अक्सर सीरीज में रियल लाइफ स्टोरीज की झलक देखने को मिल जाती है. लेकिन हाल ही में प्राइम वीडियो पर एक सीरीज आई है, जिसकी कहानी उस अपराधियों से प्रेरणा लेकर बनाई गई है, जिसके खौफ ने बॉबी देओल के बचपन को खराब कर दिया. दरअसल, 2025 में राज शमानी के पॉडकास्ट में बॉबी देओल ने बताया था कि उनके एक स्कूल के दोस्त को अपराधी रंगा बिल्ला ने किडनैप कर लिया था, जिसके कारण उनका बचपन डर में बीता था. वहीं अब इन्हीं खूंखार अपराधियों की कहानी से प्रेरित प्राइम वीडियो की क्राइम ड्रामा सीरीज राख में देखने को मिल रही है.
रंगा बिल्ला केस से बॉबी देओल का पर्सनल कनेक्शन
बॉबी देओल ने बताया था कि वह छठी क्लास में थे जब क्रिमिनल जोड़ी रंगा और बिल्ला, जो 70 के दशक में देश में अपना खौफ फैलाए हुए ते. उन्होंने उनके स्कूल के दोस्तों को किडनैप किया. हालांकि एक गलतफहमी के कारण वह जिंदा बचकर आ गए. बॉबी देओल ने कहा, वह किडनैप हुए लोगों में सबसे लकी था. बिल्ला और रंगा को लेकर कन्फ्यूजन था. मेरा दोस्त रंगा के साथ था और पुलिस उन पर नजर रखे हुए थी. रंगा भाग गया और मेरे दोस्त को एक पान की दुकान पर छोड़ गया. दुकानदार ने उससे पूछा कि वह कहां रहता है और उसे घर पहुंचा दिया. जबकि किडनैपर्स के पूछने पर बॉबी देओल के दोस्त ने अन्य बच्चों का नाम भी ले लिया और उसमें बॉबी का नाम भी शामिल था. इसी के चलते धर्मेंद्र ने बॉबी पर सख्त पहरा लगा दिया. बॉबी देओल ने कहा, इसके बाद मेरे पिता ने मुझे घर से निकलने नहीं दिया. मैं स्कूल से आता और बस. मैंने साइकिल चलाना भी घर पर सीखा. कॉलेज में जब मेरे दोस्त हाउस पार्टी करते थे तो मुझे जाने की इजाजत नहीं थी. मुझ पर 9 बजे तक का कर्फ्यू लगा था.
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क्राइम ने पूरे देश को चौंकाया
26 अगस्त 1978 में भाई बहन गीता चोपड़ा (16) और संजय चोपड़ा (14) दिल्ली में अपना घर छोड़कर ऑल इंडिया रेडियो प्रोग्राम में हिस्सा लेने पहुंचे थे. लेकिन उन्हें कुलजीत सिंह (रंगा) और जसबीर सिंह (बिल्ला) ने किडनैप कर लिया था. बाद में बाद में चश्मदीदों ने बच्चों की बहादुरी और उनके संघर्ष के बारे में बताया कि गीता ने लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की और घायल होने के बावजूद संजय ने मदद मांगने की कोशिश जारी रखी. हालांकि कोशिश नाकाम रही और दोनों के साथ बेरहमी से मारपीट के बाद हत्या कर दी गई. दो दिन बाद दिल्ली रिज के पास उनकी बॉडी मिली, जिसने सभी को हैरान कर दिया. हालांकि जांच के बाद सितंबर 1978 में रंगा और बिल्ला को गिरफ्तार किया गया. लंबे मुकदमे के बाद दोनों को दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई. 1982 में उन्हें फांसी दे दी गई थी.
प्राइम वीडियो की राख में दिखी कहानी
पांच दशक बाद रंगा बिल्ला केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है क्योंकि प्राइम वीडियो की लेटेस्ट क्राइम सीरीज राख में कहानी देखने को मिली, जिसे 1970 के दशक को दिखाया गया है. इसमें दिल्ली के एक सब इंस्पेक्टर जयप्रकाश (अली फजल) एक केस की जांच करता है, जिसमें परिवारों के दर्द को दिखाया गया है. सीरीज में बाबू (आकाश मखीजा) और रज्जो (रमनदीप यादव) की जुर्म की दुनिया की झलक देखने को मिलती है कि किन परिस्थितियों में वह मुजरिम बने.
राख के बारे में
8 एपिसोड की वेब सीरीज राख 12 जून से हिंदी में दुनियाभर के 240 देशों में प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है, जो एक फैंटसी क्राइम थ्रिलर सीरीज है. इसका निर्देशन और एग्जीक्यूटिव प्रोडक्शन प्रोसित रॉय ने किया है. वहीं अनुषा नंदकुमार और संदीप साकेत ने मिलकर बनाया. जबकि लेखन, को डायरेक्शन और डायलॉग आयुष त्रिवेदी ने लिखा है.
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