला कि वह उस परिवार के कोई प्रेत थे. वह एकदम से नदी में कूदे और उसके बाद हमने नदी पार की. वह पानी तक फैली एक काली परछाई जैसा था, जो बेहद डरावना अनुभव था.

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