Haiwaan Review In Hindi: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की मचअवेटेड फिल्म हैवान सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. यह जोड़ी सालों बाद देखने को बड़े पर्दे पर मिली है. यह 2016 में रिलीज हुई मलयालम फिल्म ओप्पम का रीमेक है, जिसके हीरो मोहनलाल थे. लेकिन खास बात यह है कि हैवान में अक्षय कुमार जहां विलेन की भूमिका में हैं तो वहीं सैफ अली खान नेत्रहीन हीरो का किरदार निभाते हुए नजर आ रहे हैं. जबकि फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है. फिल्म 11 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, जिसका फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने मैं थियेटर में पहुंचा तो चारों तरफ सन्नाटा था. वहीं इस तरह पहली टिकट खरीदने वाला पहला दर्शक मैं बना, जिसके चलते अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म हैवान कैसी होगी.
हैवान की कहानी
हैवान फिल्म के पहले ही सीन से पता चल जाता है कि हम 'ओप्पम' ही देखने जा रहे हैं, लेकिन बॉलीवुड के रंग में. अब बॉलीवुड ठहरा मोटे बजट वाला. तो अब अगर ओप्पम का रीमेक होता है. हीरो को दिखाई नहीं देता है. वो बिल्डिंग का मेंटीनेंस मैनेजर है तो क्या हुआ. वो लिनेन के नवाबी कुर्ता पाजामा पहन सकता है जो मनीष मल्होत्रा का डिजाइन किया हुआ लग सकता है. क्या हुआ जो विलेन जेल से छूटा है. उसके पास महंगी गाड़ी हो सकती है. अब अंदाज लगा लीजिए मलयालम की सुपरहिट फिल्म को जब बॉलीवुड में बनाया गया तो उसका ऐसा हश्र होना तो तय था ही.
गजब की बात यह है कि प्रियदर्शन ने ही ओप्पम को मलयालम में बनाया था, जिसका बजट था सात करो़ड़. बात 10 साल पहले की है. लेकिन 2026 में वही फिल्म प्रियदर्शन बनाते हैं तो बजट पहुंच जाता है 110 करोड़ रुपये. फिर उनको बॉलीवुड की शर्तों को मानना पड़ता है. इस तरह ओप्पम बन जाती है हैवान.
अब कहानी कुल मिलाकर इतनी ही है कि सैफ को बहन की शादी करनी है. पैसा चाहिए. एक रिटायर्ड जज के वो विश्वासपात्र हैं. उनका एक राज है. ये राज सैफ जानते हैं. लेकिन अक्षय कुमार का अतीत है और उन्हें जज से बदला लेना है. रिटायर्ड जज का राज सिर्फ सैफ ही जानते हैं. बस यही कहानी है, अक्षय को कत्ल करना है और सैफ को बचाना है.
हैवान में एक्टिंग
ओप्पम के रीमेक को हैवान इसकी एक्टिंग बनाती है. ना तो अक्षय कुमार और ना ही सैफ अली खान इन किरदारों के लिए बने थे. लेकिन प्रियदर्शन ने ना जाने क्या सोचकर इन्हें कास्ट कर लिया. मोहनलाल ने जयरामन का किरदार जिस शिद्दत से निभाया वो बेजोड़ है. उस पर तरस आता है. उसके साथ जुड़ा महसूस होता है. उस कैरेक्टर के साथ आदमी इमोशंस को जीता है. लेकिन सैफ अली खान बिल्कुल भी इम्प्रेस नहीं कर पाते हैं. ये किरदार उनके लिए था ही नहीं. अक्षय कुमार के तो कहने ही क्या. ऐसा लगता है कि वे ये फिल्म कुछ बचे हुए समय में पूरी कर गए क्योंकि जिस तरह की इंटेंसिटी चाहिए थी, वो पूरी तरह मिस कर गए. बाकी सब एवरेज है.
हैवान का डायरेक्शन
हैवान के पहले हाफ में जहां सैफ अली खान और अक्षय कुमार की एक्टिंग इम्प्रेस करने में नाकामयाब रहती है तो वहीं प्रियदर्शन ओप्पम जैसा जादू चला नहीं पाते हैं. वहीं दूसरे हाफ में निराशाजनक डायरेक्शन कायम रहता है क्योंकि सैफ अली खान और अक्षय कुमार की एक्टिंग फिल्म की लय बना पाने में कामयाब नहीं हो पाते हैं. कहानी खींची खींची लगती है. जो फिल्म मलयालम में इम्प्रेसिव थी वो बॉलीवुड में भयंकर भूल बनती हुई नजर आ रही है. प्रियदर्शन का डायरेक्शन कमजोर लगता है. एक्टिंग तो इससे भी बड़ी कमजोरी है, जिसकी वजह गलत कास्टिंग है. फिल्म में ना तो थ्रिल है और ना ही कोई सस्पेंस. क्राइम थ्रिलर मूवीज हमेशा अच्छी होती तब जब हमें पता ना हो कि क्या होने वाला है. लेकिन हैवान में पूरी तरह पता चल जाता है कि आगे क्या होगा.
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