कसम सिनेमा की OTT पर कतई मिस मत करिएगा 'अखंडा 2: तांडवम', कॉमेडी बनकर रह गई एक्शन मूवी

'अखंडा 2: तांडवम' ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है और ये हर सिनेमा प्रेमी को जरूर देखनी चाहिए. क्यों? यहां हर वो वजह बताई गई है जिससे एक एक्शन फिल्म सुपर कॉमेडी में तब्दील हो गई है.

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'अखंडा 2: तांडवम' ओटीटी पर आई, कतई मिस ना करें भाई
नई दिल्ली:

'अखंडा 2: तांडवम (Akhanda 2 Thaandavam)' ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आ चुकी है. ये हिंदी में भी रिलीज हुई है. नंदमुरी बालकृष्ण (NBK) की ये ऐसी फिल्म है जो एक सिने प्रेमी को जरूर देखनी चाहिए. अब आप सोच रहे होंगे कि मैं ये फिल्म आपको क्यों देखने के लिए कह रहा हूं? ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर सकी और नेटफ्लिक्स पर भी ट्रेंडिंग में अपनी जगह नहीं बना सकी है, फिर भी मैं इसे देखने के लिए कह रहा हूं. आपको हैरत हो सकती है. लेकिन ऐसा नहीं है. 'अखंडा 2: तांडवम' क्यों देखनी चाहिए तो इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि किस तरह से स्टार पावर पर खेलने के चक्कर में डायरेक्टर गुड फिल्म मेकिंग की हर बात को नजर अंदाज कर जाता है और साबित कर देता है कि यहां विषय से बड़ा स्टार है.

'अखंडा 2: तांडवम' की कहानी की बात करें तो इस कहानी में देशभक्ति है. इस कहानी में अध्यात्म है. इस कहानी में ढेर सारी शिक्षा है. इस कहानी में विज्ञान है. इस कहानी में कुंभ है. इस कहानी में ऐसी बातें हैं जो कतई दुनियावी नहीं लगती और मायावी इतनी ज्यादा हो जाती हैं कि दिमाग पर बोझ लगने लगती है. बोयापती श्रीनू ने फिल्म की कहानी लिखी है और लगता ही नहीं है कि कहानी लिखी गई है, ऐसा लगता है जो समझ आता गया, होता गया.

अब एनबीके की इस फिल्म में एक्टिंग की बात करें तो बोयापती श्रीनू को सलाम है. उन्होंने दिग्गज कलाकारों से ऐसी ओवरएक्टिंग करवाई है कि गली-मोहल्लों में होने वाली नौटंकी से भी आगे निकल गए हैं. ऐसा लगता ही नहीं है कि सितारों की कोई प्रॉपर वर्कशॉप हुई है. संयुक्ता जैसी एक्ट्रेस यहां एक्टिंग के मोर्चे पर पूरी तरह ब्लैंक हैं. बजरंगी भाईजान की मुन्नी हर्षाली मल्होत्रा के चेहरे पर एक्सप्रेशंस की बत्ती गुल है. फिर बात आती है तो एनबीके तो बोयापति श्रीनू के हिसाब से तो उनको एक्टिंग की कोई जरूरत ही नहीं है. वो जो भी कर देंगे वही सबसे बड़ी करामात है.

बोयापती श्रीनू ने अखंडा भी बनाई थी और ब्लॉकबस्टर रही थी. फिल्म की एक कहानी थी और एक दिशा थी. लेकिन यहां तो पूरी फिल्म दिशा से भटकी हुई लगती है. एक्शन ऐसा कि आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि डायरेक्टर ने इतने दूर की कैसे सोच ली. फिल्म का वीएफएक्स बेहद कमजोर है. फिर एनबीके जिस तरह की डायलॉग डिलिवरी करते हैं, उसे सुनने के लिए दिमाग पर जोर डालना पड़ता है कि वह क्या कह रहे हैं.

अखंडा 2 को देखकर दिमाग की बत्ती गुल हो जाती है. अगर आप सिने प्रेमी हैं यह देखना चाहते हैं कि सभी संसाधनों के साथ हिट फिल्म का खराब सीक्वल कैसे बनाया जाता है तो अखंडा 2 जरूर देखनी चाहिए. यह बात भी समझनी चाहिए कि जब कलाकार कला से बड़ा हो जाता है तो सिर्फ 'अखंडा 2' ही बन सकती है. हां, एक बात और 'अखंडा 2' को अगर कोई टक्कर देता है तो वह कमल हासन की फिल्म इंडियन 2 है.

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