बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में आती हैं जो अपने कलाकारों, कहानी के साथ अपने गानों के लिए भी जानी जाती हैं. उन गानों को आप भी मजे से गुनगुनाते होंगे, लेकिन कभी आपने गौर किया है कि जो गाना आपकी जुबान पर चढ़ गया है उसमें खास क्या है. आज हम एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे, जिसको आपने सुना होगा और गुनगुनाया भी होगा, लेकिन उस गाने की खासियत को नहीं जान पाए होंगे. हम बात कर रहे हैं साल 1962 में आई एक फिल्म की, जिसका एक गीत काफी फेमस हुआ. लेकिन उस गाने के दो शब्दों ने उसे और खास बना दिया. तो चलिए बॉलीवुड गीत पहेली में जानते हैं इस गाने के बारे में.
64 साल पुराना वहीदा रहमान का गाना
साल 1962 में आई फिल्म 'साहिब बीबी और गुलाम' उन फिल्मों में शामिल है, जिनकी कहानी, अदाकारी और संगीत आज भी याद किया जाता है. फिल्म में मीना कुमारी, गुरु दत्त, वहीदा रहमान और रहमान जैसे कलाकारों ने अभिनय किया. फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया. लेकिन फिल्म का एक बेहद दिलचस्प गाना है 'भंवरा बड़ा नादान हाय', जिसे आशा भोंसले ने अपनी आवाज दी थी. इस गाने के बोल शकील बदायूंनी ने लिखे और इसका संगीत तैयार किया था हेमंत कुमार ने, इस गाने में वहीदा रहमान और गुरु दत्त नजर आते हैं, इसकी सबसे खास बात है इसके बोल. लेकिन क्या आपने कभी गिनने की कोशिश की है कि पूरे गाने में 'भंवरा' और 'हाय' शब्द कितनी बार आते हैं? यही है इस गाने की मजेदार पहेली, जो इसे खास बनाती है.
'भंवरा' और 'हाय' शब्द कितनी बार आया
गाने के बोल इस तरह हैं-
भँवरा बाड़ा नादान हाय,बगियन का, बगियन
हम्म हम्म हम्म हम्म हम्म हम्म
बगियन का मेहमान हाय,फिर भी जाने ना, जाने ना, जाने ना
कलियन की मुस्कान हाय,भँवरा बाड़ा नादान हाय
बगियन का मेहमान हाय,फिर भी जाने ना, जाने ना, जाने ना
कलियन की मुस्कान हाय,भँवरा बाड़ा नादान
कभी उड़ जाए कभी मंडलाये,भेद जिया के खोले ना
कभी उड़ जाए कभी मंडलाये,भेद जिया के खोले ना
सामने आये नैन मिलाए,मुख देखे कुछ बोले ना
वो मुख देखे कुछ बोले ना,भँवरा बाड़ा नादान हाय
आंखियों में रच के चले बच बच के,जैसे वो कोई बेगाना
आंखियों में रच के चले बच बच के,जैसे वो कोई बेगाना
रहे संग दिल के मिले नहीं मिल के,बन के रहे वो अनजाना
हो बन के रहे वो अनजाना,भँवरा बाड़ा नादान हाय
कोई जब रोके कोई जब टोके,गुनगुन करता भागे रे
कोई जब रोके कोई जब टोके, गुनगुन करता भागे रे
ना कुछ पूछे ना कुछ बुझे, कैसा अनाड़ी लागे रे
वो कैसा अनाड़ी लागे रे, भँवरा बाड़ा नादान हाय
बगियन का मेहमान हाय,फिर भी जाने ना, जाने ना, जाने ना
कलियन की मुस्कान हाय, भँवरा बड़ा
इस पूरे गाने में 'भंवरा' शब्द कुल 7 बार आता है. वहीं हाय शब्द कुल 11 बार आता है. दिलचस्प बात ये है कि शकील बदायूंनी ने यहां पर भंवरे को एक कीड़े के तौर पर नहीं, बल्कि प्रेम और चंचलता के लिए इस्तेमाल किया गया है.
फिल्म को मिले थे कई अवॉर्ड
'साहिब बीबी और गुलाम' का डायरेक्शन अबरार अलवी ने किया था और इसके प्रोड्यूसर थे गुरु दत्त. फिल्म में मीना कुमारी ने छोटी बहू, गुरु दत्त ने भूतनाथ और वहीदा रहमान ने जाबा का किरदार निभाया था. फिल्म को 1963 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस मिलाकर कुल चार अवॉर्ड मिले. इसे हिंदी की बेस्ट फीचर फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला था.