लुधियाना का गांव बना पाकिस्तान तो बैंकॉक में बसाया गया लियारी टाउन, दो देश, आठ लोकेशन पर शूट हुई धुरंधर, धुरंधर 2

धुरंधर फिल्म में दिखा पाकिस्तान असल में कई लोकेशन्स और बड़े सेट्स का कमाल है. जानिए कैसे मेकर्स ने स्क्रीन पर रियल जैसा माहौल तैयार किया.

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धुरंधर में दिखा पाकिस्तान असली या फिल्मी जादू, सच जानकर चौंक जाएंगे

धुआं उठती गलियां, दीवारों पर उर्दू के पोस्टर, भीड़ से भरे बाजार और हर फ्रेम में वही पुराना शहर वाला एहसास, ‘धुरंधर' देखते वक्त ऐसा लगता है जैसे कैमरा सीधे पाकिस्तान की सड़कों पर घूम रहा हो. हर सीन इतना रियल है कि आंखें धोखा खा जाएं और दिमाग मानने को तैयार हो जाए कि ये सब सच में वहीं शूट हुआ है. लेकिन यहीं से शुरू होता है असली खेल, क्योंकि जितना आप देखते हैं, कहानी उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. अब सवाल यही है कि अगर ये सब उतना सीधा नहीं है, तो आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा था.

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बैंकॉक में बसाया गया कराची का लियारी

अब सस्पेंस से पर्दा हटता है. फिल्म के लिए थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में करीब 6 एकड़ का ग्रैंड सेट तैयार किया गया. इसे कराची के लियारी इलाके जैसा बनाने के लिए 500 से ज्यादा इंडियन और थाई आर्टिस्ट्स ने दिन-रात मेहनत की. दीवारों पर उर्दू के साइन, पुराने पोस्टर और लोकल मार्केट जैसा माहौल, हर छोटी चीज को इतनी बारीकी से तैयार किया गया कि स्क्रीन पर ये बिल्कुल असली लगता है.

पंजाब और चंडीगढ़ में बदला पूरा माहौल

भारत में भी कई जगहों को कहानी के हिसाब से पूरी तरह बदल दिया गया. लुधियाना के खेड़ा गांव को रातों-रात पाकिस्तानी गांव जैसा बना दिया गया. घरों की छतों पर झंडे लगाए गए और गलियों का लुक बदला गया. वहीं चंडीगढ़ के सेक्टर-17 अंडरपास में शानदार बाइक चेज सीन शूट हुआ, जिसने फिल्म को और रोमांचक बना दिया.

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लेह की ऊंचाई और मुश्किल शूट

लद्दाख के पत्थर साहिब इलाके में हाई-एल्टीट्यूड एक्शन सीन्स फिल्माए गए. यहां का मौसम और ऊंचाई टीम के लिए बड़ी चुनौती साबित हुए. बावजूद इसके, टीम ने शानदार सीन्स शूट किए, जो फिल्म के सबसे यादगार हिस्सों में शामिल हैं.

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मुंबई और कसौली का भी बड़ा रोल

मुंबई फिल्म का एक अहम शूटिंग बेस रहा. फिल्मिस्तान स्टूडियो, माध आइलैंड, डोंबिवली-मांकोली ब्रिज और बैलार्ड एस्टेट जैसे लोकेशन्स पर अलग-अलग सीन फिल्माए गए. इसके अलावा कसौली के लॉरेंस स्कूल में भी खास शूट हुआ, जो अपने अलग लुक के लिए जाना जाता है.

मेहनत रंग लाई, दर्शकों ने किया सलाम

धुरंधर की टीम ने जिस तरह अलग-अलग लोकेशन्स को मिलाकर पाकिस्तान जैसा माहौल तैयार किया, वो काबिल-ए-तारीफ है. यही वजह है कि फिल्म सिर्फ कहानी ही नहीं, बल्कि अपने विजुअल एक्सपीरियंस के लिए भी याद रखी जा रही है.

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