नवरात्र के 9 दिनों तक देश के हर कोने में डांडिया और गरबा नाइट्स का आयोजन किया जाता है, जिसमें जोश और उत्साह के साथ सभी गरबा खेलते हैं और बॉलीवुड से लेकर रीजनल गानों पर जमकर डांस करते हुए नजर आते हैं. लेकिन हम आपको आज गुजराती गरबा गीत के बारे में बताने वाले हैं, जिसे सुनकर आप खुद ब खुद डांडिया खेलने पर मजबूर हो जाएंगे. इस गीत की धुन नौ दिनों की थकान को दूर कर देगी और आप रातभर डांडिया खेलते हुए नजर आएंगे. यह गीत है चालो पेला बांबू बीट्स ना गरबा रमवा जाइये गीत.
गुजराती गरबा गीत का मतलब
'चालो पेला बांबू बीट्स ना, गरबा रमवा जाइये
पूनम नी रात छे, सखियों ने साथ छे
चाचर ना चौक मा आओने,
आवोने रमवा ने आवोने,
तमे डांडिया रमवा आवो'
नेल गरबो शीरे, अंबे माँ चालो धीरे धीरे,
सोनल गरबो शीरे, अंबे माँ चालो धीरे धीरे
ये गुजरात का मशहूर गरबा गीत है, जिसकी धुन उत्साह तो भर ही देती है. बल्कि शब्द मन को खुश कर देते हैं. इस गीत में सखियों को गरबा खेलने के लिए बुलाया जाता है. 'चालो पेला बांबू बीट्स ना, गरबा रमवा जाइये' में सहेलियां आपस में कहती हैं कि चलो गरबा के मशूहर बांबू बीट्स पर गरबा खेलने जाते हैं.
आगे गाने के बोल हैं, 'पूनम नी रात छे, सखियों ने साथ छे' इसका अर्थ है आज पूनम की रात यानी पूर्णिमा की रात है और सहेलिया भी साथ हैं, जिनके साथ गरबा खेला जा सकता है. इसके आगे कहा गया चाचर ना चौक मा आओने, आवोने रमवा ने आवोने, तमे डांडिया रमवा आवो, जिसका अर्थ है चाचर चौक का जिक्र किया गया है जहां गरबा के समय मां अंबे की स्थापना की गई थी. सभी को वहां गरबा खेलने के लिए बुलाया जा रहा है.
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