लंबे समय से अटकी हुई दिलजीत दोसांझ की फिल्म “पंजाब 95” लगातार विवादों और मुश्किलों का सामना करती रही. आखिरकार फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज का मंच मिला. 3 जुलाई को फिल्म “सतलुज” नाम से रिलीज हुई, लेकिन रिलीज़ के तुरंत बाद ही दर्शकों के बीच इसे देखने की होड़ लग गई. सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक फिल्म को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गईं. हालांकि, रिलीज़ के महज़ दो दिन बाद, 5 जुलाई की शाम फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद यह एक बार फिर चर्चा और विवाद दोनों का केंद्र बन गई. इसी बीच फिल्म के मुख्य कलाकार दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़े कई वीडियो साझा किए. इनमें से एक वीडियो में उन्होंने मशहूर गायक जसबीर जस्सी की खुलकर तारीफ़ की. दरअसल, जसबीर जस्सी ने फिल्म “सतलुज” और दिलजीत दोसांझ की सराहना करते हुए उन्हें “वेल डन” लिखा था. इन्हीं सभी मुद्दों और दिलजीत दोसांझ को लेकर एनडीटीवी ने मशहूर गायक जसबीर जस्सी से खास बातचीत की.
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प्रशांत: जस्सी जी, हाल ही में दिलजीत ने अपनी फिल्म “सतलुज” को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर डाले हैं. उनमें से एक वीडियो में उन्होंने आपकी बड़ी तारीफ़ की है. क्या फिल्म को लेकर आपने उनसे कुछ बात की थी?
जसबीर जस्सी: आज मैं अमेरिका में बैठा हूं, सर. सैन फ्रांसिस्को में. मैं और मेरे दोस्त, जो इंडिया से हैं और उनके गांव के ही हैं, हम लोग बैठे हुए थे. उन्होंने इंस्टाग्राम खोला तो उनका लाइव हमने देखा. उसमें मेरा मन कर रहा था कि मैं लिखूं “वेल डन”. मैंने “वेल डन” लिखा और उन्होंने देख लिया. उन्होंने मेरी तारीफ़ भी की और बड़ा प्यार किया.
और “सतलुज” के बारे में सारे लोग ज़िक्र कर रहे हैं. यहां पर तो सारी दुनिया इसका ज़िक्र कर रही है. जिस-जिसके घर में जाते हैं, वो सारे उसी फिल्म को लेकर बैठे हैं. मतलब कम से कम आज ही दस लोगों के साथ मिला हूं, तो वो सब उसके ऊपर ज़िक्र कर रहे हैं, उसके ऊपर बात कर रहे हैं. क्योंकि ये पंजाब के लिए बहुत बड़ा टॉपिक है.
जसवंत सिंह कलरा साहब बहुत बड़ी पर्सनैलिटी थे. पंजाब के लिए ही नहीं, मैं आपको बताऊं कि ये हिस्ट्री से निकलता है. भाई कन्हैया जी का नाम आपने सुना होगा. गुरु गोबिंद सिंह महाराज जी के ज़माने में भाई कन्हैया जी थे. वहीं से इंसानियत की सेवा का संदेश चलता है कि किसी के दुख को अपना दुख कैसे समझना है, कैसे महसूस करना है और कैसे उसे दुख से निकालने की कोशिश करनी है. वही कलरा साहब कर रहे थे. हमारे लिए और सारी दुनिया के लिए वो बहुत बड़ी पर्सनैलिटी हैं.
प्रशांत: आपने फिल्म देखी?
जसबीर जस्सी: हां, मैं देख रहा हूं. मैं तो अभी बस फिल्म ही देख रहा था. पहले टुकड़े-टुकड़े में देख रहा था. जिसके घर में जाता था, थोड़ा-थोड़ा देख लेता था. अब पूरी देख रहा हूं.
प्रशांत: इंडिया से तो इसको स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है. अमेरिका में लोग देख पा रहे हैं इसको?
जसबीर जस्सी: हां-हां, बिल्कुल देख पा रहे हैं. अमेरिका में बिल्कुल देख पा रहे हैं और बाकी सारी दुनिया में भी.
और मैं आपको बताऊं, लोगों ने इसको इतना व्हाट्सऐप कर दिया है, डाउनलोड करके, कि मुझे नहीं लगता आज तक कोई ऐसी फिल्म होगी जो हर बंदे के व्हाट्सऐप पर दस-दस, बारह-बारह, पंद्रह-पंद्रह बार आ चुकी हो.
मुझे समझ नहीं लगी कि ये क्यों बैन की गई. मतलब इसमें कोई बात ही नहीं थी बैन करने वाली.
