गुलजार ने लिखा था 51 साल पुराना गाना, फिल्म के दौरान राखी से टूटी थी एक साल की शादी, बना टूटे दिल का सहारा

गुलजार के गाने के बोल हर टूटे दिल की दास्तान कहते हैं. दिल जब टूटता है तो गुलजार का ये गाना जरूर याद आता है और ऐसा लगता है जैसे गीतकार ने आपके ही दिन का हाल कागजों पर उतार दिया हो और उसे किशोर कुमार ने अपनी आवाज में पिरो दिया हो.

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गुलजार ने लिखा था 51 साल पुराना गाना
नई दिल्ली:

बॉलीवुड के कुछ गाने ऐसे हैं जो भले ही कई दशकों पहले बने हों लेकिन आज भी लोग उन्हें गुनगुनाते हैं. ये गाने कुछ खास मौकों पर याद आ ही जाते है. ऐसा ही एक गाना है 1975 में आई फिल्म आंधी का सॉन्ग ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं..'. इस गाने के बोल हर टूटे दिल की दास्तान कहते हैं. दिल जब टूटता है तो गुलजार का ये गाना जरूर याद आता है और ऐसा लगता है जैसे गीतकार ने आपके ही दिन का हाल कागजों पर उतार दिया हो और उसे किशोर कुमार ने अपनी आवाज में पिरो दिया हो. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस गीत को लिखने वाले गुलजार के अंदर से विरह भाव आए कहां से. दरअसल इसका किस्सा उनके निजी जिंदगी से जुड़ा है.

एक घटना ने बिगाड़ दिया राखी-गुलजार का रिश्ता

साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म आंधी की शूटिंग के लिए फिल्म का कास्ट कश्मीर में था. इस फिल्म को डायरेक्ट भी खुद गुलजार साहब ने ही किया था. वह 'आंधी' की शूटिंग के लिए कश्मीर में थे और उनकी पत्नी राखी भी उनके साथ थीं. एक रात जब फिल्म की पूरी कास्ट और क्रू, जिसमें लीड एक्टर्स संजीव कुमार और सुचित्रा सेन भी शामिल थे, एक साथ मिल-जुलकर समय बिता रहे थे, तो संजीव शराब के नशे में धुत हो गए.

हालत यह थी कि जब सुचित्रा वहां से जाना चाहती थीं, तो संजीव ने उनका हाथ पकड़ लिया और उन्हें जाने नहीं दिया. उनकी इस हरकत से सुचित्रा नाराज हो गईं और तभी गुलजार साहब उनकी मदद के लिए आगे आए. उन्होंने सुचित्रा को संजीव कुमार की पकड़ से छुड़ाया और उन्हें उनके कमरे तक छोड़ने गए.

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उनके कमरे में लौटते समय, गुलजार की पत्नी राखी ने उनसे सवाल किया कि उन्हें उस खूबसूरत एक्ट्रेस को उनके कमरे तक छोड़ने क्यों जाना पड़ा. पत्नी की इस बात पर गुलजार को गुस्सा आ गया और उन्होंने अपनी पत्नी पर हाथ उठा दिया. इस घटना से राखी बुरी तरह टूट गईं और यह उनके लिए एक बहुत ही दुखद अनुभव बन गया.

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ये गाना बना टूटे हुए दिल का नगमा

राखी और गुलजार की शादी 1973 में हुई थी, 1974 में अलग हो गए. यह वही समय था जब यह फिल्म बन रही थी. ऐसी कई खबरें हैं कि उनके बीच मतभेद तब शुरू हुए जब राखी, गुलजार के साथ जम्मू-कश्मीर गईं, जहां इस फिल्म की शूटिंग हो रही थी. ऐसे में ये कहा जा सकता है कि जब गुलजार इस गाने को लिख रहे थे तो वह खुद उस दर्द से गुजर रहे थे, जिसे उन्होंने गाने के बोल में उतार दिया है.

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