बॉलीवुड फिल्मों के लिए सालों की मेहनत और लंबी शूटिंग की खबरें तो आपने खूब सुनी होंगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी भी क्लासिक फिल्म है, जो सिर्फ 27 दिनों में बनकर तैयार हो गई थी. इस फिल्म ने सीमित सेट और तेज शूटिंग शेड्यूल के बावजूद दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी. इसकी कहानी और एक्टिंग ने इसे बॉक्स ऑफिस पर सफल बनाया, जिसके चलते इस फिल्म को आज भी इसे याद किया जाता है। हम बात कर रहे हैं साल 1963 में आई फिल्म दिल एक मंदिर की.
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लव ट्रायंगल लेकिन कुछ अलग सा
डायरेक्टर सीवी श्रीधर की इस फिल्म की कहानी आज भी लोगों की आंखों में आंसू ले आती है. फिल्म में राजेंद्र कुमार, मीना कुमारी और राज कुमार जैसे दिग्गज कलाकार थे. कहानी एक डॉक्टर की है, जिसे अपनी पुरानी प्रेमिका से दोबारा मिलना पड़ता है, लेकिन स्थिति तब दुखद हो जाती है जब उसे पता चलता है कि वह प्रेमिका अब किसी और की पत्नी है और उसके पति का इलाज खुद उसे ही करना है. त्याग और प्रेम की ये ऐसी मिसाल थी कि सिनेमाघर में बैठे दर्शक खुद को रोने से नहीं रोक पाते थे.
सुपरहिट गाने, फिल्म फेयर अवॉर्ड
उस दौर के हिसाब से ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही. शंकर जयकिशन का म्यूजिक फिल्म की जान था. ‘याद न जाए बीते दिनों की..' और ‘दिल एक मंदिर है..' जैसे गाने आज भी लोगों के पसंदीदा हैं. इस फिल्म के लिए राज कुमार को फिल्मफेयर का बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवॉर्ड मिला था. ‘दिल एक मंदिर' सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि त्याग और इंसानियत की कहानी है. कम समय में बनी इस फिल्म ने यह साबित किया कि अच्छी कहानी और मजबूत एक्टिंग किसी भी फिल्म को अमर बना सकते हैं. आज भी जब इस फिल्म का जिक्र होता है, तो लोग सिर्फ इसकी कहानी ही नहीं, बल्कि उस दौर के सिनेमा की सादगी और गहराई को भी याद करते हैं.