आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी रणवीर सिंह की धुरंधर को लेकर तारीफें तो सुनने को मिल ही रही हैं लेकिन इस बीच कुछ विवाद भी पीछा कर रहे हैं. हाल में मनोज आहुजा नाम के एक शख्स ने धुरंधर 2 पर उंगली उठाते हुए सीबीएफसी की भूमिका पर सवाल खड़े किए और सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी. इस चिट्ठी में धुरंधर 2 को मिले सर्टिफिकेट पर भी सवाल किए गए. मनोज ने लिखा, "फिल्म 'धुरंधर 2' देखने के बाद, मैं गहरे सदमे, गुस्से और निराशा के कारण यह लेटर लिखने पर मजबूर हूं. इस फिल्म को, इसकी बेहद अश्लील, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा के बावजूद, बिना किसी जिम्मेदारी के आम जनता के देखने के लिए मंजूरी दे दी गई है."
CBFC ने छोड़ी अपनी जिम्मेदारी
"मुझे उन अश्लील शब्दों को लिखने में भी शर्म आ रही है, जिनका इस्तेमाल फिल्म में दर्जनों बार किया गया है. क्या यही वह कंटेंट का स्तर है जिसे भारत सरकार अब पारिवारिक दर्शकों के लिए स्वीकार्य मानती है? क्या CBFC ने बुनियादी शालीनता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से छोड़ दी है?"
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"मैं यह सवाल सीधे तौर पर पूछता हूं क्या CBFC के जिन सदस्यों ने इस फिल्म को मंजूरी दी है, वे इसे अपने परिवारों, अपनी पत्नियों, या इससे भी ज्यादा जरूरी, अपनी बेटियों के साथ बैठकर आराम से देख पाएंगे? क्या वे अपने ही घरों में ऐसी भाषा का इस्तेमाल होते बर्दाश्त करेंगे? अगर नहीं, तो फिर किस नैतिक आधार पर इसे आम जनता पर थोपा जा रहा है?"
धुरंधर 2 को सर्टिफिकेट देने में बरती गई लापरवारी?
"यह सिर्फ लापरवाही नहीं है. यह जवाबदेही और संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी को दिखाता है. इस तरह के कंटेंट को सर्टिफिकेट देना उन लोगों की काबिलियत, फैसले लेने की क्षमता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिन्हें यह अहम भूमिका सौंपी गई है. ये लोग कौन हैं जो यह तय कर रहे हैं कि लाखों भारतीयों को किस तरह का कंटेंट दिखाया जाना चाहिए? CBFC सदस्यों की नियुक्ति करते समय किन योग्यताओं या मानकों का पालन किया जा रहा है? क्या कोई समीक्षा तंत्र मौजूद है, या ऐसे फैसले बिना किसी जवाबदेही के लिए जा रहे हैं?"
"इस तरह का कंटेंट सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करता. यह अश्लीलता को सामान्य बनाता है, सामाजिक मूल्यों को दूषित करता है, और सीधे तौर पर युवा और कोमल मन पर असर डालता है. क्या हम जान-बूझकर पब्लिक डायलॉग और सांस्कृतिक ताने-बाने के इस पतन को होने दे रहे हैं?"
"मैं मांग करता हूं: इस फिल्म को दिए गए सर्टिफिकेट की तुरंत समीक्षा की जाए. जिस आधार पर इस तरह के कंटेंट को मंजूरी दी गई, उसका सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाए. इस फैसले में शामिल अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त और बिना किसी समझौते वाली गाइडलाइंस बनाई जाएं."
"यह आम जनता की चिंता का एक गंभीर मामला है. इस मुद्दे पर चुप्पी या कोई कार्रवाई न करना, इस धारणा को ही मजबूत करेगा कि इस तरह की लापरवाही स्वीकार्य है. मैं जल्द से जल्द एक ठोस जवाब और सुधारात्मक कार्रवाई की उम्मीद करता हू."