अगर किसी भी सरकार को, किसी एजेंसी को या पुलिस डिपार्टमेंट को ऐसा लगता है कि ये पुलिस की बेबसी है, तो मैं ये ज़रूर कहना चाहता हूं कि ये पुलिस की बेबसी नहीं है, नालायकी है और बहुत बड़ी बदनीयती है. अगर हुई है ये बात, तो आगे से इसमें सुधार करना चाहिए कि किसी इंसान को ऐसे बेगुनाह नहीं मारना चाहिए, उसके ऊपर अत्याचार नहीं करना चाहिए, इंटरोगेशन के नाम पर ज़ुल्म नहीं करना चाहिए.
अगर ये गलती हुई भी है, तो जो डिपार्टमेंट है, वो उसके ज़िम्मेदार होते हैं. उनको आगे से ये सुधार कर लेना चाहिए कि ऐसी कोई गलती न हो, जिससे इंसानियत को इतना नुकसान पहुंचे.
प्रशांत: जी5 प्लेटफॉर्म, जिस पर ये फिल्म आ रही थी, अमेरिका में लोग उसको डाउनलोड कर रहे हैं?
जसबीर जस्सी: हां, डाउनलोड कर रहे हैं. मेरे सामने लोगों ने डाउनलोड किया है. और यहां कुछ ऐसे बॉक्स भी हैं जिनमें कोई भी फिल्म किसी भी प्लेटफॉर्म की आ जाती है. मगर ज़ी5 को भी बहुत ज़्यादा लोग डाउनलोड करके इस फिल्म को देखना चाह रहे हैं कि ये फिल्म है क्या और उस समय क्या हुआ था.
हमारे लिए तो ये आंखों देखी बातें हैं. मैं भी 1992-93 में पुलिस डिपार्टमेंट में था. उस समय केपीएस गिल का दौर था. उस समय बहुत नाजायज़ लोगों को मारा जा रहा था, उनके साथ धक्का हो रहा था.
मैं ये नहीं कहूंगा कि सारे पुलिस वाले ऐसे थे, मगर बहुत सारे लोग ऐसा कर रहे थे. वो अपने प्रमोशन के लिए बेगुनाहों को मार रहे थे. उन्होंने अपनी बहुत तरक्कियां कीं. जो कांस्टेबल था, वो एसएसपी तक पहुंचा. जो हेड कांस्टेबल था, वो डीआईजी और आईजी तक पहुंचा. ऐसे करके भी उनकी तरक्कियां हुईं.
ये उनका एप्रिसिएशन का तरीका होता था. मुझे लगता है कि सबसे बड़ी रिश्वतखोरी यही थी कि इंसान को मारकर, इंसान को मारने की रिश्वत लेकर, अपनी पोज़िशन हासिल कर रहे हो.
प्रशांत: आखिर में मैं आपसे ये पूछना चाहूंगा कि ये जो फिल्म अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नहीं है, आपको क्या लगता है कि क्या वजह रही होगी जिसकी वजह से इसको हटा दिया गया? पहले सीबीएफसी ने 127 कट बताए, फिर बहुत दिनों तक फिल्म रुकी रही. उसके बाद 3 जुलाई को रिलीज़ हुई और 5 जुलाई की शाम को हटा दिया गया.
जसबीर जस्सी: मुझे लगता है कि इसका कोई ज़्यादा बड़ा कारण नहीं होगा. ये किसी की पर्सनल डिसीजन ही होगा. क्योंकि न सेंट्रल गवर्नमेंट, न पंजाब गवर्नमेंट और न ही पुलिस डिपार्टमेंट की तरफ़ से कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट आया है. कोई ऑर्डर भी नहीं दिया गया है.
मुझे लगता है कि शायद उनको लगा हो कि पता नहीं ये कहानी किस तरफ़ जा रही है. लेकिन लोगों में अवेयरनेस तो आई है इससे. घर-घर तक ये बात पहुंची.
और मैं इसका श्रेय हनी त्रेहन को देना चाहता हूं कि उन्होंने इस फिल्म के साथ एक क्रांति लाई है. जो बेगुनाहों के साथ ज़ुल्म होता है, उसके खिलाफ ये फिल्म है.
दिलजीत ने ये रोल करके अपनी कौम के प्रति और ईमानदारी के प्रति जो वफ़ादारी होती है, उसका सबूत दिया है.
प्रशांत: दिलजीत से आपकी बात हुई क्या? या बात करने वाले हैं?
जसबीर जस्सी: नहीं, मैं कल शायद बात करूंगा उनके साथ. आज बात नहीं हुई क्योंकि वो भी बिज़ी थे. मैं उनका लाइव देखता रहा. उसके बाद मैंने मैसेज भेजे, मगर उस समय यहां रात हो रही थी. यहां ज़्यादातर लोग सो जाते हैं. मैं कल कोशिश करूंगा उनसे बात करने की और मिलने की. मैं भी सैन फ्रांसिस्को में हूं, शायद वो भी आसपास ही हों.
प्रशांत: ओके, बहुत-बहुत शुक्रिया.