35 साल पहले आई इस फिल्म में श्रीदेवी और अनिल कपूर लीड रोल में थे. 1991 में रिलीज हुई यह फिल्म एक हिंदी म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म है. जिसे यश चोपड़ा ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था और हनी ईरानी और राही मासूम रजा ने लिखा था. फिल्म में श्रीदेवी (मां और बेटी दोनों के दोहरे रोल में) और अनिल कपूर लीड रोल में थे. वहीं वहीदा रहमान, अनुपम खेर, दीपक मल्होत्रा और डिप्पी सागू अहम सपोर्टिंग रोल में थे.
यश चोपड़ा के प्रोडक्शन बैनर 'यश राज फिल्म्स' के तहत बनी 'लम्हे' की शूटिंग राजस्थान और लंदन में दो शेड्यूल में हुई थी. हालांकि फिल्म ने घरेलू स्तर पर औसत बिजनेस किया, लेकिन इसे क्रिटिक्स से बहुत तारीफ मिली. कई अवॉर्ड्स जीतने वाली 'लम्हे' ने 39वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में 'बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन' का अवॉर्ड जीता. इसके अलावा, 37वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में फ़िल्म को सबसे ज़्यादा 13 नॉमिनेशन मिले, जिनमें बेस्ट डायरेक्टर (चोपड़ा), बेस्ट एक्टर (कपूर), बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस (रहमान) और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (खेर) शामिल थे. इसने 5 अवॉर्ड जीते – बेस्ट फिल्म, बेस्ट एक्ट्रेस (श्रीदेवी), बेस्ट कॉमेडियन (खेर), बेस्ट स्टोरी (ईरानी) और बेस्ट डायलॉग (मासूम रजा).
क्या है कहानी
अनिल कपूर एक युवा NRI वीरेंद्र प्रताप सिंह के रोल में थे. पहली बार अपनी पूर्व गवर्नेंस (बच्चों की देखभाल करने वाली) दुर्गादेवी (वहीदा रहमान) के साथ अपने देश भारत के राजस्थान आते हैं. उनके माता-पिता उनके जन्म से बहुत पहले ही लंदन, यूनाइटेड किंगडम चले गए थे. विरेन की मुलाकात यहां खूबसूरत पल्लवी (श्रीदेवी) से होती है और उन्हें तुरंत ही उनसे प्यार हो जाता है. पल्लवी एक अमीर बिजनेसमैन कोठीवाले ठाकुर (मनोहर सिंह) की बेटी है. ठाकुर ने विरेन के गुजर चुके पिता की तब मदद की थी जब उनका बिजनेस मुश्किल दौर से गुजर रहा था. विरेन और पल्लवी दोस्त बन जाते हैं. हालांकि, जब दाई मां को विरेन की पल्लवी के लिए भावनाओं का पता चलता है, तो वह बताती हैं कि पल्लवी उससे आठ साल बड़ी है, लेकिन विरेन को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता.
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अपनी प्रॉपर्टी से जुड़े एक कानूनी मामले में हारने के बाद पल्लवी के पिता सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाते और उन्हें हार्ट अटैक आ जाता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है. इसके बाद पल्लवी डिप्रेशन में चली जाती है. विरेन उसके पिता की शोक सभा में उसे सांत्वना देने आता है, लेकिन उसे तब झटका लगता है जब वह देखता है कि पल्लवी अपने पुराने बॉयफ्रेंड सिद्धार्थ कुमार भटनागर (दीपक मल्होत्रा) की ओर भागती है, जो एक एयरप्लेन पायलट है. विरेन का दिल टूट जाता है, लेकिन वह भारी मन से पल्लवी और सिद्धार्थ की शादी कराता है. विरेन वापस लंदन चला जाता है.
हालांकि, किस्मत का एक क्रूर मोड़ आता है. दाई मां से यह जानने के बाद कि सिद्धार्थ और गर्भवती पल्लवी दोनों की एक बड़े कार एक्सीडेंट में मौत हो गई है, विरेन भारत आता है. लेकिन मरने से पहले, बुरी तरह घायल पल्लवी अस्पताल में अपनी बेटी पूजा को जन्म देती है, जो बच जाती है. विरेन और दाई मां पल्लवी और सिद्धार्थ की दुखद मौत पर शोक मनाते हैं और गम में डूबा विरेन नवजात पूजा की परवरिश की जिम्मेदारी दाई मां को सौंप देता है.
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20 साल बाद, अब अधेड़ उम्र के विरेन के लिए अतीत को भूलना मुश्किल है और वह पिछले दो दशकों से हर साल सिद्धार्थ और पल्लवी की बरसी पर राजस्थान आता रहा है. हालांकि, वह पूजा से उसके जन्मदिन पर मिलने से बचता रहा है क्योंकि उसका जन्म उसी दिन हुआ था जिस दिन पल्लवी की मौत हुई थी, और पल्लवी की मौत का सदमा और दर्द अभी भी उसके मन में ताजा है. विरेन इस साल फिर से रस्म के लिए भारत आता है और अब बड़ी हो चुकी पूजा (श्रीदेवी) को देखकर हैरान रह जाता है, जो बिल्कुल पल्लवी जैसी दिखती है. वह पूजा और दाई मां को लंदन में अपने घर बुलाता है. लंदन में विरेन के बचपन के दोस्त प्रेम आनंद (अनुपम खेर) को पता है कि विरेन का दिल अभी भी पल्लवी के लिए तड़पता है, जबकि विरेन खुद को दूसरे कामों में व्यस्त रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पल्लवी को भूल नहीं पा रहा है. समय के साथ पूजा विरेन को लेकर पजेसिव हो जाती है. क्या विरेन पूजा के प्यार को स्वीकार करेगा ? जानने के लिए देखिए फिल्म. यह फिल्म आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.