राज कपूर का ड्रीम प्रोजेक्ट, अश्विनी भावे का इंतजार और लता मंगेशकर की सुरीली आवाज, 35 साल बाद भी सदाबहार है ये गाना

35 साल पहले रिलीज हुआ यह सदाबहार गीत आज भी मोहब्बत में इंतजार की बेचैनी को उसी खूबसूरती से बयान करता है. राज कपूर के ड्रीम प्रोजेक्ट और लता मंगेशकर की आवाज ने इसे हमेशा के लिए अमर बना दिया.

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राज कपूर की फिल्म में चला था पाकिस्तानी एक्ट्रेस का जादू

मोहब्बत में इंतजार शायद सबसे मुश्किल इम्तिहान होता है और जब इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा हो जाए तो दिल बहुत बेचैन होने लगता है. ऐसे ही हालत को बयां करता एक खूबसूरत फिल्मी गीत है जो अनायास ही होंठों पर आ जाता है. दिलचस्प बात यह है कि यह गीत आज से 35 साल पहले रिलीज हुआ था, लेकिन इसकी ताजगी अब भी वैसी ही बनी हुई है. राज कपूर के ड्रीम प्रोजेक्ट, लता मंगेशकर की सुरीली आवाज, पाकिस्तानी अभिनेत्री जेबा बख्तियार की सादगी और अश्विनी भावे की एक्टिंग ने इस गीत को हमेशा के लिए यादगार बना दिया. हम बात कर रहे हैं "देर न हो जाए कहीं, देर न हो जाए..." गाने की, जो फिल्म हिना का सबसे चर्चित गीत है.

राज कपूर का ड्रीम प्रोजेक्ट थी 'हिना'

'हिना' राज कपूर का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है. वह भारत और पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर एक प्रेम कहानी बनाना चाहते थे, लेकिन फिल्म पूरी होने से पहले उनका निधन हो गया. इसके बाद उनके बेटे रणधीर कपूर ने इस फिल्म को पूरा किया. 1991 में रिलीज हुई इस फिल्म ने अपनी कहानी, संगीत और कलाकारों की वजह से अलग पहचान बनाई.

पाकिस्तान से लाया गया था नया चेहरा

'हिना' से पाकिस्तानी अभिनेत्री जेबा बख्तियार ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था. मासूमियत और सादगी से भरे उनके किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया. ऋषि कपूर और जेबा बख्तियार की जोड़ी भी काफी चर्चा में रही, वहीं फिल्म के मधुर गीतों ने इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया और इसे उस दौर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया.

गाना सुनने के लिए यहां क्लिक करें 

लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी

फिल्म का गीत "देर न हो जाए कहीं, देर न हो जाए..." मोहब्बत में इंतजार की बेचैनी को बेहद खूबसूरती से बयां करता है. यही वजह है कि आज भी यह गीत रेडियो, म्यूजिक प्लेटफॉर्म और स्टेज कार्यक्रमों में अक्सर सुनाई देता है. कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि प्यार में इंतजार का एहसास बन चुका है.

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इस गीत को लता मंगेशकर और सुरेश वाडकर ने अपनी आवाज दी थी, जबकि संगीत रवींद्र जैन ने तैयार किया था. गीत के बोल भी रवींद्र जैन ने ही लिखे थे. मधुर धुन, भावपूर्ण शब्द और कलाकारों की सादगी ने इस गाने को उन चुनिंदा गीतों की सूची में शामिल कर दिया, जिन्हें आज भी सदाबहार माना जाता है. 35 साल बाद भी यह गीत नई पीढ़ी के श्रोताओं के बीच अपनी पहचान बनाए हुए है.

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